बिजली टावर के लिए जमीन देने वाले किसानों को मिलेगा अब दोगुना पैसा ! सरकार ने बदले मुआवजे के नियम

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बिजली टावर के लिए जमीन देने वाले किसानों को मिलेगा अब दोगुना पैसा ! सरकार ने बदले मुआवजे के नियम 

Udaipur Times, Tower Installation in Gujarat : गुजरात सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए उनकी जमीन पर बिजली के ट्रांसमिशन टावर और हाईटेंशन लाइनें लगाने के बदले मिलने वाले मुआवजे की नीति (Compensation Policy) में बड़ा बदलाव किया है। अब किसानों को मुआवजा जमीन की जनत्री (Jantri) दर के बजाय मौजूदा बाजार मूल्य (Market Value) के दोगुने के आधार पर दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस फैसले से किसानों को पहले की तुलना में अधिक और न्यायसंगत मुआवजा मिलेगा।

किसानों की लंबे समय से थी मांग (Demand) 

राज्य के कई हिस्सों में किसान लंबे समय से अपनी कृषि भूमि पर ट्रांसमिशन लाइन और बिजली टावर लगाने के बदले मिलने वाले मुआवजे को बढ़ाने (Compensation Policy) की मांग कर रहे थे। किसानों का कहना था कि जनत्री दर बाजार कीमत से काफी कम होती है, जिससे उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिल पाता था। सरकार ने इसी मांग को ध्यान में रखते हुए नई नीति लागू करने का फैसला किया है।

अब दोगुनी बाजार कीमत पर मिलेगा मुआवजा

सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, पहले बिजली के खंभों और ट्रांसमिशन लाइनों के लिए मुआवजा जनत्री दर के 200 प्रतिशत के आधार पर दिया जाता था। अब इसकी गणना जमीन की मौजूदा बाजार कीमत के दोगुने के आधार पर की जाएगी। इससे किसानों को पहले के मुकाबले कहीं अधिक राशि मिलेगी।

टावर के आसपास की अतिरिक्त जमीन का भी मिलेगा भुगतान

नई नीति के तहत ट्रांसमिशन टावर के लिए मुआवजे के दायरे का भी विस्तार किया गया है। पहले केवल टावर के वास्तविक आधार क्षेत्र (Base Area) का ही मुआवजा मिलता था, लेकिन अब टावर के चारों ओर एक मीटर अतिरिक्त क्षेत्र को भी मुआवजे में शामिल किया जाएगा। इससे प्रभावित भूमि का क्षेत्र बढ़ेगा और किसानों को अधिक भुगतान मिलेगा।

किस्तों की व्यवस्था खत्म, काम शुरू होने से पहले मिलेगा पूरा पैसा

सरकार ने मुआवजे के भुगतान की पुरानी किस्त व्यवस्था भी समाप्त कर दी है। पहले किसानों को 40 प्रतिशत राशि नींव का काम शुरू होने पर, 40 प्रतिशत टावर खड़ा होने पर और शेष 20 प्रतिशत ट्रांसमिशन लाइन बिछने के बाद मिलती थी।

नई व्यवस्था के तहत अब 100 प्रतिशत मुआवजा एकमुश्त (Lump Sum) और काम शुरू होने से पहले ही किसानों को दे दिया जाएगा। इससे किसानों को लंबे समय तक भुगतान का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

बाजार मूल्य तय करने के लिए बनेगी समिति

सरकार ने कहा है कि जमीन का पारदर्शी और निष्पक्ष बाजार मूल्य तय करने के लिए एक विशेष समिति बनाई जाएगी। इस समिति में संबंधित जिला कलेक्टर, प्रभावित किसानों के प्रतिनिधि, किसानों द्वारा नामित अधिकृत वैल्यूअर और ट्रांसमिशन सेवा प्रदाता के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति बाजार मूल्य तय कर मुआवजे की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगी।

सरकार का मानना है कि नई नीति से किसानों को आर्थिक राहत मिलेगी, भूमि अधिग्रहण और ट्रांसमिशन परियोजनाओं से जुड़े विवाद कम होंगे तथा बिजली अवसंरचना परियोजनाओं को भी गति मिलेगी।

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