किसान के 4 बेटे-बेटियों ने रचा इतिहास, किसी ने हरियाणा तो किसी ने दिल्ली पुलिस में पाई नौकरी

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किसान के 4 बेटे-बेटियों ने रचा इतिहास, किसी ने हरियाणा तो किसी ने दिल्ली पुलिस में पाई नौकरी 

Udaipur Times, Siblings Police Constable Success Story : हरियाणा के भिवानी जिले के तौशाम तहसील स्थित सण्डवा गांव के एक किसान परिवार ने ऐसी मिसाल पेश की है, जो हर युवा के लिए प्रेरणा बन गई है। किसान अत्तर सिंह के चार बेटे-बेटियों ने खाकी वर्दी पहनने का सपना पूरा कर लिया है। इनमें तीन भाई-बहन हरियाणा( Haryana), दिल्ली (Delhi) और चंडीगढ़ Chandigarh) पुलिस में कांस्टेबल (Police Constable) हैं, जबकि एक रेलवे सुरक्षा बल (RPF) में तैनात है।

इनके माता-पिता भले ही ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन उन्होंने बच्चों की शिक्षा (Education) में कभी कोई कमी नहीं आने दी। आज उनकी मेहनत और बच्चों की लगन ने पूरे परिवार को गर्व का अवसर दिया है।

गांव के स्कूल से शुरू हुई सफलता की कहानी

चारों भाई-बहनों की शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से हुई। इसके बाद कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी। नियमित पढ़ाई, अनुशासन और सही रणनीति के दम पर सभी ने सरकारी नौकरी हासिल की। उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि कामयाबी के लिए बड़े शहरों में पढ़ाई करना जरूरी नहीं, बल्कि मेहनत और निरंतर प्रयास सबसे अहम हैं।

पहली बार एक साथ वर्दी में पहुंचे चारों भाई-बहन (Siblings Police Constable)

परिवार के पांचवें भाई श्याम सुंदर राजस्थान के सीकर में गणित के शिक्षक हैं। उन्होंने बताया कि मार्च 2026 में घर पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में चारों भाई-बहन पहली बार एक साथ खाकी वर्दी पहनकर पहुंचे। यह पल पूरे परिवार और गांव के लिए बेहद खास और यादगार बन गया।

कौन कहां है तैनात?

सुदेश (Sudesh) परिवार की सबसे बड़ी बेटी हैं। उन्होंने वर्ष 2010 में चंडीगढ़ पुलिस में कांस्टेबल बनकर परिवार की पहली सरकारी नौकरी हासिल की। उनके पति भारतीय सेना में कार्यरत हैं।

उर्मिला (Urmila) ने कोविड (COVID) काल के दौरान रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की भर्ती परीक्षा पास की। वह वर्तमान में अंबाला में तैनात हैं। उनके पति चंडीगढ़ पुलिस में कार्यरत हैं।

मोनिका (Monica) ने दिल्ली पुलिस कांस्टेबल (Delhi Police Constable) भर्ती परीक्षा 2024 पास कर खाकी वर्दी हासिल की।

अंकित (Ankit), परिवार के सबसे छोटे सदस्य, पहले प्रयास में सफल नहीं हुए, लेकिन हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में उनका चयन हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल (Haryana Police Constable) के पद पर हुआ। फिलहाल उनकी तैनाती रोहतक में है।

माता-पिता की सीख बनी सफलता की कुंजी

अंकित के अनुसार, उनकी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय पिता अत्तर सिंह और मां राजवंती देवी को जाता है। पिता 12वीं तक पढ़े हैं, जबकि मां पढ़ी-लिखी नहीं हैं। इसके बावजूद दोनों हमेशा बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देते रहे और उन्हें मेहनत करने के लिए प्रेरित करते रहे। परिवार का यही अनुशासन और शिक्षा के प्रति समर्पण आज उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया है।

सफलता का मूलमंत्र

चारों भाई-बहनों ने एक ही रणनीति अपनाई कॉलेज की पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, नियमित अभ्यास और कभी हार न मानने का जज्बा। इसी मेहनत और लगन ने उन्हें सरकारी नौकरी तक पहुंचाया और आज उनका परिवार पूरे हरियाणा के लिए प्रेरणा बन गया।

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