लोक कला मंडल में नाटक का मंचन
‘सैयां भये कोतवाल’ नाटक का मंचन लोक आज कला मंडल के ऑडिटोरिया में दी परफॉरमर्स एंव लोक कला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जिसमे दी परफोरमर्स के सभी नाटककार ने अपनी -अपनी प्रतुति दी।
‘सैयां भये कोतवाल’ नाटक का मंचन आज लोक कला मंडल के ऑडिटोरिया में दी परफॉरमर्स एंव लोक कला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जिसमे दी परफोरमर्स के सभी नाटककार ने अपनी -अपनी प्रतुति दी।
नाटक के संयोजक प्रबुद्ध पांडे ने बताया कि सैया भये कोतवाल महाराष्ट्र कि लोक नाटक शैली ‘तमाशा’ का एक बहुत ही उत्कृष्ट नाटक है। इस नाटक का लेखन वसंत सबनिश ने 70 के दशक में किया, जिसका मूल नाम विच्छा माँझी पूरी करा है। सैया भये कोतवाल नाम से हिंदी भाषा में इस नाटक का अनुवाद उषा बनर्जी ने किया था। यह नाटक मुख्य रूप ग्रामीण दर्शको के लिए लिखा गया है, इसलिए नाटक में ग्रामीण हास्य एंव मनोरंजन दिखाई देता है।
इस नाटक का कथानक बहुत ही साधारण एंव विश्वसनीय है। सूरजपुर नामक एक काल्पनिक प्रदेश में कार्यरत कोतवाल आकस्मित देहांत हो जाता है। सूरजपुर का राजा प्रधान को कोतवाल के खाली पद की पूर्ति का आदेश देता है और प्रधान चयन की अनदेखी प्रक्रिया कर अपने नालायक और साले को नौकरी पर रख लेता है।
चयन प्रक्रिया के अनुसार हवलदार को क्रमोन्नत कर कोतवाल बनाना था। परन्तु ऐसा नहीं होने पर हवलदार अपनी प्रेमिका मैनावती के साथ मिलकर नए कोतवाल को फ़साने कि योजना बनाना है। योजना के अनुसार मैनावती अपने रूप योवन और नाच गाने से नए कोतवाल को झाल में फसा कर अपनी कई इच्छाए पूरी करवाती है।
मैनावती कोतवाल से राजा के आभूषण और जवाहरात चोरी करवाती है और अंत में राजा का छपरी पलंग चोरी करावा कर उसे फंसा देती है।
यह नाटक अधिकारियों कि लापरवाही और कामचोरी के साथ ही भाई भतीजावाद पर कटाक्ष करता है। देश के कई नाटककारो ने इस नाटक को अपने रंग-ढंग से मंचित किया है।



