किसान ने 13 बीघा में लगाया 2.4 मेगावाट का सोलर प्लांट, बंजर खेत से हर महीने होगी लाखों में कमाई
Udaipur Times, Solar Plant : कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो आपदा को भी अवसर में बदला जा सकता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है जिले के मांटूंदा रोड बहादुरपुरा गांव में जागरूक किसान महावीर जैन ने। जिस जमीन पर कभी मौसम की मार और कम उपजाऊ क्षमता के कारण लागत तक नहीं निकल पाती थी, आज वही जमीन सौर ऊर्जा के जरिए हर महीने लाखों की कमाई का जरिया बनने जा रही है। अपनी 13 बीघा जमीन पर 2.4 मेगावाट का विशाल सोलर प्लांट स्थापित किया है।
इस पूरे प्रोजेक्ट को खड़ा करने में करीब 7 करोड़ 50 लाख रुपए का खर्च आया है, लेकिन इसके बदले मिलने वाला रिटर्न बेहद शानदार है। प्लांट में रोजाना कम से कम 9600 यूनिट बिजली उत्पादन होगा। सरकारी खरीद दर के हिसाब से 2.95 रुपए प्रति यूनिट तय है। इस हिसाब से 1 दिन की करीब 28000 रुपए और एक महीने की बात करें तो 8 लाख 40 हजार रुपए का बिजली उत्पादन होगा। विद्युत विभाग के साथ हुए अनुबंध के तहत सरकार अगले 25 सालों तक इस प्लांट से बिजली खरीदेगी।
सरकारी योजना से किसान ने शुरू किया काम
किसान महावीर जैन ने बताया कि जिले के गुड़ानाथवतान, नमाना, रानीपुर, गुढ़ादेवजी, लाखेरी और बसोली सहित कई इलाकों के जागरूक किसान प्रधानमंत्री कुसुम योजना से जुड़ रहे हैं। यह कदम न सिर्फ किसानों को समृद्ध बना रहा है, बल्कि क्षेत्र में ग्रीन एनर्जी को भी बढ़ावा दे रहा है। जैन ने बताया कि उनके खेत में फसल काफी कम होती थी।
लगातार होते नुकसान के बीच करीब 6 महीने पहले उन्हें प्रधानमंत्री कुसुम योजना की जानकारी मिली। इस योजना के तहत किसान अपनी जमीन पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली सीधे विभाग को बेच सकते हैं और आत्मनिर्भर बन सकते हैं। इसके बाद जयपुर जाकर कागजी प्रक्रिया पूरी की और खेत पर काम शुरू करवाया। वर्तमान में प्लांट का काम अंतिम चरण में है। इस माह बिजली का उत्पादन शुरू हो जाएगा।
कैसे बनती है खेत में बिजली, समझिए पूरी प्रक्रिया
सबसे पहले जमीन पर मजबूत पीलिंग (नींव) की जाती है। इसके ऊपर जीआई का स्ट्रक्चर खड़ा किया जाता है। इस स्ट्रक्चर पर धूप सोखने के लिए सौर ऊर्जा की प्लेटें लगाई जाती हैं। वर्तमान में खेत में 6x4 फीट की करीब 4000 सोलर प्लेट्स लगाई जा चुकी है। इसमें एक प्लेट 600 वाट की है।
प्लेटों को बिजली उत्पादन के लिए तारों की नेटवर्किंग से जोड़ा गया है। स्टोरेज और सप्लाई के लिए पौने 300 किलोवाट क्षमता के 7 इनवर्टर लगाए जा रहे हैं। इनवर्टर से बिजली ट्रांसफार्मर में जाएगी और वहां से सीधे जीएसएस पर सिटी-पीटी के जरिए पहुंचेगी।
