किसान साथी धान काटते समय ना करें ये जल्दबाजी, जाने फसल कटाई के समय किन बातों का रखें ध्यान ?
Udaipur Times, New Delhi, Kisaan News : धान की फसल अब पकने की अवस्था में पहुंच रही है और कई इलाकों में कटाई का समय भी नजदीक आ गया है। ऐसे में किसानों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि धान की कटाई आखिर किस समय और किस अवस्था में करनी चाहिए। कटाई में थोड़ी सी जल्दबाजी या ज्यादा देरी फसल की गुणवत्ता और उपज दोनों को प्रभावित कर सकती है।
बहुत जल्दी कटाई करने पर कई दाने अधपके रह जाते हैं, जबकि अधिक देर करने पर पकी हुई बालियों से दाने झड़ने, पक्षियों से नुकसान होने और मौसम खराब होने की स्थिति में फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कटाई से पहले खेत की स्थिति, बालियों का रंग, दानों की कठोरता, नमी और आने वाले मौसम का ध्यान रखना चाहिए। कटाई से करीब 10 से 15 दिन पहले सिंचाई बंद कर देनी चाहिए और अगर खेत में पानी जमा है तो उसकी निकासी कर देनी चाहिए। इससे खेत की अतिरिक्त नमी कम होती है और मजदूरों या मशीन से कटाई करने में आसानी रहती है।
80 से 90 प्रतिशत बालियां सुनहरी होना है फसल के तैयार होने का संकेत
धान की फसल की कटाई का सही समय पहचानने के लिए किसान सबसे पहले खेत में बालियों की अवस्था देखें। जब करीब 80 से 90 प्रतिशत बालियां सुनहरे या पीले रंग की हो जाएं और दाने अच्छी तरह पककर सख्त हो जाएं, तब फसल कटाई के लिए तैयार मानी जाती है। दानों में पकने के साथ बालियों का वजन बढ़ जाता है और वे नीचे की ओर झुकने लगती हैं। यह भी फसल के तैयार होने का एक संकेत है।
अगर किसान इससे पहले ही फसल काट लेते हैं तो कई दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते। इससे दानों की गुणवत्ता के साथ उपज पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, फसल को जरूरत से ज्यादा खेत में खड़ा रखने पर बालियों से दाने झड़ने लग सकते हैं और पक्षियों के अलावा तेज हवा या बारिश से भी नुकसान हो सकता है। इसलिए केवल कैलेंडर देखकर नहीं, बल्कि फसल की वास्तविक अवस्था देखकर कटाई का निर्णय लेना बेहतर है।
कटाई के समय दानों में कितनी नमी होनी चाहिए?
धान की कटाई के समय दानों में करीब 20 से 25 प्रतिशत नमी होना उपयुक्त माना जाता है। इस अवस्था में कटाई और मड़ाई करने पर दानों के टूटने और खेत में झड़ने से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। किसान संभव हो तो नमी मापक यंत्र से दानों की नमी की जांच कर सकते हैं।
कटाई के बाद धान को लंबे समय तक खेत में ढेर लगाकर नहीं रखना चाहिए। कटाई और मड़ाई के बाद दानों की सफाई कर उन्हें अच्छी तरह सुखाना जरूरी है। भंडारण से पहले धान की नमी को सुरक्षित स्तर तक कम कर लेना चाहिए, ताकि लंबे समय तक रखने के दौरान फसल में फफूंद और खराबी की समस्या न हो।
कटाई से 10 से 15 दिन पहले बंद कर दें सिंचाई
धान की फसल पकने की अवस्था में पहुंचने के बाद कटाई से करीब 10 से 15 दिन पहले सिंचाई बंद कर देना चाहिए। इससे खेत में मौजूद अतिरिक्त पानी धीरे-धीरे कम होने लगता है और मिट्टी कुछ हद तक सूख जाती है। सूखे या कम नमी वाले खेत में कंबाइन हार्वेस्टर या अन्य मशीनों से कटाई करने में आसानी होती है।
अगर खेत में पानी जमा है तो केवल सिंचाई बंद करना पर्याप्त नहीं है। ऐसी स्थिति में खेत से अतिरिक्त पानी की निकासी भी सुनिश्चित करनी चाहिए। गीले खेत में मशीन चलाने पर उसके पहिए मिट्टी में धंस सकते हैं, जिससे कटाई में अधिक समय और ईंधन लग सकता है। मजदूरों के लिए भी ऐसे खेत में कटाई करना मुश्किल होता है।
