BHU से की पढ़ाई अब उसी कॉलेज में बनीं अस्टिटेंट प्रोफेसर, डॉ श्वेता पांडे ने रचा इतिहास
Udaipur Times, Dr. Shweta Pandey : बिहार के योगपट्टी ब्लॉक के फतेहपुर गांव की बेटी डॉ. श्वेता पांडे ने अपनी प्रतिभा, लगन और कड़ी मेहनत से एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। उन्हें प्रतिष्ठित बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के इतिहास विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर चुना गया है। उनकी इस कामयाबी से फतेहपुर गांव और पूरे पश्चिम चंपारण इलाके में खुशी का माहौल है।
डॉ. श्वेता पांडे ने अपनी शुरुआती पढ़ाई योगपट्टी में की और बाद में आगे की पढ़ाई के लिए BHU चली गईं। यूनिवर्सिटी से अंडरग्रेजुएट से लेकर इतिहास में PhD तक का अपना एकेडमिक सफर पूरा करने के बाद, अब उन्हें उसी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर चुना गया है।
पापा बिजनेसमैन और मां गृहिणी
डॉ. श्वेता पांडे के पापा अखिलेशश्वर पांडे एक बिजनेसमैन हैं, जबकि उनकी मां पुष्पा पांडे एक गृहिणी हैं। बचपन से ही होनहार छात्रा रहीं श्वेता ने अपनी शुरुआती पढ़ाई सरस्वती विद्या मंदिर, योगपट्टी से पूरी की।
उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा फर्स्ट डिवीज़न मार्क्स के साथ पास की। इसके बाद, उन्होंने मुजफ्फरपुर के MDDM कॉलेज से फर्स्ट डिवीज़न ऑनर्स के साथ इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की।
BHU से BA ऑनर्स और MA
आगे की पढ़ाई के लिए डॉ. श्वेता पांडे बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) गईं। उन्होंने BHU से इतिहास में BA ऑनर्स और MA की डिग्री फर्स्ट डिवीजन मार्क्स के साथ हासिल की। इसके बाद, उन्होंने उसी यूनिवर्सिटी से इतिहास में PhD पूरी की। लगातार उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद, अब उन्हें यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर चुना गया है।
इतिहास विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए चुना गया
BHU के इतिहास विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर उनका चुना जाना डॉ. श्वेता पांडे के एकेडमिक सफर में एक बड़ी उपलब्धि है। अब उन्हें उसी यूनिवर्सिटी में टीचिंग फैकल्टी में शामिल होने का मौका मिला है जहाँ उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा और रिसर्च पूरी की थी। इस खबर से फतेहपुर गांव और आसपास के इलाकों के लोगों में खुशी है। परिवार के सदस्य और जानने वाले उन्हें बधाई दे रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों की युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा
डॉ. श्वेता पांडे अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान लगातार कड़ी मेहनत और लगन बनाए रखी। उनकी कामयाबी ग्रामीण इलाकों की उन युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना देखती हैं। अपनी पढ़ाई के पूरे सफर में मैट्रिकुलेशन से लेकर PhD तक श्वेता ने लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया है और अब वह शिक्षा के क्षेत्र में ज़िम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार हैं।