प्रायोगिक जीवन्त धर्म सेवा धर्म: धर्माचार्य कनकनन्दीजी
आध्यात्मिक वैज्ञानिक श्रमणाचार्य कनकनन्छीजी गुरूदेव ससंघ की प्रेरणा व अनुमोदना से भारत के सर्व दिगम्बर साधु- साध्वियों की चिकित्सा व्यवस्था के व्यापक अभियान से सेवाभावी चिकित्सक वैद्य, डॉक्टर जुड़ते जा रहे हैं। इसी श्रृंखला में उदयपुर नगर के दो वैद्य डॉ. श्यामसुन्दर औदिच्य, डॉ. शोभालाल औदिच्य को आचार्यश्री ने स्वर्ण निर्मित प्रशस्ति पत्र से पुरस्कृत किया।
आध्यात्मिक वैज्ञानिक श्रमणाचार्य कनकनन्दीजी गुरूदेव ससंघ की प्रेरणा व अनुमोदना से भारत के सर्व दिगम्बर साधु- साध्वियों की चिकित्सा व्यवस्था के व्यापक अभियान से सेवाभावी चिकित्सक वैद्य, डॉक्टर जुड़ते जा रहे हैं। इसी श्रृंखला में उदयपुर नगर के दो वैद्य डॉ. श्यामसुन्दर औदिच्य, डॉ. शोभालाल औदिच्य को आचार्यश्री ने स्वर्ण निर्मित प्रशस्ति पत्र से पुरस्कृत किया।
यह कार्यक्रम सेक्टर- 11 के आदिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर में सम्पन्न हुआ। गुरूदेव ने अपनी स्वरचित कविता- सेवा का व्यापक स्वरूप एवं फल की प्रस्तुति के अनन्तर प्राचीन से लेकर आधुनिक युग में सेवा का स्वरूप को धर्म एवं विज्ञान की दृष्टि से बताते हुए श्रद्धालुजनों को सेवा हेतु प्रेरित किया।
बिना जिज्ञास के ज्ञान नहीं मिलता- मुनिसुविज्ञसागरजी
से. 11 आदिनाथ भवन में आचार्यश्री कनकनन्दीजी गुरूदेव के शिष्य श्रमण मुनि सुविज्ञसागरजी ने उपस्थित श्रावकों को शिक्षा का मनोविज्ञान बताते हुए कहा कि बिना जिज्ञासा व सरलता से कोई भी अच्छा विद्यार्थी नहीं बन सकता और ना ही ज्ञानार्जन कर सकता। इसलिए मात्र स्कूली शिक्षा से कोई महान नहीं बन सकता। इसके लिए जिज्ञासु, विनम्र व सत्याग्रही होना आवश्यक है, तब ही जीवन का बहुआयामी विकास होता है।
इस दौरान संस्था के प्रतिनिधि मंडल द्वारा आचार्यश्री को आगामी समय में प्रशिक्षण शिविर व वैज्ञानिक संगोष्ठी आयोजित करने के लिए निवेदन किया।
