डॉ. पल्लाक्षी ने रचा इतिहास, NEET PG 2026 में AIR-2 हासिल कर बनीं देश की टॉपर

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डॉ. पल्लाक्षी ने रचा इतिहास, NEET PG 2026 में AIR-2 हासिल कर बनीं देश की टॉपर

Udaipur Times, Dr. Pallakshi Prasad : जब नेशनल बोर्ड ऑफ़ एग्ज़ामिनेशन्स ने 24 सितंबर, 2026 को NEET PG 2026 के नतीजे घोषित किए, तो स्क्वाड्रन लीडर पल्लक्षी प्रसाद पूरे देश में जानी-पहचानी हस्ती बन गईं। कानपुर एयर फ़ोर्स स्टेशन पर मेडिकल ऑफ़िसर के तौर पर तैनात, 28 वर्षीय पल्लक्षी ने इस मुश्किल परीक्षा में 720 में से 633 अंक हासिल करके ऑल इंडिया रैंक 2 प्राप्त की। आर्म्ड फ़ोर्सेज़ मेडिकल सर्विसेज़ के डायरेक्टर जनरल, एयर मार्शल संदीप थरेजा ने व्यक्तिगत रूप से उन्हें इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने अपनी मिलिट्री ज़िम्मेदारियों को पूरा करने और फ़ुल-टाइम नौकरी करने के साथ-साथ यह मुकाम हासिल किया।

शुरुआती शिक्षा और डॉक्टर बनने का सपना

रांची में जन्मीं और हैदराबाद में पली-बढ़ीं पल्लक्षी ने दिल्ली पब्लिक स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। दिलचस्प बात यह है कि उनके माता-पिता दोनों इंजीनियर होने के बावजूद, उन्होंने डॉक्टर बनने के पल्लक्षी के बचपन के सपने में कभी कोई रुकावट नहीं डाली; बल्कि, उन्होंने हमेशा उनका साथ दिया। स्कूल के बाद, उन्होंने बिना कोई गैप ईयर लिए 2016 में NEET PG परीक्षा पास की और ऑल इंडिया रैंक 1,312 हासिल की।

AFMC से मेडिकल करियर की शुरुआत

NEET UG पास करने के बाद, पल्लक्षी ने पुणे के आर्म्ड फ़ोर्सेज़ मेडिकल कॉलेज (AFMC) में दाखिला लिया, जहां वह C3 बैच की छात्रा थीं। AFMC से MBBS पूरा करने के बाद, उन्हें इंडियन एयर फ़ोर्स में मेडिकल ऑफ़िसर के तौर पर कमीशन मिला और अभी वह कानपुर एयर फ़ोर्स स्टेशन पर तैनात हैं।

नौकरी के साथ तैयारी का तालमेल: सबसे बड़ी चुनौती

इंटरव्यू में पल्लक्षी ने बताया कि नौकरी के साथ-साथ NEET PG की तैयारी करना इस प्रक्रिया का सबसे मुश्किल हिस्सा था। अक्सर, ड्यूटी से थककर घर लौटने पर उन्हें चिंता होती थी कि वह उन उम्मीदवारों का मुक़ाबला कैसे कर पाएंगी जो अपना पूरा समय सिर्फ़ पढ़ाई में लगा रहे थे। उन्होंने अपनी तैयारी के लिए 'Marrow' प्लेटफ़ॉर्म का सहारा लिया। एक ऐसा रिसोर्स जिसका इस्तेमाल वह MBBS के तीसरे और चौथे साल के दौरान पहले ही कर चुकी थीं। उनका मानना ​​है कि एक जाने-पहचाने टूल का दोबारा इस्तेमाल करने से उन्हें अपनी पढ़ाई के लिए तेज़ी से एक मज़बूत आधार बनाने में मदद मिली।

मेंटरशिप और रिसर्च से मिली मदद

आर्मी डॉक्टर डॉ. विनीत बेहरा के मार्गदर्शन ने पल्लाक्षी की सफलता में अहम भूमिका निभाई। तैयारी के दौरान, उन्होंने रिसर्च पेपर्स पर भी काम किया, जिससे उनकी एकेडमिक पढ़ाई के साथ-साथ प्रोफेशनल ग्रोथ में भी मदद मिली। इससे पता चलता है कि उन्होंने न सिर्फ़ किताबों से पढ़ाई पर ध्यान दिया, बल्कि मेडिकल फील्ड में प्रैक्टिकल अनुभव और मेंटरशिप हासिल करने पर भी ज़ोर दिया।

यह उपलब्धि क्यों खास है?

AFMC ने इस उपलब्धि को अपने पूरे समुदाय के लिए गर्व का पल बताया है। पल्लाक्षी की कहानी एक प्रेरणादायक उदाहरण है, खासकर उन युवाओं के लिए जो नौकरी या दूसरी ज़िम्मेदारियों को संभालते हुए बड़ी परीक्षाओं की तैयारी करने को लेकर घबराते हैं। स्कूल की हेड गर्ल बनने से लेकर AFMC में पढ़ाई करने और देश की सबसे मुश्किल मेडिकल परीक्षाओं में से एक में दूसरी रैंक हासिल करने तक, पल्लाक्षी का सफ़र अनुशासन, धैर्य और लगातार कड़ी मेहनत का एक शानदार उदाहरण है।

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