30 से ज्यादा परीक्षाओं में मिली असफलता, 12वीं में आए 67 प्रतिशत अंक, हिंदी माध्यम से पढ़कर चौथे प्रयास में बने IPS
Udaipur Times, IPS Aditya : यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। हर साल लाखों अभ्यर्थी इसमें शामिल होते हैं, लेकिन सफलता कुछ ही उम्मीदवारों को मिलती है। ऐसे में आईपीएस अधिकारी आदित्य की सफलता की कहानी उन छात्रों के लिए प्रेरणादायक है, जो छोटे शहरों या गांवों से पढ़ाई करते हैं और हिंदी माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।
राजस्थान के एक गांव से पढ़ाई शुरू करने वाले आदित्य ने स्कूल और कॉलेज की शिक्षा हिंदी माध्यम से पूरी की। 12वीं कक्षा में उनके 67 प्रतिशत अंक आए। इसके बाद उन्होंने इतिहास, राजनीति विज्ञान और भूगोल विषयों के साथ बीए किया। पढ़ाई के दौरान उन्होंने कई प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में हिस्सा लिया, लेकिन लगातार असफलताएं मिलीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर आईपीएस अधिकारी बने।

चौथे प्रयास में हासिल की 630वीं रैंक
आदित्य ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2017 में अपने चौथे प्रयास में सफलता हासिल की। उन्होंने परीक्षा में 630वीं रैंक प्राप्त की और आईपीएस अधिकारी बने।
इससे पहले उन्हें लगातार कई परीक्षाओं में असफलता का सामना करना पड़ा था। उन्होंने पीसीएस, इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा, बैंकिंग, कर्मचारी चयन आयोग समेत कई भर्ती और प्रवेश परीक्षाएं दीं। दो दर्जन से ज्यादा परीक्षाओं में असफल होने के बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी।

उनकी कहानी बताती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता केवल प्रतिभा पर निर्भर नहीं करती। लगातार प्रयास, गलतियों से सीखना और लक्ष्य के प्रति धैर्य बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
गांव के स्कूल से शुरू हुई पढ़ाई
आदित्य एक सरकारी शिक्षक दंपती के बेटे हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित उनके गांव के स्कूल में हुई। उन्होंने कक्षा आठ तक की पढ़ाई गांव में ही पूरी की। इसके बाद उन्होंने भदरा जिला मुख्यालय के स्कूल से आगे की शिक्षा हासिल की। राजस्थान बोर्ड से उन्होंने 12वीं कक्षा पास की, जिसमें उनके 67 प्रतिशत अंक आए। इसके बाद उन्होंने स्थानीय कॉलेज से इतिहास, राजनीति विज्ञान और भूगोल विषयों के साथ बीए किया। स्कूल से लेकर कॉलेज तक उनकी पढ़ाई हिंदी माध्यम से हुई।
वर्ष 2013 में वह यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली आ गए।

