चुनाव आयोग: सोशल मीडिया का दुरूपयोग रोकने हेतु निर्देश जारी
चुनाव आयोग द्वारा सोशल मीडिया का दुरूपयोग रोकने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किये गये हैं। चुनाव प्रचार के लिए सभी राजनीतिक पार्टीयां, टेलीविजन, रेडियो एवं प्रिन्ट मीडिया की भांति, ट्विटर, फेसबुक, यू-ट्यूब तथा इंटरनेट वर्चुअल गेम्स के माध्यम से भी चुनाव प्रसार करती हैं।
चुनाव आयोग द्वारा सोशल मीडिया का दुरूपयोग रोकने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किये गये हैं। चुनाव प्रचार के लिए सभी राजनीतिक पार्टीयां, टेलीविजन, रेडियो एवं प्रिन्ट मीडिया की भांति, ट्विटर, फेसबुक, यू-ट्यूब तथा इंटरनेट वर्चुअल गेम्स के माध्यम से भी चुनाव प्रसार करती हैं।
जिला निर्वाचन अधिकारी ने चुनाव आयोग द्वारा दिये निर्देशों की जानकारी देते हुए बताया कि सोशल मीडिया भी अन्य मीडिया साधनों की भांति कानून व चुनाव आयोग को द्वारा जारी दिशा निर्देशिका के भीतर आता है। चुनाव आयोग के निर्देशानुसार सभी प्रत्याशियों को नामांकन दाखिल करते वक्त फॉर्म-26 में शपथ पत्र के माध्यम से किसी भी सोशल मीडिया साइट पर अपने मौजूदा एकाउंट की जानकारी देना अति आवश्यक होगा। जानकारी में अपना दूरभाष नम्बर व ई-मेल आईडी भी शामिल होंगे।
यदि कोई भी राजनैतिक पार्टी टेलिविजन, केबल नेटवर्क या सोशल मीडिया के माध्यम से कोई भी चुनाव संबंधी विज्ञापन या चुनाव प्रसार करती है तो उसे जिला व राज्य स्तर पर गठित एमसीएमसी समिति द्वारा पूर्व प्रमाणिकरण प्राप्त करना आवश्यक होगा। बिना पूर्व प्रमाणिकरण के कोई भी चुनाव संबंधी सामग्री या विज्ञापन जारी नहीं किया जा सकेगा अन्यथा राजनीतिक पार्टियों द्वारा किये जा रहे चुनाव संबंधी व्यय में इसका व्यय शामिल किया जायेगा।
किसी भी इंटरनेट कंपनी या वेबसाइट को जो भी चुनाव से संबंधित सामग्री या विज्ञापन दिया जायेगा उसके व्यय की संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित राजनीतिक पार्टी की ही होगी।
आरपी एक्ट 1951 के सेक्शन 126 के अनुसार टेलीविजन या उसके समान किसी भी उपकरण द्वारा मतदान से 48 घण्टे पूर्व निर्धारित समय में चुनाव प्रसार को बन्द करना होगा। किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में मतदान से 48 घण्टे पूर्व मीडिया के किसी भी माध्यम टीवी, इंटरनेट, चलचित्र, रेडियो, अखबार आदि के द्वारा मतदान को प्रभावित करने से संबंधित कोई भी सामग्री प्रसारित या प्रकाशित नहीं की जा सकेगी।
इस तरह से संबंधित किसी भी कानून का उल्लंघन करने के दोषी को 2 वर्ष की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते है।
उन्होंने बताया कि चुनाव के दौरान कुछ टीवी चेनल्स पर बहस व विचार विमर्श तथा अन्य सामयिकी कार्यक्रमों में भी तय मापदण्डों की अनुपालना के निर्देश दिए गए है।
आयोग ने दिये निर्देशों में कहा कि उम्मीद्वारों के बारे में कोई भी समाचार पत्र या मीडिया अभ्यर्थी अथवा दल के बढा-चढा कर किये गये दावों अथवा ऐसे प्रचार अभियान का हिस्सा नहीं बनेंगे; साथ ही चुनाव अभियान को शांतिपूर्ण एवं सोहार्द के साथ पूरा करने के मद्देनजर आयोग ने अभियान में जातिगत अथवा साम्प्रदायिक आधार को पूर्णत: निषिद्ध किया है।
चुनाव अभियान के दौरान कोई समाचार पत्र अथवा मीडिया द्वारा किसी भी अभ्यर्थी के व्यक्तिगत अथवा चारित्रिक अपमानजनक या झूठा व्यक्तव्य नहीं देंगे। प्रेस/मीडिया चुनाव दलों अथवा प्रत्याशी से किसी भी प्रकार का प्रयोजन अथवा आर्थिक या वस्तु के रूप में भेंट स्वीकार नहीं करेंगे।
To join us on Facebook Click Here and Subscribe to UdaipurTimes Broadcast channels on GoogleNews | Telegram | Signal
