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उदयपुर में यूरिया संकट पर किसानों का अनोखा विरोध

खाद की कमी और कालाबाजारी से परेशान किसानों ने कृषि विभाग कार्यालय के बाहर प्रतीकात्मक श्रद्धांजलि देकर सरकार का ध्यान खींचा

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उदयपुर 5 जनवरी 2026 - उदयपुर में यूरिया खाद की किल्लत को लेकर किसानों ने सोमवार को अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। मेवाड़ किसान संघर्ष समिति के बैनर तले कृषि विभाग कार्यालय के बाहर किसानों ने खाद के बैग की प्रतीकात्मक तस्वीर को कुर्सी पर रखकर उस पर फूल-मालाएं चढ़ाईं, गुलाब जामुन खिलाकर मुंह मीठा कराया और पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

किसानों ने इसे खाद की ‘मौत’ बताते हुए सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। मेवाड़ किसान संघर्ष समिति के संयोजक विष्णु पटेल ने बताया कि किसानों की खाद की जरूरत के समय कालाबाजारी चरम पर है। सरकार द्वारा तय 277 रुपये प्रति बैग के बजाय 450 से 500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। यह सब अधिकारियों की शह पर हो रहा है, जिन्हें केवल कमीशन की चिंता है।

पटेल ने कहा कि लाइसेंस प्राप्त गोदामों में जहां 150 बैग पहुंचने चाहिए, वहां केवल 100 बैग ही दिए जा रहे हैं और शेष खाद अन्य जगहों पर भेजकर कालाबाजारी की जा रही है। स्थिति यह है कि कोई किसान सिर्फ 2 बैग ले पा रहा है, जबकि उसके नाम पर 10 बैग चढ़ा दिए जाते हैं। किसानों के मोबाइल पर मैसेज तक नहीं आ रहे हैं। समिति के सह-संयोजक मदनलाल डांगी ने कहा कि अधिकारियों की शह पर खाद की कालाबाजारी हो रही है। अफसरों तक कमीशन पहुंच रहा है और किसान खून के आंसू पीने को मजबूर हैं।

सरकार के पास कृषि भूमि, फसलों और संभावित उत्पादन की पूरी जानकारी होने के बावजूद हर साल खरीफ और रबी के मौसम में ऐसी समस्या क्यों आती है, यह बड़ा सवाल है। किसानों ने मांग की कि खाद वितरण भी राशन वितरण प्रणाली की तर्ज पर किया जाए। इसके लिए समिति बनाकर पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए, पॉश मशीन से हर खरीद की स्लिप दी जाए और किसानों को उनकी कृषि भूमि के आधार पर ही खाद उपलब्ध करवाई जाए।

प्रदर्शन के बाद समिति ने कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक सुधीर वर्मा को ज्ञापन सौंपा। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि इससे पहले भी करीब 20 दिन पूर्व जिला कलेक्टर और एसडीएम को ज्ञापन दिया जा चुका है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। उदयपुर में पिछले 40-45 दिनों से यूरिया खाद की भारी किल्लत बनी हुई है। लंबी-लंबी लाइनों में लगने के बावजूद किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। लाइसेंस प्राप्त दुकानों पर मांग के मुकाबले केवल 50 फीसदी खाद ही उपलब्ध हो पा रही है।

किसान 4 बैग मांगते हैं लेकिन उन्हें 2 बैग ही दिए जा रहे हैं। उदयपुर जिले में 3 से 4 लाख से अधिक किसान इस समस्या से प्रभावित हैं। हाल ही में उदयपुर कृषि मंडी में लॉटरी के जरिए खाद वितरण की नौबत तक आ गई थी। उदयपुर जिले के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 4 लाख 55 हजार 693 हेक्टेयर क्षेत्र खेती योग्य है, जो जिले के कुल क्षेत्रफल का करीब 31.41 प्रतिशत है। इसमें अधिकांश भूमि असिंचित है।

जिले में मक्का, ज्वार, गेहूं, जौ, दालें और तिलहन प्रमुख फसलें हैं। गांवों में मक्का, सोयाबीन और उड़द की खेती बड़े पैमाने पर होती है। हर साल करीब 1.40 लाख हेक्टेयर भूमि पर मक्का बोया जाता है।

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