5 बार फेल होने के बाद भी नहीं मानी हार, डायरी के सहारे IFS अफसर बनीं सुष्मिता सिंह
Udaipur Times, IFS Officer Sushmita Singh Success Story: कहते हैं ना बिना संघर्ष के सफलता हासिल नहीं होती है। ये तो हकीकत है मेहनत और लगन के आगे कोई भी मुश्किल आपके रास्ते में नहीं आ सकती है। ऐसी ही सफलता की कहानी हम आपको आज बताने जा रहे हैं। ये कहानी उस बेटी की है जिसने छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव से निकलकर देश की सबसे कठिन परीक्षा को पास किया।

UPSC भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 32 हासिल कर सुष्मिता सिंह ने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर सिविल सेवा का सपना पूरा किया। सुष्मिता को ये सफलता ऐसे ही हासिल नहीं हुई उन्होंने कई बार हार का मुंह भी देखा लेकिन कभी खुद को हारने नहीं दिया। उन्होंने निराश होकर अपने कदम पीछे नहीं हटाये वो लगातार परिश्रम करती रहीं और अंत में जाकर सफलता हासिल की।
बचपन से ही पढ़ाई में रहीं तेज

सुष्मिता सिंह का जन्म छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के छोटे से गांव पृथ्वीपुर में हुआ। वो बचपन से ही पढ़ाई में तेज रहीं। अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने देहरादून के UPES से कंप्यूटर साइंस में B.Tech किया। इसके बाद उन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में नौकरी भी की। लेकिन उनका मन तो सिविल सेवा के ओर भागता रहा।
5 बार हाथ लगी निराशा

साल 2019 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ कर सुष्मिता ने UPSC की तैयारी शुरू कर दी थी। इस पूरे सफर में उनके पिता भानु प्रताप सिंह का सहयोग उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बना। पिता ने हमेशा बेटी का हौसला बढ़ाया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। लेकिन सुष्मिता का सफर आसान नहीं था। शुरुआत में कई बार उन्हें हार मिली। UPSC की तैयारी कर पहले पांच प्रयासों में वह कई बार पेपर दिए, लेकिन हर बार केवल निराशा हाथ लगी।
हर असफलता के बाद अपनी खामियों को डायरी में लिखा

असफलता के बाद निराश होकर बैठने के बजाय सुष्मिता ने खुद को और ज्यादा मजबूत किया। वो जितनी भी बार असफल होती गईं अपनी खामियों को डायरी में लिखती गईं। सुष्मिता हर दिन अपने लक्ष्य, गलतियां और सुधार के बारे में लिखती। अब यही छोटा-सा और असरदार तरीका उनके बड़े सपनों को आकार देने में मददगार साबित हुआ। कोरोना महामारी के बाद दिल्ली जाकर उन्होंने तैयारी को नए सिरे से शुरु किया।

आखिरकार सुष्मिता ने 2025 में अपने छठे प्रयास को आकार देते हुए अपना सपना पूरा किया और Indian Forest Service में IFS अफसर बन गई। आज सुष्मिता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का उदाहरण हैं जो थोड़ी सी असफलता हाथ लगने पर निराश होकर बैठ जाते हैं। कभी इंसान को निराश नहीं होना चाहिए अगर आप परिश्रमी हैं और कड़ी लगन से अपने काम को करते हैं तो एक दिन सफलता जरूर आपके दामन को चूमती है।
