किसान की बेटी ने IAS बनकर रचा इतिहास, लगातार 3 असफलताओं के बाद चौथे प्रयास में बनी अफसर
Udaipur Times, IAS Simrandeep Kaur : अपने लक्ष्य को पाने का रास्ता कभी आसान नहीं होता; इसके लिए अक्सर रास्ता बदलना पड़ता है और मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। नाभा तहसील के बिरारवाल गांव की रहने वाली सिमरनदीप कौर की कहानी इसका सबूत है। एक किसान परिवार से आने वाली सिमरनदीप ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में तीन बार असफल होने के बाद भी हार नहीं मानी। आखिरकार, चौथे प्रयास में 15वीं रैंक हासिल करके उन्होंने अपना सपना पूरा किया।
कौन हैं UPSC टॉपर सिमरनदीप कौर?
सिमरनदीप कौर पटियाला की नाभा तहसील के बिरारवाल गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने 15वीं ऑल-इंडिया रैंक के साथ यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की परीक्षा पास की। एक साधारण किसान परिवार में जन्मीं सिमरनदीप शुरुआती तीन असफलताओं के बावजूद डटी रहीं और चौथे प्रयास में देश के टॉप अचीवर्स में शामिल हो गईं।
सिमरनदीप कौर ने कहां से की अपनी पढ़ाई?
सिमरनदीप कौर ने पंजाब के दयानंद पब्लिक स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने पटियाला के खालसा कॉलेज से ह्यूमैनिटीज में ग्रेजुएशन किया। फिर उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में मास्टर डिग्री पूरी की और UGC-NET परीक्षा पास की।
12वीं क्लास में IAS ऑफिसर बनने का सपना देखा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब वह 12वीं क्लास में थीं, तो एक PCS ऑफिसर उनके स्कूल में मुख्य अतिथि के तौर पर आए थे। वह उस ऑफिसर की पर्सनैलिटी और समाज की सेवा करने के उनके नज़रिए से बहुत प्रभावित हुईं। तभी से उन्होंने IAS ऑफिसर बनने का सपना देखना शुरू कर दिया।
लागातर तीन असफलताओं के बावजूद उम्मीद नहीं छोड़ी
सिमरनदीप कौर ने चौथे प्रयास में UPSC परीक्षा पास की। अपने पिछले तीन प्रयासों में, वह प्रीलिम्स स्टेज तो पास कर लेती थीं, लेकिन मेन्स में सफल नहीं हो पाती थीं। हालाँकि, बाद में उन्होंने अपनी तैयारी की रणनीति में बदलाव किए, खासकर अपने उत्तर-लेखन (आंसर-राइटिंग) के तरीके में।
घर से ही UPSC की तैयारी की
सिमरनदीप ने घर पर रहकर ही परीक्षा की तैयारी की। उन्होंने बिना किसी कोचिंग के इस मुश्किल परीक्षा की तैयारी की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह रोज़ाना औसतन 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थीं। हालाँकि, सिमरनदीप की तैयारी में रिवीज़न ने अहम भूमिका निभाई; बहुत सारी किताबें या स्टडी मटीरियल इकट्ठा करने के बजाय, उन्होंने पहले से मौजूद कंटेंट को बार-बार पढ़ने पर ध्यान दिया।