बिना कोयला-पानी के अब 24 घंटे बनेगी बिजली! यहां स्थापित होगा नया पायलट प्लांट

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बिना कोयला-पानी के अब 24 घंटे बनेगी बिजली! यहां स्थापित होगा नया पायलट प्लांट

Udaipur Times, India's first pilot Geothermal Power Plant : लद्दाख की पुगा घाटी में भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) ने यहां अपने दूसरे जियोथर्मल (भू-तापीय) कुएं की ड्रिलिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इसे भारत के पहले पायलट जियोथर्मल पावर प्लांट की स्थापना की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इस परियोजना के सफल होने पर देश को बिना कोयला, गैस या पानी के 24 घंटे स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराने का रास्ता खुल सकता है।

ONGC की अनुसंधान एवं विकास इकाई ONGC Energy Centre ने 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित पुगा घाटी में लगभग एक महीने के भीतर 1,000 मीटर गहराई तक दूसरे कुएं की ड्रिलिंग पूरी की। कंपनी के अनुसार, इस बार ड्रिलिंग पहले अभियान की तुलना में कम समय और कम लागत में पूरी हुई, जिससे परियोजना की तकनीकी क्षमता और दक्षता भी साबित हुई है।

पहले कुएं की सफलता के बाद मिला बड़ा भरोसा

यह दूसरा जियोथर्मल कुआं पुगा में खोदे गए पहले कुएं की सफलता पर आधारित है। पहले कुएं से पानी के उबलने के तापमान से भी अधिक गर्म भाप निकली थी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि इस क्षेत्र में भू-तापीय ऊर्जा की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इसी सफलता के आधार पर अब दूसरे कुएं का विकास किया गया है।

1 मेगावाट का पायलट प्लांट होगा स्थापित

ONGC का कहना है कि दूसरा कुआं भारत के पहले 1 मेगावाट (MWe) जियोथर्मल पायलट पावर प्लांट की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। परियोजना के अगले चरण में इस पावर प्लांट का निर्माण किया जाएगा। भविष्य में इसका विस्तार कर लद्दाख जैसे दूरदराज़ इलाकों को चौबीसों घंटे स्थिर और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने की योजना है।

क्या है जियोथर्मल एनर्जी?

जियोथर्मल ऊर्जा पृथ्वी के भीतर मौजूद प्राकृतिक गर्मी का उपयोग कर बिजली पैदा करने की तकनीक है। इसमें जमीन के नीचे मौजूद गर्म पानी और भाप का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सौर और पवन ऊर्जा की तरह मौसम पर निर्भर नहीं होती, इसलिए इससे दिन-रात लगातार बिजली बनाई जा सकती है। साथ ही यह कम-कार्बन उत्सर्जन वाली स्वच्छ ऊर्जा का स्रोत भी है।

क्यों खास है पुगा घाटी?

पूर्वी लद्दाख की पुगा घाटी को लंबे समय से भारत का सबसे संभावनाशील जियोथर्मल क्षेत्र माना जाता है। हालांकि यहां पहले भी कई बार सर्वे और परीक्षण किए गए थे, लेकिन तकनीकी और आर्थिक चुनौतियों के कारण अब तक व्यावसायिक स्तर पर बिजली उत्पादन शुरू नहीं हो पाया था। ONGC की यह सफलता उस दिशा में बड़ा बदलाव मानी जा रही है।

2030 के ऊर्जा लक्ष्य को मिलेगी रफ्तार

भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में देश की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता 288 गीगावाट से अधिक हो चुकी है। ऐसे में लद्दाख का यह जियोथर्मल प्रोजेक्ट देश के स्वच्छ ऊर्जा मिशन को नई गति देगा और ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने में भी मदद करेगा।

अगर यह पायलट परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में देश के अन्य भू-तापीय क्षेत्रों में भी ऐसे बिजली संयंत्र लगाए जा सकते हैं। इससे भारत को स्वच्छ, टिकाऊ और चौबीसों घंटे उपलब्ध रहने वाला नया ऊर्जा स्रोत मिलेगा।

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