गांव से आई बेटी को सभी लोग मारते थे ताने, दिनभर उड़ाते थे मजाक, अब IAS अफसर बन दिया जवाब

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गांव से आई बेटी को सभी लोग मारते थे ताने, दिनभर उड़ाते थे मजाक, अब IAS अफसर बन दिया जवाब

Udaipur Times, Who is IAS Surabhi Gautam : ‘गांव की बेटी कैसी हो, सुरभि गौतम जैसी हो...’ नारा लगाते हुए जिस लड़की का कभी गांव में भव्य स्वागत किया गया था, करीब 25 साल पहले उसी लड़की के जन्म पर माता-पिता के अलावा परिवार में कोई खास खुश नहीं था। बड़ी जॉइंट फैमिली के लिए वह दिन बाकी दिनों की तरह एक साधारण दिन था। लेकिन उसी लड़की ने आगे चलकर अपनी मेहनत, कुछ बनने की चाह और जुनून के दम पर पूरे देश में अपनी पहचान बनाई। 

आज IAS अधिकारी सुरभि गौतम की कहानी उन युवाओं के बीच चर्चा में रहती है, जो छोटे शहर या गांव से निकलकर बड़े सपने देखते हैं। गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाली सुरभि ने आगे चलकर BARC, ISRO, PCS, SSC और UPSC जैसी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की।

गांव से आई बेटी को सभी लोग मारते थे ताने

पिता वकील, मां टीचर

सुरभि गौतम मध्य प्रदेश के सतना जिले के छोटे से गांव अमदारा के एक साधारण परिवार से आती हैं। उनका जन्म 21 अगस्त 1991 को हुआ था। उनके पिता वकील हैं, जबकि मां शिक्षिका हैं। सुरभि की शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से हुई। गांव के माहौल से निकलकर शहर में पढ़ाई करना उनके लिए आसान नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाया और लगातार आगे बढ़ती रहीं।

बोर्ड परीक्षा में मैथ्स में मिले 100 में से 100 नंबर

सुरभि बचपन से ही पढ़ाई में काफी होशियार थीं। वह बोर्ड परीक्षाओं में फर्स्ट डिवीजन से पास होती थीं। एमपी बोर्ड की पांचवीं कक्षा के रिजल्ट में उन्हें गणित में 100 में से 100 अंक मिले थे। उनके शानदार प्रदर्शन पर उनकी टीचर ने उन्हें बुलाकर काफी तारीफ की और भविष्य में अकादमिक क्षेत्र में आगे बढ़ने की सलाह दी। 

गांव से आई बेटी को सभी लोग मारते थे ताने

शिक्षिका से मिली यह प्रशंसा सुरभि के लिए बड़ा मोटिवेशन बन गई। छोटी सी सुरभि को लगने लगा कि अगर वह हर परीक्षा में अच्छे नंबर हासिल करेंगी तो लोग उनकी तारीफ करेंगे। यही सोच आगे चलकर उनकी पढ़ाई के प्रति गंभीरता की वजह बनी। 10वीं और 12वीं में भी उन्होंने 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए।

गांव से आई लड़की की इंग्लिश का उड़ाते थे मजाक

गांव के हिंदी मीडियम स्कूल से पढ़ी सुरभि जब शहर के बड़े कॉलेज पहुंचीं तो अंग्रेजी उनके सामने एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई। कॉलेज के शुरुआती दिनों में जब उनसे अंग्रेजी में अपना परिचय देने के लिए कहा गया तो वह ठीक से नहीं बोल पाईं। इसके बाद कुछ स्टूडेंट्स ने उनकी अंग्रेजी का मजाक उड़ाया। बताया जाता है कि इस दौरान एक टीचर ने भी उनकी योग्यता को लेकर सवाल उठाया। 

यह घटना सुरभि के लिए मुश्किल जरूर थी, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी मानकर हार नहीं मानी। उन्होंने अंग्रेजी सुधारने का फैसला किया। सुरभि रोजाना 10 नए अंग्रेजी शब्द सीखती थीं। वह दीवार के सामने और शीशे के सामने खड़े होकर अंग्रेजी में बोलने की प्रैक्टिस करती थीं। लगातार अभ्यास का असर हुआ और धीरे-धीरे उनकी अंग्रेजी में सुधार आने लगा।

 

इंजीनियरिंग के बाद TCS की जॉब मिली

सुरभि गौतम ने मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीई की डिग्री हासिल की। कॉलेज के दौरान भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा। वह अपनी इंजीनियरिंग बैच की टॉपर रहीं और उन्हें चांसलर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें TCS में नौकरी मिली। एक तरफ उनके पास अच्छी नौकरी थी, लेकिन उनके मन में प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना था।

नौकरी छोड़कर शुरू की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी

सुरभि ने नौकरी को अपनी अंतिम मंजिल नहीं माना। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर ध्यान देने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग परीक्षाओं में हिस्सा लेना शुरू किया। उनकी मेहनत का नतीजा यह रहा कि उन्होंने एक के बाद एक कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की। उनकी उपलब्धियों में BARC, ISRO, PCS और SSC जैसी परीक्षाएं शामिल बताई जाती हैं। एक परीक्षा में सफलता मिलने के बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी को रोकने के बजाय आगे बढ़ाया और अपने सबसे बड़े लक्ष्य UPSC की तैयारी जारी रखी।

गांव से आई बेटी को सभी लोग मारते थे ताने

UPSC ने पूरा किया IAS बनने का सपना

सुरभि का लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाना था। इसके लिए उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। UPSC की तैयारी के दौरान उन्होंने अपनी पिछली सफलताओं से मिले अनुभव का भी इस्तेमाल किया। लगातार मेहनत और तैयारी के बाद उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की और IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया। गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाली जिस लड़की की कभी अंग्रेजी को लेकर हंसी उड़ाई जाती थी, वही आगे चलकर प्रशासनिक सेवा का हिस्सा बनी।

गांव में हुआ भव्य स्वागत

सुरभि की सफलता के बाद जब वह अपने गांव पहुंचीं तो लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया। गांव में लोग ‘गांव की बेटी कैसी हो, सुरभि गौतम जैसी हो’ जैसे नारे लगाते हुए उनके स्वागत में शामिल हुए। जिस लड़की के जन्म के समय परिवार के अलावा किसी ने खास खुशी नहीं मनाई थी, उसकी सफलता के बाद पूरा गांव गर्व महसूस कर रहा था। यह बदलाव सुरभि की मेहनत और उपलब्धियों की कहानी को और खास बनाता है।

सुरभि गौतम की कहानी से क्या सीख मिलती है?

सुरभि गौतम की कहानी में सबसे खास बात यह है कि उन्होंने अपनी कमजोरियों से भागने के बजाय उन पर काम किया। अंग्रेजी नहीं आने की वजह से उनका मजाक उड़ाया गया, लेकिन उन्होंने उसी भाषा को सीखने के लिए रोजाना अभ्यास किया।उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि गांव या छोटे शहर से आने वाला होना सफलता की राह में स्थायी बाधा नहीं है। 

सीमित संसाधनों के बावजूद अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो आगे बढ़ने के रास्ते बनाए जा सकते हैं।यही वजह है कि सुरभि गौतम की कहानी आज प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले कई युवाओं के लिए एक प्रेरक उदाहरण के तौर पर सामने आती है।

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