कटाई से पहले खेत का अच्छी तरह करें निरीक्षण
कटाई शुरू करने से पहले किसान को पूरे खेत का निरीक्षण कर लेना चाहिए। खेत में मौजूद खरपतवार, कमजोर पौधों और रोगग्रस्त बालियों की पहचान करें और उन्हें सामान्य फसल से अलग करें। जिन बालियों में फफूंद, काले धब्बे या सड़न जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उन्हें स्वस्थ धान के साथ नहीं मिलाना चाहिए।
रोगग्रस्त पौधों और अवशेषों को खेत में ही छोड़ने से भी बचना चाहिए। इनमें मौजूद रोगजनक अगली फसल को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए कटाई से पहले खेत की सफाई और फसल की स्थिति की जांच करने से उपज की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
बारिश का पूर्वानुमान देखकर ही बनाएं कटाई का प्लान
धान की कटाई के दौरान मौसम का साफ होना भी बेहद जरूरी है। अगर कटाई के समय बारिश हो जाती है तो दानों में नमी बढ़ सकती है। इससे फफूंद लगने, दानों की गुणवत्ता खराब होने और लंबे समय तक भंडारण में परेशानी आने का खतरा बढ़ जाता है।
इसलिए किसान कटाई शुरू करने से पहले मौसम का पूर्वानुमान जरूर देख लें। कोशिश करें कि कटाई के बाद धान को सुखाने के लिए पर्याप्त धूप और खुली जगह उपलब्ध हो। अगर फसल पूरी तरह तैयार है लेकिन बारिश की संभावना बनी हुई है, तो कटाई और मड़ाई के बाद उपज को खुले में छोड़ने के बजाय सुरक्षित और सूखे स्थान पर रखना बेहतर रहेगा।
गीले खेत में मशीन चलाने से बढ़ सकती है किसान की परेशानी
कटाई से पहले खेत की मिट्टी की स्थिति जांचना भी जरूरी है। बहुत अधिक गीले खेत में कंबाइन मशीन चलाने पर मशीन के पहिए धंस सकते हैं। इससे न सिर्फ कटाई की रफ्तार कम हो सकती है, बल्कि ईंधन की खपत और परिचालन लागत भी बढ़ सकती है।
वहीं, अगर मजदूरों से हंसिए के जरिए कटाई कराई जा रही है तो भी बहुत गीली जमीन परेशानी पैदा कर सकती है। इसलिए खेत में अतिरिक्त पानी निकालने के बाद मिट्टी को कुछ हद तक सूखने देना चाहिए। इससे कटाई का काम अधिक आसानी से और कम नुकसान के साथ किया जा सकता है।
ज्यादा देर तक खेत में खड़ी न रहने दें पकी फसल
धान की फसल जब करीब 90 प्रतिशत बालियों के सुनहरी या पीली होने और अधिकांश दानों के सख्त होने की अवस्था में पहुंच जाए, तो कटाई में अनावश्यक देरी नहीं करनी चाहिए। पकी हुई फसल को लंबे समय तक खेत में छोड़ने पर दाने झड़ने लग सकते हैं। इसके अलावा तेज हवा, बारिश और पक्षियों से भी नुकसान हो सकता है।
वहीं, बहुत जल्दी कटाई करने से अधपके दानों की संख्या बढ़ सकती है। इसलिए किसानों को बालियों के रंग, दानों की कठोरता और खेत की स्थिति देखकर सही समय पर कटाई शुरू करनी चाहिए। इसके साथ ही कटाई के बाद धान को जल्द से जल्द सुखाकर उचित नमी स्तर पर लाना भी उतना ही जरूरी है।
समय रहते कटाई करना हो सकता है लाभदायक
धान की बेहतर गुणवत्ता और उपज के लिए कटाई का सही समय सबसे महत्वपूर्ण है। किसान बालियों के 80 से 90 प्रतिशत तक सुनहरे होने, दानों के सख्त होने, उचित नमी और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर कटाई की योजना बनाएं। साथ ही कटाई से पहले सिंचाई बंद करने, खेत से अतिरिक्त पानी निकालने और रोगग्रस्त बालियों को अलग करने जैसे जरूरी कदम उठाएं।
इन सावधानियों को अपनाने से कटाई के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने और धान की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। कटाई के बाद भी फसल को सही तरीके से सुखाना और सुरक्षित स्थान पर भंडारण करना उतना ही जरूरी है, ताकि किसान को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।