किसान की बेटी ने रचा इतिहास, स्कॉलरशिप के दम पर NEET में हासिल की शानदार रैंक
Udaipur Times, Success Story Mudita Lamoria : राजस्थान के झुंझुनूं की रहने वाली मुदिता लमोरिया (Mudita Lamoria) ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो आर्थिक चुनौतियां भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं। किसान परिवार से आने वाली मुदिता ने NEET 2026 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 2249 और कैटेगरी रैंक 802 हासिल कर डॉक्टर बनने का अपना सपना साकार करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
इस रैंक के आधार पर उन्हें AIIMS जोधपुर या सवाई मानसिंह (SMS) मेडिकल कॉलेज, जयपुर में MBBS सीट मिलने की संभावना है। यदि AIIMS जोधपुर में प्रवेश नहीं मिलता है तो उनकी पहली पसंद दिल्ली का मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC) होगी।
10वीं के बाद तय कर लिया था डॉक्टर बनने का लक्ष्य
मुदिता ने 10वीं कक्षा के बाद ही डॉक्टर बनने का सपना देख लिया था। उनका उद्देश्य केवल एक अच्छी नौकरी पाना नहीं, बल्कि लोगों की सेवा करना था। हालांकि इस सपने तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी कई बार उनके सामने बड़ी चुनौती बनकर आई।
किसान पिता ने हर मुश्किल में दिया साथ
मुदिता के पिता मान सिंह पेशे से किसान हैं, जबकि उनकी मां प्रमिला देवी गृहिणी हैं। पिता अधिक पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा बेटी की पढ़ाई को प्राथमिकता दी और हर कदम पर उसका हौसला बढ़ाया। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी मुदिता आज अपने दोनों छोटे भाइयों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
1.80 लाख रुपये की कोचिंग फीस बनी सबसे बड़ी चुनौती
NEET की तैयारी के लिए मुदिता को झुंझुनूं से सीकर जाना पड़ा। वहां कोचिंग की फीस करीब 1 लाख 80 हजार रुपये थी, जिसे जुटाना परिवार के लिए आसान नहीं था। हालांकि प्रवेश परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने पर उन्हें स्कॉलरशिप मिली, जिससे फीस का बोझ काफी कम हो गया।
अंग्रेजी और प्रतियोगिता से घबराईं, लेकिन हार नहीं मानी
पहली बार घर से बाहर निकलकर पढ़ाई करना और हजारों छात्रों के बीच प्रतियोगिता का सामना करना मुदिता के लिए आसान नहीं था। हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने के कारण उन्हें अंग्रेजी भाषा में भी कठिनाई हुई। शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद वह इस प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाएंगी, लेकिन उन्होंने निरंतर मेहनत जारी रखी।
पहले प्रयास में असफलता, दूसरे में मिली सफलता
पहले प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार पढ़ाई, नियमित टेस्ट और बेहतर प्रदर्शन से उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया। आखिरकार दूसरे प्रयास में उन्होंने शानदार रैंक हासिल कर NEET परीक्षा पास कर ली।
परिवार और शिक्षकों को दिया सफलता का श्रेय
मुदिता ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और पूरे परिवार को दिया। उन्होंने बताया कि उनके बुआ के बेटे, जो स्वयं इंजीनियर हैं, ने तैयारी के दौरान लगातार उनका मार्गदर्शन किया और मुश्किल समय में उनका आत्मविश्वास बनाए रखा।
मुदिता की सफलता यह संदेश देती है कि सीमित संसाधन और आर्थिक कठिनाइयां मेहनत, आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन के सामने बड़ी बाधा नहीं बन सकतीं।