पिता से मिली सिविल सेवा में जाने की प्रेरणा
एक साक्षात्कार में आदित्य ने बताया था कि वह अपने पिता की तरह सिविल सेवा में जाना चाहते थे। बचपन से ही उन्होंने अपने पिता से सुना था कि सिविल सेवक किस तरह आम लोगों के लिए सरकारी योजनाओं को जमीन पर लागू करने में भूमिका निभाते हैं। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा देना शुरू किया। चूंकि यह परीक्षा साल में एक बार होती है, इसलिए उन्होंने विकल्प के तौर पर दूसरी सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षाओं के लिए भी आवेदन किया।
इन परीक्षाओं की तैयारी से उन्हें अलग-अलग विषयों की जानकारी बढ़ाने और परीक्षा का अनुभव हासिल करने में भी मदद मिली।
असफलताओं ने बनाया मजबूत
लगातार मिल रही असफलताओं के बारे में आदित्य ने बताया कि परीक्षा में असफल होने के बाद उन्हें निराशा जरूर होती थी। कई बार मन में यह विचार भी आता था कि तैयारी छोड़ देनी चाहिए। लेकिन उन्होंने सामाजिक दबाव और नकारात्मकता से खुद को दूर रखने का फैसला किया। हर असफलता के बाद उन्होंने अगले प्रयास में बेहतर प्रदर्शन करने का लक्ष्य रखा। उनका मानना था कि लगातार प्रयास करते रहने से एक दिन सफलता जरूर मिलेगी।
पहले प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा भी नहीं हुई पास
यूपीएससी की तैयारी के दौरान आदित्य को कई उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा। अपने पहले प्रयास में वह प्रारंभिक परीक्षा भी पास नहीं कर पाए।
दूसरे प्रयास में उन्होंने बेहतर तैयारी की और साक्षात्कार तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। इसके बाद तीसरे प्रयास में वह मुख्य परीक्षा में ही असफल हो गए।
इन असफलताओं से उन्होंने अपनी तैयारी की कमियां पहचानीं और रणनीति में बदलाव किया। उन्होंने समय प्रबंधन, सामान्य ज्ञान और उत्तर लेखन समेत तैयारी के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया।
रोजाना उत्तर लिखने की आदत पर दिया जोर
आदित्य के अनुसार, मुख्य परीक्षा की तैयारी में उत्तर लेखन का लगातार अभ्यास काफी महत्वपूर्ण है। नियमित रूप से उत्तर लिखने से लिखने की गति बेहतर होती है और सीमित समय में अपने विचारों को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता विकसित होती है।
उन्होंने निबंध लेखन को भी तैयारी का नियमित हिस्सा बनाने की सलाह दी। उनके अनुसार, अभ्यर्थियों को दिन के छोटे-छोटे लक्ष्य तय करने चाहिए और उन्हें पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए। उनका मानना है कि रोजाना सात से आठ घंटे गुणवत्तापूर्ण और एकाग्र होकर पढ़ाई करना पर्याप्त हो सकता है। साथ ही पढ़ाई के बीच छोटे ब्रेक लेना भी जरूरी है, ताकि लंबे समय तक एकाग्रता बनी रहे।
ज्यादा किताबों और स्रोतों के पीछे न भागें
आदित्य की सलाह है कि यूपीएससी की तैयारी के दौरान बहुत ज्यादा किताबें, वेबसाइट और अध्ययन सामग्री इकट्ठा करने के बजाय सीमित स्रोतों से बार-बार पढ़ाई करनी चाहिए,उनके अनुसार, 50 किताबें एक बार पढ़ने से बेहतर है कि एक किताब को 50 बार पढ़ा जाए। यानी अभ्यर्थियों को अपनी अध्ययन सामग्री सीमित रखकर उसी का बार-बार दोहराव करना चाहिए।
प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार के लिए अलग रणनीति
आदित्य के अनुसार, यूपीएससी की तैयारी के तीनों चरणों के लिए अलग रणनीति बनाना जरूरी है।
प्रारंभिक परीक्षा: अधिक से अधिक प्रश्नों का अभ्यास करें और नियमित रूप से अपनी तैयारी का आकलन करें।
मुख्य परीक्षा: समय प्रबंधन और वैकल्पिक विषय पर मजबूत पकड़ बनाएं। उत्तर लेखन का लगातार अभ्यास करें।
साक्षात्कार: केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व और आत्मविश्वास पर भी ध्यान दें। अपने शैक्षणिक और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि से जुड़े सवालों की तैयारी जरूर करें।
आदित्य की कहानी उन लाखों अभ्यर्थियों के लिए सीख है जो लगातार असफलताओं के कारण अपने लक्ष्य को लेकर निराश हो जाते हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि असफलता मंजिल नहीं, बल्कि सही रणनीति और लगातार मेहनत के साथ सफलता की राह का एक पड़ाव हो सकती है।