सोलर पैनल पर जमी धूल बन सकती है बड़े घाटे की वजह, जाने कब और कैसे करें सफाई ?
Udaipur Times, Solar Panel Cleaning Tips : बिजली के बढ़ते बिल के कारण आज के दौर में सोलर पैनल लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। केंद्र सरकार के साथ-साथ बहुत से राज्यों की सरकार सोलर पैनल लगवाने पर सब्सिडी भी उपलब्ध कराती है। यही कारण है कि सोलर पैनल देश में अब लोकप्रिय होते जा रहे हैं। 3 किलोवाट का सोलर पैनल लगाने पर एक महीना में 350 से 400 यूनिट तक बिजली का उत्पादन होता है। ऐसे में जितना आपके घरों में बिजली की खपत है, उससे अधिक ही बिजली बनती है. इलेक्ट्रिसिटी बिल भरने के झंझट से मुक्ति मिलती है।
सोलर पैनल को 25 साल से अधिक प्रदर्शन के लिए किया जाता है डिजाइन
सोलर एनर्जी सिस्टम को 25 साल या उससे अधिक समय तक बेहतर प्रदर्शन देने के लिए डिजाइन किया जाता है। लेकिन कई लोग एक महत्वपूर्ण पहलू को नजरअंदाज कर देते हैं, जो सीधे बिजली उत्पादन को प्रभावित करता है। यह महत्वपूर्ण पहलू है सोलर पैनल की नियमित सफाई नहीं करना।
धूल, प्रदूषण, पक्षियों की बीट, पत्तियां और अन्य पर्यावरणीय कचरा सोलर पैनलों की सतह पर जमा होकर सूर्य की किरणों को फोटोवोल्टिक सेल तक पहुंचने से रोक देते हैं। इसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ता है। भारत जैसे देश में, जहां बहुत क्षेत्रों में धूल और मौसम की स्थिति अलग-अलग है, वहां सोलर पैनलों की नियमित सफाई बेहद जरूरी हो जाती है।
क्यों जरूरी है सोलर पैनलों की सफाई?
सोलर पैनल सूर्य की रोशनी को बिजली में बदलने का काम करते हैं। जब पैनलों की सतह पर गंदगी जमा हो जाती है तो सूर्य की रोशनी का अवशोषण कम हो जाता है और फिर इससे बिजली उत्पादन घटने लगता है। कई अध्ययनों और फील्ड डेटा के अनुसार, गंदे सोलर पैनलों की क्षमता 15 से 30 प्रतिशत तक कम हो सकती है, खासकर शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में।
नियमित सफाई से कई फायदे होते हैं, जिनमें बेहतर बिजली उत्पादन, बिजली बिल में अधिक बचत, पैनलों की लंबी उम्र और ओवरहीटिंग या हॉटस्पॉट बनने के जोखिम में कमी शामिल है। व्यावसायिक और औद्योगिक परियोजनाओं में थोड़ी-सी क्षमता में गिरावट भी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।
गंदगी कैसे सोलर पैनल के प्रदर्शन को प्रभावित करती है?
भारत की जलवायु और पर्यावरणीय परिस्थितियां कई अन्य देशों की तुलना में पैनलों पर अधिक तेजी से धूल जमा होने का कारण बनती हैं। इसके प्रमुख कारण हैं-
निर्माण कार्य से उड़ने वाली धूल और रेत
वाहनों और उद्योगों से होने वाला प्रदूषण
पक्षियों की बीट और सूखी पत्तियां
बारिश के बाद बनने वाले पानी के दाग
मौसमी परागकण और अन्य कचरा
ये सभी तत्व पैनलों पर एक परत बना देते हैं, जिससे सूर्य की रोशनी बाधित होती है और बिजली उत्पादन कम होने लगता है।
नियमित सफाई के फायदे
बिजली उत्पादन में बढ़ोतरी: साफ पैनल अधिकतम सूर्य प्रकाश को अवशोषित करते हैं, जिससे पूरे दिन बेहतर बिजली उत्पादन होता है।
निवेश पर बेहतर रिटर्न: अधिक बिजली उत्पादन से बिजली बिल में बचत बढ़ती है और सोलर सिस्टम पर किया गया निवेश जल्दी वापस मिलता है।
रखरखाव संबंधी समस्याओं में कमी: सफाई के दौरान पैनलों में दरार, ढीले कनेक्शन या अन्य नुकसान का समय रहते पता चल जाता है।
बेहतर सुरक्षा और विश्वसनीयता: पैनलों पर जमा मलबा हटाने से हॉटस्पॉट और ओवरहीटिंग जैसी समस्याओं का खतरा कम हो जाता है।
कितनी बार करनी चाहिए सफाई?
सफाई स्थान और पर्यावरणीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
घरों की छतों पर लगे सोलर पैनल: हर 2 से 3 महीने में एक बार।
औद्योगिक क्षेत्रों में: हर महीने सफाई करना बेहतर माना जाता है।
धूल वाले इलाकों में: गर्मियों के दौरान अधिक बार सफाई की जरूरत पड़ सकती है।
इन्वर्टर ऐप के जरिए बिजली उत्पादन की निगरानी करने से यह पता लगाया जा सकता है कि गंदगी के कारण उत्पादन में कमी आ रही है या नहीं।
सुरक्षित तरीके से कैसे करें सफाई?
सोलर पैनल मजबूत होते हैं, लेकिन उनकी सफाई सावधानीपूर्वक करनी चाहिए।
मुलायम ब्रश या माइक्रोफाइबर कपड़े का इस्तेमाल करें।
तेज रसायनों या डिटर्जेंट से बचें।
साधारण शैंपू या क्लीनिंग मैटेरियल से सफाई कर सकते हैं।
दाग से बचने के लिए साफ या आरओ पानी का उपयोग करें।
सुबह जल्दी या शाम के समय सफाई करना बेहतर रहता है।
बड़े रूफटॉप या औद्योगिक सोलर सिस्टम की सफाई प्रशिक्षित पेशेवरों से कराना अधिक सुरक्षित माना जाता है।
क्या बारिश से साफ हो जाते हैं सोलर पैनल?
बारिश पैनलों से हल्की धूल जरूर हटा सकती है, लेकिन पक्षियों की बीट, प्रदूषण से बने दाग और चिपचिपी गंदगी को पूरी तरह साफ नहीं कर पाती। इसलिए केवल बारिश पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है और समय-समय पर मैनुअल सफाई जरूरी रहती है।
गुणवत्ता भी है महत्वपूर्ण
रखरखाव जहां प्रदर्शन को बेहतर बनाता है, वहीं सोलर पैनलों की गुणवत्ता उनकी लंबी उम्र और टिकाऊपन तय करती है। उच्च गुणवत्ता वाले पैनलों में मजबूत ग्लास कोटिंग, बेहतर सामग्री और उन्नत परीक्षण प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है, जिससे वे कठिन मौसम परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं।
