मुद्रा विनिमय तथा मार्बल, स्टोन्स, हैण्डीक्राफ्ट पर जीएसटी का प्रभाव
उदयपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इन्डस्ट्री द्वारा फैडरेशन ऑफ इण्डियन एक्सपोर्ट ऑरगेनाईजेशन्स (फियो) एवं कोटक सिक्योरिटीज के संयुक्त तत्वावधान में चैम्बर भवन के अरावली सभागार में “मुद्रा विनिमय तथा मार्बल, स्टोन्स, हैण्डीक्राफ्ट पर जीएसटी का प्रभाव” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।
उदयपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इन्डस्ट्री द्वारा फैडरेशन ऑफ इण्डियन एक्सपोर्ट ऑरगेनाईजेशन्स (फियो) एवं कोटक सिक्योरिटीज के संयुक्त तत्वावधान में चैम्बर भवन के अरावली सभागार में “मुद्रा विनिमय तथा मार्बल, स्टोन्स, हैण्डीक्राफ्ट पर जीएसटी का प्रभाव” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला के आरंभ में फैडरेशन ऑफ इण्डियन एक्सपोर्ट ऑरगेनाईजेशन्स के श्री भूपेन्द्रसिंह ने फियो की गतिविधियों की संक्षिप्त जानकारी देते हुए बताया कि देश से निर्यात को प्रोत्साहन देने हेतु विभिन्न गतिविधियों के साथ ही ई-कॉमर्स के माध्यम से ऑन लाईन निर्यात गतिविधियों को भी फियो द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा है।
कार्यशाला में अहमदाबाद के चार्टर्ड अकाउन्टेन्ट श्री प्रकाश उदेशी ने स्लाईड प्रेजेन्टेशन के माध्यम से निर्यात व्यवसाय पर जीएसटी के प्रभाव पर विस्तार से जानकारी दी। कोटक सिक्योरिटीज, मुम्बई के डिप्टी वार्इ्रस प्रेसिडेन्ट श्री अनिन्द्या बनर्जी ने मुद्रा विनिमय पर जीएसटी के विषय में जानकारी दी। सेमिनार में उपस्थित निर्यातको द्वारा विषय विशेषज्ञों से परिचर्चा के दौरान निम्नलिखित बिन्दुओं पर प्रकाश डाला:
1 मार्बल एवं ग्रेनाईट पर जीएसटी की दर 28 प्रतिशत है जबकि मार्बल ब्लॉक्स पर यह दर 12 प्रतिशत ही रखी गई है।
2 हैण्डीक्राफ्ट्स से सम्बन्धित अलग-अलग वस्तुओं पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत से लेकर 28 प्रतिशत तक है। कालीन, दरियां और राजस्थानी रजाई पर 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाया जाता है जबकि मार्बल और पत्थर की मूर्तियों पर जीएसटी की दर 28 प्रतिशत है।
3 मार्बल एवं ग्रेनाईट की प्रोसेसिंग सहित सभी प्रकार के जॉब वर्क पर जीएसटी की दर 18 प्रतिशत तय की गई है।
4 कोई भी निर्यातक, चाहे वह मैन्यूफैक्चरिंग इण्डस्ट्रीज हो अथवा मर्चेन्ट एक्सपोर्टर, लेटर ऑफ अण्डरटेकिंग बॉण्ड के तहत निर्यात कर सकते है अथवा आई.जी.एस.टी. का भुगतान करते हुए निर्यात कर सकते हैं, जिसका बाद में रिफण्ड क्लेम किया जा सकता है।
5 डीजीएफटी के क्षेत्रीय कार्यालयों से मान्यता प्राप्त निर्यातक लेटर ऑफ अण्डरटेकिंग प्राप्त कर सकते हैं।
6 इसके साथ ही वे निर्यातक भी लेटर ऑफ अण्डरटेकिंग निष्पादित करने हेतु सक्षम है जिन्हें उनके कुल निर्यात कारोबार के टर्न ओवर का कम से कम 10 प्रतिशत राशि का पुनर्भरण प्राप्त हुआ हुआ हो। किन्तु शर्त यह है कि पूर्ववर्ती वित्तिय वर्ष में प्राप्त हुई यह राशि 1 करोड़ रूपये से कम नहीं होनी चाहिए।
7 यदि कोई निर्यातक लेटर ऑफ अण्डरटेकिंग निष्पादित करने हेतु सक्षम नहीं है तो उक्त निर्यातक को लेटर ऑफ अण्डरटेकिंग के एवज में बॉण्ड निष्पादित करना होगा। उक्त निर्यातक को आयुक्त के आदेशानुसार एक बैंक गारन्टी देनी होगी। किन्तु शर्त यह है कि बैंक गारन्टी की राशि 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।
8 आयात के लिये बिल ऑफ एन्ट्री फाईल करते समय आयातक को आईजीएसटी का भुगतान करना होगा। आईजीएसटी की दर टैरिफ के अनुसार देय होगी। टेरिफ में आयात की जाने वाली अलग-अलग वस्तुओं के लिये आईजीएसटी की दर पूर्व निर्धारित की गई है।
प्रश्नकाल के दौरान निर्यातकों द्वारा निर्यात व्यापार में जीएसटी कर प्रणाली के लागू होने से सम्बन्धित समस्याएं रखी गई जिनका फियो एवं कोटक महिन्द्रा के अधिकारियों ने उचित स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया। कार्यशाला के आरंभ में यूसीसीआई अध्यक्ष श्री हंसराज चौधरी ने सभी का स्वागत किया। मानद महासचिव श्री अनिल मिश्रा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री आशिष सिंह छाबड़ा ने विषय विशेषज्ञों का परिचय प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में क्वालिटी मार्बल की श्रीमति हसीना चक्कीवाला, इम्प्रेसिव आर्ट एण्ड इन्टीरियर के श्री सुनील चौधरी, पी.तलेसरा एण्ड एसोसिएट्स के श्री पवन तलेसरा ने भी विचार रखें। कार्यशाला में बड़ी संख्या में निर्यातकों एवं निर्यात व्यापार से जुड़ने के इच्छुक युवाओं ने भाग लिया। कार्यशाला के अन्त में फियो के श्री भूपेन्द्र सिंह ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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