3 बार UPSC में असफल, चौथे प्रयास में बने IPS, LBSNAA की प्रोफेसर की बेटी संग बनी खूबसूरत लव स्टोरी
Udaipur Times, IPS Shalabh Kumar Sinha love story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में पहुंचने वाले अधिकारियों की कहानियां अक्सर प्रेरणा देती हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ के बस्तर के पुलिस अधीक्षक (SP) शलभ कुमार सिन्हा की कहानी सिर्फ संघर्ष और सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्यार, भरोसा और किस्मत का भी दिलचस्प मेल देखने को मिलता है। तीन बार UPSC में असफल होने के बाद चौथे प्रयास में IPS बनने वाले शलभ कुमार सिन्हा की प्रेम कहानी फेसबुक से शुरू हुई और बाद में शादी तक पहुंची। खास बात यह है कि उनकी पत्नी जान्हवी पांडेय, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) की पूर्व हिंदी प्रोफेसर ज्योति पांडेय की बेटी हैं।

तीन बार असफल हुए, लेकिन हार नहीं मानी
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के रायकेरा गांव में 12 मई 1984 को जन्मे शलभ कुमार सिन्हा ने अपनी स्कूली पढ़ाई कोरबा से पूरी की। इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने BALCO (भारत एल्युमिनियम कंपनी) में नौकरी शुरू की, लेकिन उनका सपना सिविल सेवा में जाने का था। इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी और दिल्ली जाकर UPSC की तैयारी शुरू कर दी।
हालांकि सफलता उन्हें आसानी से नहीं मिली। पहले प्रयास में वह प्रीलिम्स भी पास नहीं कर सके। दूसरे प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंचे लेकिन अंतिम चयन नहीं हुआ। तीसरे प्रयास में फिर प्रीलिम्स में असफल रहे। लगातार तीन असफलताओं के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और चौथे प्रयास में ऑल इंडिया 244वीं रैंक हासिल कर 2014 बैच के IPS अधिकारी बने।

LBSNAA में ट्रेनिंग के दौरान शुरू हुई प्रेम कहानी
IPS बनने के बाद शलभ कुमार सिन्हा मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में ट्रेनिंग के लिए पहुंचे। इसी दौरान एक दिन फेसबुक पर उन्होंने एक कॉमन फ्रेंड की पोस्ट में जान्हवी पांडेय को देखा। उन्हें याद आया कि दिल्ली में UPSC की तैयारी के दौरान उन्होंने इस लड़की को कई बार देखा था। दोनों छत्तीसगढ़ से थे, लेकिन कभी बातचीत नहीं हुई थी।
शलभ ने बिना किसी झिझक के जान्हवी को फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी। कुछ दिनों बाद जान्हवी ने रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। धीरे-धीरे दोस्ती गहरी होती गई और यही दोस्ती प्यार में बदल गई।
2016 में परिवार की सहमति से की शादी
करीब दो साल तक एक-दूसरे को समझने के बाद दोनों ने अपने रिश्ते के बारे में परिवारों को बताया। दोनों परिवार इस रिश्ते के लिए राजी हो गए और साल 2016 में शलभ कुमार सिन्हा और जान्हवी पांडेय विवाह बंधन में बंध गए। आज दोनों की जोड़ी प्रशासनिक जगत की चर्चित जोड़ियों में गिनी जाती है।

जान्हवी का बचपन LBSNAA में बीता
जान्हवी पांडेय की मां ज्योति पांडेय लंबे समय तक LBSNAA में हिंदी की प्रोफेसर रहीं। इसी वजह से जान्हवी का बचपन मसूरी स्थित अकादमी परिसर में बीता। उन्होंने बचपन से हर साल IAS और IPS अधिकारियों को ट्रेनिंग लेते देखा। यहीं से उनके मन में भी खाकी वर्दी पहनने का सपना जन्मा।
उन्होंने भी UPSC की तैयारी की और प्रीलिम्स परीक्षा पास की, लेकिन मेन्स परीक्षा में सफलता नहीं मिली। हालांकि बाद में उनकी शादी एक IPS अधिकारी से हुई और उनका सपना एक अलग रूप में साकार हो गया।
नक्सल क्षेत्र में पोस्टिंग के दौरान निभाया हर मुश्किल में साथ
शादी के कुछ समय बाद ही शलभ कुमार सिन्हा की पोस्टिंग छत्तीसगढ़ के सबसे संवेदनशील नक्सल प्रभावित जिले सुकमा में हो गई। यहां उन्हें कई-कई दिनों तक जंगलों में सुरक्षा बलों के साथ अभियान चलाना पड़ता था।
जान्हवी बताती हैं कि सुकमा जाने से पहले ही उन्हें विश्वास था कि उनके पति एक दिन वहां महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालेंगे। एक बार पालोडी इलाके में नक्सली हमले के बाद कई दिनों तक दोनों का संपर्क नहीं हो पाया था। उस समय परिवार बेहद चिंतित था, लेकिन सुरक्षित लौटने के बाद उनका विश्वास और मजबूत हो गया।
कई जिलों में निभा चुके हैं अहम जिम्मेदारी
2014 बैच के IPS अधिकारी शलभ कुमार सिन्हा छत्तीसगढ़ के कई महत्वपूर्ण जिलों में पुलिस अधीक्षक रह चुके हैं। उन्होंने सुकमा, कवर्धा, दुर्ग, कांकेर जैसे जिलों में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में वह बस्तर (जगदलपुर) के पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यरत हैं और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
संघर्ष, सफलता और प्यार की मिसाल
IPS शलभ कुमार सिन्हा की कहानी यह साबित करती है कि लगातार असफलताओं के बाद भी अगर लक्ष्य के प्रति समर्पण बना रहे तो सफलता जरूर मिलती है। वहीं, उनकी फेसबुक से शुरू हुई प्रेम कहानी यह भी दिखाती है कि कभी-कभी जिंदगी के सबसे खूबसूरत रिश्ते बिल्कुल अप्रत्याशित तरीके से शुरू होते हैं। संघर्ष, मेहनत और भरोसे के दम पर उन्होंने न सिर्फ UPSC का सपना पूरा किया, बल्कि अपने जीवनसाथी का भी साथ पाया।
