3 बार फेल होने के बाद भी नहीं मानी हार, चौथे प्रयास में AIR 90 हासिल कर मोरवी बनीं IAS अफसर

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3 बार फेल होने के बाद भी नहीं मानी हार, चौथे प्रयास में AIR 90 हासिल कर मोरवी बनीं IAS अफसर 

Udaipur Times, UPSC Success Story : संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में गिना जाता है। हर साल लाखों अभ्यर्थी IAS और दूसरी प्रशासनिक सेवाओं में जाने के लिए इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन कुछ ही उम्मीदवार अंतिम सफलता तक पहुंच पाते हैं। इस सफर में कई बार असफलता का सामना भी करना पड़ता है। 

ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी मोरवी तिवारी (Maurvie Tiwari) की है, जिन्होंने UPSC में लगातार तीन बार असफलता का सामना किया, लेकिन अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा। चौथे प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 90 (AIR 90) हासिल की और IAS बनने का सपना पूरा किया।

पहले प्रयास में प्रीलिम्स भी नहीं कर पाईं क्लियर

मोरवी तिवारी का UPSC सफर आसान नहीं रहा। अपने पहले प्रयास में ही वह प्रीलिम्स परीक्षा पास नहीं कर सकीं। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले किसी भी अभ्यर्थी के लिए शुरुआती स्तर पर मिली यह असफलता निराश करने वाली हो सकती है। लेकिन मोरवी ने इसे अपने सफर का अंत नहीं माना।

उन्होंने अपनी तैयारी का विश्लेषण किया और यह समझने की कोशिश की कि कहां कमी रह गई। इसके बाद उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया। उन्होंने केवल ज्यादा घंटे पढ़ने के बजाय अपनी गलतियों को पहचानने और उन्हें सुधारने पर ध्यान दिया।

3 बार फेल होने के बाद भी नहीं मानी हार

दूसरे और तीसरे प्रयास में भी नहीं मिली मनचाही सफलता

पहले प्रयास के बाद मोरवी तिवारी ने अपनी तैयारी को नए तरीके से आगे बढ़ाया। उन्होंने आंसर राइटिंग, टेस्ट प्रैक्टिस और अपनी कमजोरियों पर काम करने को प्राथमिकता दी। इसके बावजूद दूसरे और तीसरे प्रयास में भी उन्हें वह सफलता नहीं मिली, जिसकी वह उम्मीद कर रही थीं।

लगातार तीन असफलताओं के बाद भी उन्होंने UPSC की तैयारी नहीं छोड़ी। हर प्रयास को उन्होंने एक सीख की तरह लिया और अगली परीक्षा के लिए अपनी रणनीति में जरूरी बदलाव किए। आखिरकार उनकी लगातार मेहनत का नतीजा चौथे प्रयास में सामने आया।

चौथे प्रयास में हासिल की AIR 90

मोरवी तिवारी ने अपने चौथे प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 90 हासिल की। इस सफलता के साथ उनका IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा हुआ।
उनकी कहानी उन अभ्यर्थियों के लिए खास तौर पर प्रेरणादायक है जो एक-दो प्रयासों में सफलता नहीं मिलने के बाद तैयारी छोड़ने का मन बना लेते हैं। मोरवी का सफर बताता है कि असफलता के बाद यह समझना जरूरी है कि गलती कहां हुई और अगली कोशिश में उसे कैसे सुधारा जा सकता है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के LSR कॉलेज से की पढ़ाई

मोरवी तिवारी की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी मजबूत रही है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट पॉल्स स्कूल और दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) से पूरी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित लेडी श्री राम कॉलेज (LSR) से ग्रेजुएशन किया।

कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का फैसला किया था। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने लंदन में आगे की पढ़ाई की। इसके साथ ही उन्होंने UNICEF में काम भी किया और अपने प्रशासनिक सेवा के लक्ष्य की दिशा में तैयारी जारी रखी।

परिवार से भी मिला प्रशासनिक सेवा का माहौल

मोरवी तिवारी को परिवार से भी पूरा सहयोग मिला। उनके परिवार में प्रशासनिक सेवा से जुड़ा अनुभव पहले से मौजूद था। उनकी मां रेनू तिवारी IAS अधिकारी हैं, जबकि उनके पिता स्वदेश तिवारी RTO के पद पर कार्यरत हैं।
परिवार के अनुभव और सहयोग के साथ मोरवी ने अपने लक्ष्य पर लगातार काम किया। हालांकि, उनकी सफलता में सबसे अहम भूमिका उनकी अपनी निरंतर तैयारी और असफलताओं से सीखने की क्षमता की रही।

मोरवी तिवारी ने बताए UPSC सफलता के 3 मंत्र

UPSC की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए मोरवी तिवारी ने सफलता के तीन महत्वपूर्ण मंत्र बताए हैं। इनका फोकस सिर्फ पढ़ाई की मात्रा पर नहीं, बल्कि तैयारी की गुणवत्ता और लगातार सुधार पर है।

1 अनुशासन के साथ लगातार पढ़ाई करें

UPSC की तैयारी लंबी प्रक्रिया है। ऐसे में कुछ दिनों तक बहुत ज्यादा पढ़ने के बजाय हर दिन नियमित और अनुशासित तरीके से पढ़ाई करना ज्यादा जरूरी है। तैयारी के दौरान निरंतरता बनाए रखना अभ्यर्थी को लंबे समय तक अपने लक्ष्य पर टिके रहने में मदद करता है।

2 सीमित स्टडी मटेरियल रखें और बार-बार रिवीजन करें

UPSC की तैयारी में बहुत ज्यादा किताबें और स्टडी मटेरियल इकट्ठा करना हमेशा फायदेमंद नहीं होता। मोरवी का सुझाव है कि सीमित और भरोसेमंद स्टडी मटेरियल चुनकर उसका बार-बार रिवीजन किया जाए। इससे जरूरी तथ्यों और कॉन्सेप्ट को मजबूत करने में मदद मिलती है।

3 नियमित टेस्ट देकर गलतियों को पहचानें

UPSC की तैयारी में टेस्ट सीरीज और आंसर राइटिंग की भूमिका भी अहम है। नियमित टेस्ट देने से अभ्यर्थी को अपनी कमजोरियों, समय प्रबंधन और उत्तर लिखने की शैली का पता चलता है। इसके बाद उन कमियों पर काम करके अगली परीक्षा में प्रदर्शन बेहतर किया जा सकता है।

तीन असफलताओं के बाद मिली बड़ी सीख

मोरवी तिवारी की कहानी का सबसे बड़ा संदेश यह है कि असफलता को अंतिम परिणाम मानने के बजाय उससे सीखना जरूरी है। पहले प्रयास में प्रीलिम्स पास न कर पाने से लेकर चौथे प्रयास में AIR 90 हासिल करने तक उनका सफर लगातार सुधार और धैर्य का उदाहरण है।

UPSC जैसी परीक्षा में एक प्रयास में सफलता नहीं मिलने का मतलब यह नहीं है कि उम्मीदवार अपने लक्ष्य के योग्य नहीं है। सही रणनीति, नियमित अभ्यास, सीमित स्टडी मटेरियल, टेस्ट प्रैक्टिस और लगातार रिवीजन के साथ तैयारी को बेहतर किया जा सकता है। मोरवी तिवारी की सफलता उन अभ्यर्थियों के लिए यही संदेश देती है कि तीन बार मिली असफलता के बाद भी चौथी कोशिश सफलता की मंजिल तक पहुंचा सकती है।

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