इलेक्ट्रीशियन की नौकरी छोड़ शुरू की जैविक खेती, 32 गांवों में किसानों को किया जागरूक
Udaipur Times, Haryana News : कभी दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में 1500 रुपए महीना वेतन पर इलेक्ट्रीशियन की नौकरी करने वाले बंसीलाल आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। चिड़ी गांव निवासी बंसीलाल ने नौकरी छोड़कर खेती करने की ठानी। अब वह 3.5 एकड़ में जैविक खेती कर रहे हैं।
बंसीलाल ने जैविक खेती के लिए 2013 में मध्य प्रदेश के छतरपुर जाकर 15 दिनों की ट्रेनिंग भी ली। इसके बाद उन्होंने अपनी जमीन पर रासायनिक खाद और पेस्टिसाइड्स का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया। शुरुआती दिनों में लोगों ने उनके इस फैसले पर सवाल उठाए, लेकिन बंसीलाल के पक्के इरादे रंग लाए। वह अपनी 3.5 एकड़ जमीन में बिना किसी केमिकल के धान, गेहूं, सरसों, चना, बाजरा और विभिन्न प्रकार की सब्जियां उगा रहे हैं।
बंसीलाल बताते हैं कि लोगों को जहरमुक्त भोजन से बचाना ही जीवन का असली मकसद है। उनका मानना है कि आज बढ़ती गंभीर बीमारियों का सबसे बड़ा कारण हमारी थाली में मौजूद रासायनिक अवशेष हैं। जब किसान अपनी मिट्टी को बचाएगा, तभी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहेगा।
फसल चक्र अपनाने की सलाह
बंसीलाल ने अन्य किसानों को भी जहरमुक्त खेती के प्रति जागरूक करने का बीड़ा उठाया है। वह अब तक आसपास के 32 गांवों में किसान गोष्ठियों का आयोजन कर चुके हैं। इन गोष्ठियों के जरिए वे किसानों को जैविक खाद तैयार करने, फसल चक्र अपनाने और पेस्टिसाइड-मुक्त खेती करना सिखा चुके हैं। उनकी इस पहल से प्रभावित होकर कई स्थानीय किसान रासायनिक खेती छोड़कर जैविक खेती का मार्ग अपना रहे हैं।