कर्मचारी पेंशन योजना के तहत फैमिली पेंशन, विधवा पेंशन, बच्चों के अधिकार और लाइफ सर्टिफिकेट से जुड़े नियमों और अधिकारों की पूरी जानकारी

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कर्मचारी पेंशन योजना के तहत फैमिली पेंशन, विधवा पेंशन, बच्चों के अधिकार और लाइफ सर्टिफिकेट से जुड़े नियमों और अधिकारों की पूरी जानकारी 

Udaipur Times, EPS-95 Pension : 'एम्प्लॉयीज़ पेंशन स्कीम 1995' (EPS-95) के तहत पेंशन पाने वाले लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों के मन में अक्सर कई सवाल होते हैं—जैसे कि पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद परिवार पेंशन किसे मिलेगी, विधवा को कितनी राशि मिलेगी, बच्चों के लिए पेंशन कैसे तय होती है, और डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने के नियम क्या हैं। हर पेंशनभोगी के लिए इन सवालों के जवाब और EPS-95 से जुड़े विभिन्न प्रावधानों को समझना ज़रूरी है।

नॉमिनी को मिलने वाली परिवार पेंशन (पेंशन के लिए पात्र होने से पहले)

अगर किसी सदस्य की मृत्यु के समय परिवार का कोई सदस्य जीवित नहीं है, तो परिवार पेंशन नॉमिनी को दी जाती है। अगर कोई वैध नॉमिनेशन नहीं है, तो यह आश्रित पिता को, और उनके बाद आश्रित माता को दी जाती है। एक बार जब सदस्य को पेंशन मिलना शुरू हो जाती है, तो पहले किया गया कोई भी नॉमिनेशन अमान्य हो जाता है; इसके बाद पेंशनभोगी किसी और व्यक्ति को नॉमिनी नहीं बना सकता।

बेरोज़गारी की अवधि को 'वास्तविक सेवा' (Actual Service) में नहीं गिना जाता

बेरोज़गारी की अवधि को 'वास्तविक सेवा' की गणना में शामिल नहीं किया जाता, क्योंकि पेंशन पूरी तरह से उस अवधि पर आधारित होती है जिसके दौरान सदस्य ने योगदान (contribution) दिया हो।

जीवनसाथी का स्वतः लाभार्थी (Automatic Beneficiary) होना

जीवनसाथी को स्वतः लाभार्थी माना जाता है, बशर्ते सदस्य से उनका कानूनी रूप से तलाक न हुआ हो।

विकलांगता पेंशन (Disability Pension) के लिए पात्रता

अगर कोई EPS-95 सदस्य नौकरी के दौरान स्थायी रूप से और पूरी तरह से विकलांग हो जाता है, तो वह पेंशन पाने का हकदार है—चाहे उसकी उम्र कुछ भी हो या उसने कितने भी समय तक सेवा की हो। इस प्रावधान का लाभ पाने के लिए, सदस्य को 'सेंट्रल बोर्ड' द्वारा निर्धारित मेडिकल जांच करानी होती है। इससे यह तय किया जाता है कि क्या वह व्यक्ति विकलांगता होने के समय अपने पद (job) के लिए स्थायी रूप से और पूरी तरह से अयोग्य हो गया है। पेंशनभोगी की विधवा को मिलने वाली पेंशन, 

गैर-पेंशनभोगी की विधवा को मिलने वाली पेंशन से कम

'एम्प्लॉयीज़ पेंशन स्कीम 1995' के तहत, पेंशन और परिवार पेंशन को 'सामाजिक सुरक्षा लाभ' (social security benefits) माना जाता है जो ज़रूरत के आधार पर दी जाने वाली एक तरह की मदद है। इनका सदस्य द्वारा दिए गए योगदान की राशि से कोई लेना-देना नहीं होता। 58 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद, यह उम्मीद की जाती है कि पेंशनभोगी अपने जीवनसाथी की ज़रूरतों का ध्यान रखेगा। 

पेंशनभोगी की मृत्यु हो जाने पर भी यह जिम्मेदारी बनी रहती है, इसीलिए पेंशन का 50% हिस्सा दिया जाता है। इसके विपरीत, यदि कोई ऐसा सदस्य, जो अभी पेंशनभोगी नहीं बना था, समय से पहले ही गुजर जाता है और अपने पीछे जीवनसाथी और बच्चों को छोड़ जाता है (उदाहरण के लिए, ऐसे बच्चे जिनकी पढ़ाई पूरी नहीं हुई है या जिनकी अभी शादी नहीं हुई है) तो विधवा को मिलने वाली पेंशन की राशि अधिक होती है।

