4 बार मिली असफलता 5वें प्रयास में बनी IAS अफसर, मां की एक सीख ने बदल दी पूरी जिंदगी

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4 बार मिली असफलता 5वें प्रयास में बनी IAS अफसर, मां की एक सीख ने बदल दी पूरी जिंदगी 

Udaipur Times, Success Story of IAS Officer Shakti Dubey : आईएएस शक्ति दुबे की कहानी लाखों युवाओं के लिए प्ररेणा का स्त्रोत है। उनकी इस सफलता के पीछे सबसे बड़ी वजह मां का एक मंत्र और डायरी के पीछे लिखा हुआ एक शेर है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के शक्ति दुबे ने 2024 अखिल भारतीय रैंक (AIR 1) हासिल की सफलता की कहानी लिख डाली।

4 बार मिली असफलता 5वें प्रयास में बनी IAS अफसर

संगम नगरी का माहौल 

प्रयागराज अपनी शिक्षा के लिए जाना जाता है, जहां से कई विद्वान और प्रशासक निकले हैं। इस माहौल ने शक्ति को अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया। यहीं पर शक्ति ने अपनी पढ़ाई की नींव रखी, जो उनके UPSC एग्जाम के लिए बहुत अहम साबित हुई।

शक्ति दुबे ऐसे माहौल में पली-बढ़ीं जहां शिक्षा को बहुत महत्व दिया जाता था। बचपन से ही उन्होंने पढ़ाई पर ध्यान दिया और नई चीज़ें सीखने की उत्सुकता रखी। हालांकि उनके स्कूल का नाम नहीं बताया गया है, लेकिन प्रयागराज के माहौल का उन पर गहरा असर पड़ा।

4 बार मिली असफलता 5वें प्रयास में बनी IAS अफसर

स्कूल और कॉलेज की शिक्षा

स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद, शक्ति ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया, जो एक मशहूर संस्थान है। वहाँ उन्होंने बायोकेमिस्ट्री में बैचलर ऑफ़ साइंस (B.Sc.) की डिग्री हासिल की।

इससे शक्ति को अपने वैज्ञानिक तरीकों और सोचने की क्षमता को विकसित करने में मदद मिली। बायोकेमिस्ट्री में स्पेशलाइज़ेशन करने का मतलब था कि उनमें बारीकी से विश्लेषण करने और समझने की रुचि पैदा हुई। ये कौशल उनकी UPSC की तैयारी के लिए बहुत काम आए।

BHU से पोस्ट-ग्रेजुएशन किया

2016 में अपनी B.Sc. पूरी करने के बाद, शक्ति ने भारत के टॉप शिक्षण संस्थानों में से एक, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बायोकेमिस्ट्री में मास्टर ऑफ़ साइंस (M.Sc.) की पढ़ाई की। वहाँ उन्हें सामाजिक और बौद्धिक मुद्दों के बारे में जानकारी मिली। BHU में पढ़ाई के दौरान ही शक्ति की दिलचस्पी गवर्नेंस और एडमिनिस्ट्रेशन में बढ़ी, जिसके बाद उन्होंने सिविल सर्विस में जाने का फ़ैसला किया।

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कुछ समय तक टीचिंग भी की

M.Sc. पूरा करने के बाद, शक्ति ने कुछ समय तक टीचिंग भी की। हालांकि सटीक जगहों के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन इससे सीखने और ज्ञान बांटने के प्रति उनका जुनून दिखता है। टीचिंग से उन्हें कम्युनिकेशन और लीडरशिप जैसे स्किल्स विकसित करने में मदद मिली, जो एक सिविल सर्वेंट के लिए ज़रूरी हैं।

UPSC की तैयारी का 7 साल का सफ़र

2018 में M.Sc. पूरा करने के बाद, शक्ति ने UPSC सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी करने का फ़ैसला किया। उन्होंने ऑप्शनल सब्जेक्ट के तौर पर सोशल साइंस और इंटरनेशनल रिलेशंस को चुना। इससे उनकी तैयारी में साइंस और सोशल साइंस दोनों का मेल हो सका।

उन्होंने UPSC परीक्षा की तैयारी में सात साल बिताए और अपनी पढ़ाई व लक्ष्यों पर ध्यान दिया। इससे उनके लक्ष्यों के प्रति उनका धैर्य और गंभीरता पता चलती है।

मां की एक बात ने बढ़ाया हौसला 

लगातार तीन बार UPSC प्रीलिम्स भी न निकले और चौथी बार UPSC मेन्स देकर केवल 2 नंबरों से चूक जाने के बाद शक्ति दुबे पूरी तरह टूट चुकी थीं। तब उनकी मां ने उनसे सिर्फ एक बात कही थी, "कभी भी खुद से झूठ मत बोलना।" मां के इसी भरोसे ने उन्हें पांचवें प्रयास के लिए खड़ा किया।

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