9 बार असफलताओं के बाद भी नहीं मानी हार, 10वें प्रयास में पहली रैंक हासिल कर बनीं IAS अफसर

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9 बार असफलताओं के बाद भी नहीं मानी हार, 10वें प्रयास में पहली रैंक हासिल कर बनीं IAS अफसर 

Udaipur Times, UPPSC Topper Neha Panchal : नेहा पांचाल की सफलता की कहानी एक भावुक सफर है, जो संघर्ष, अटूट संकल्प और एक बहन के प्यार से भरी है। दिल्ली के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली नेहा ने बहुत कम उम्र में ही अपने भाई विनीत को ब्रेन ट्यूमर के कारण खो दिया। उनके भाई की आखिरी इच्छा थी कि नेहा एक अधिकारी बने और यही नेहा का भी लक्ष्य बन गया। 

शादी की जिम्मेदारियां, घर-गृहस्थी संभालना, बेटी की परवरिश और लाखों के कर्ज के बोझ के बीच, उन्होंने फिर से अपनी पढ़ाई शुरू की। UPSC और UPPSC की परीक्षाओं में लगातार नौ बार असफल होने के बावजूद, उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आखिरकार, उनके सालों के संघर्ष का फल तब मिला जब उन्होंने UPPSC परीक्षा में पहली रैंक (Rank 1) हासिल की। ​​आज, वह डिप्टी कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं।

9 बार असफलताओं के बाद भी नहीं मानी हार

दिल्ली से शुरुआत: संघर्ष और भारी कर्ज का दौर

नेहा पांचाल की सफलता की कहानी उनके दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि दिल्ली के एक साधारण परिवार से होने के बावजूद, 2013 में उन्हें एक बड़ा झटका लगा, जब उनके 17 वर्षीय भाई को ब्रेन ट्यूमर होने का पता चला। उसके इलाज के लिए परिवार पर 40 लाख रुपये का भारी कर्ज हो गया। भाई को खोने और परिवार की आर्थिक तंगी ने उनके सभी सपनों को लगभग तोड़ ही दिया था।

शादी और जिम्मेदारियों के बीच, अधिकारी बनने का सपना नहीं छोड़ा

भाई के निधन के ठीक तीन महीने बाद, अप्रैल 2015 में नेहा की शादी हो गई। ससुराल में नई जिंदगी के साथ तालमेल बिठाना और घर की जिम्मेदारियां निभाना उनके लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था। 2016 में बेटी के जन्म के बाद, परिवार की जिम्मेदारियों और अपने भविष्य के सपनों के बीच संतुलन बनाना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई। फिर भी, अधिकारी बनने का सपना उनके भीतर जिंदा रहा।

प्रतियोगी परीक्षाओं में नौ बार असफलता, फिर भी अडिग रहा उनका संकल्प

2018 में, नेहा ने एक बार फिर UPSC की तैयारी के कठिन रास्ते पर चलने का फैसला किया। उन्हें लगातार तीन बार प्रारंभिक परीक्षाओं (Preliminary Exams) में असफलता का सामना करना पड़ा। साल 2021 में, वह सिर्फ दो अंकों से चयन होने से चूक गईं। उन्हें गहरी निराशा का सामना करना पड़ा और लोगों की तरह-तरह की बातें भी सुननी पड़ीं। इसके बाद, 2022 और 2023 की UPPSC परीक्षाओं में भी उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा। नौ बार असफल होने के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी और न ही रुकने का नाम लिया।

9 बार असफलताओं के बाद भी नहीं मानी हार

2024 की UPPSC परीक्षा में पहली रैंक (Rank 1) हासिल की

इस कठिन दौर में, नेहा के पति और उनकी मां एक ढाल बनकर उनके साथ खड़े रहे। लगातार नौ बार असफल होने के बाद भी, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी; बल्कि 2024 की UPPSC परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करके अपनी काबिलियत साबित कर दी। जब उनके पति ने रात 1:30 बजे उन्हें यह खुशखबरी दी कि उन्होंने पहली रैंक हासिल की है, तो नेहा की आंखों में खुशी के आँसू आ गए।

डिप्टी कलेक्टर बनकर, नेहा ने अपने भाई से किया हुआ वादा पूरा किया

उन्होंने न केवल परीक्षा में टॉप किया, बल्कि डिप्टी कलेक्टर बनकर अपने और अपने भाई, दोनों के सपनों को साकार किया। नेहा का सफर उन सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो शायद यह मानती हैं कि शादी और घर-परिवार की जिम्मेदारियों के कारण उनके सपने अधूरे ही रह जाएंगे। उन्होंने साबित कर दिया कि उम्र या हालात का रुकावट बनना केवल एक मानसिक सोच है। मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर, इंसान सबसे कठिन परिस्थितियों को पार करके भी सफलता के शिखर तक पहुँच सकता है। उनकी इस कामयाबी के पीछे उनका अटूट संकल्प और उनके परिवार का उन पर बना पक्का भरोसा है।

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