पारिवारिक पेंशन के लिए पेंशनभोगी की विधवा की पात्रता
पेंशनभोगी की विधवा पारिवारिक पेंशन पाने की हकदार होती है, चाहे उनकी शादी पेंशनभोगी के रिटायर होने से पहले हुई हो या बाद में।

विधवा/विधुर के लिए पेंशन का बंद होना

विधवा या विधुर को दी जाने वाली पेंशन उनके निधन के बाद बंद हो जाती है। इसके बाद बच्चों की पेंशन को 'अनाथ पेंशन' (ऑर्फन पेंशन) में बदल दिया जाता है, जो विधवा को मिलने वाली पेंशन का 75% होती है।

जीवन प्रमाण पत्र और पुनर्विवाह न करने का प्रमाण पत्र जमा करना

'कर्मचारी पेंशन योजना, 1995' (Employees' Pension Scheme, 1995) के तहत लाभ पाने वाले सभी पेंशनभोगियों को 'जीवन प्रमाण पत्र और पुनर्विवाह न करने का प्रमाण पत्र' जमा करना होता है। इस प्रमाण पत्र पर बैंक मैनेजर या किसी राजपत्रित अधिकारी (गजटेड ऑफिसर) के हस्ताक्षर/सत्यापन होना चाहिए। इसे उस महीने से 12 महीने के भीतर जमा करना होता है, जिस महीने में पेंशन मंजूर हुई थी, या फिर उस तारीख से 12 महीने के भीतर जब पिछला जीवन प्रमाण पत्र जमा किया गया था। 

यह भौतिक (फिजिकल) प्रमाण पत्र उसी बैंक में जमा करना होता है, जिसके जरिए पेंशन का भुगतान किया जाता है। यदि एक साल की समय-सीमा के भीतर जीवन प्रमाण पत्र जमा नहीं किया जाता है, तो पेंशन रोक दी जाएगी। भौतिक जीवन प्रमाण पत्र के विकल्प के रूप में 'डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र' (DLC) की शुरुआत की गई है, जो वित्तीय वर्ष 2015-16 से लागू है। 

पेंशनभोगी अब अपना DLC जमा करने के लिए अपने आधार नंबर का उपयोग कर सकते हैं। यह सुविधा कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSCs), पेंशन देने वाले बैंकों की शाखाओं, डाकघरों (इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक - IPPB के माध्यम से) और प्रोविडेंट फंड (PF) कार्यालयों में उपलब्ध है।

अनाथ बच्चे दो अलग-अलग पेंशन पाने के हकदार 

पेंशन योजना के तहत मिलने वाले लाभ, EPS, 1995 के सदस्य द्वारा किए गए योगदान का सीधा परिणाम होते हैं। इसलिए, यदि माता-पिता दोनों ही इस योजना के सदस्य थे और उन्होंने अलग-अलग योगदान दिया था, तो उनके अनाथ बच्चे दो अलग-अलग पेंशन पाने के हकदार होंगे। हालाँकि, कर्मचारी पेंशन योजना (Employees' Pension Scheme) के तहत तय की गई मानक सीमाएँ लागू रहेंगी।

58 वर्ष की आयु के बाद पेंशन को टालने का विकल्प

सदस्यों के पास अपनी पेंशन को 58 वर्ष की आयु के बाद टालने का विकल्प होता है। कोई सदस्य 59 या 60 वर्ष की आयु से पेंशन लेना शुरू करने का विकल्प चुन सकता है; हालाँकि, चूँकि 58 वर्ष की आयु के बाद पेंशन में योगदान देना बंद हो जाता है, इसलिए इसका असर पेंशन की राशि पर पड़ेगा।

EPS-95 पेंशन योजना को कर्मचारियों और उन पर निर्भर लोगों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया है। इसमें पारिवारिक पेंशन, नॉमिनेशन (नामांकन) के नियम, विकलांगता पेंशन और 'लाइफ सर्टिफिकेट' (जीवन प्रमाण पत्र) जमा करने की प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इन नियमों की अच्छी जानकारी होने से पेंशनभोगियों और उनके परिवारों को भविष्य में किसी भी तरह की प्रशासनिक या वित्तीय कठिनाइयों से बचने में मदद मिलती है।

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