किसानों की हुई बल्ले-बल्ले, जमीन देने वालों को मिलेगा अब 6415 रुपये प्रति वर्गमीटर मुआवजा, देखें पूरा प्लान ?

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किसानों की हुई बल्ले-बल्ले, जमीन देने वालों को मिलेगा अब 6415 रुपये प्रति वर्गमीटर मुआवजा, देखें पूरा प्लान ?

Udaipur Times, Greater Noida Authority News : ग्रेटर नोएडा में जमीन देने वाले किसानों के लिए बड़ी खबर है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने किसानों से जमीन खरीदने के लिए नई मुआवजा दर तय कर दी है। शासन के निर्देश और बोर्ड की मंजूरी के बाद जमीन की दर 4,125 रुपये से बढ़ाकर 6,415 रुपये प्रति वर्गमीटर कर दी गई है। नई दर लागू होने के बाद प्राधिकरण अब उन गांवों में जमीन खरीदने पर ज्यादा जोर देगा, जहां किसी परियोजना के लिए जमीन की जरूरत है या जमीन उपलब्ध नहीं होने की वजह से काम अटका हुआ है।

प्राधिकरण ने जमीन खरीद की प्रक्रिया को तेज करने के लिए सर्वेक्षण शुरू कर दिया है और अधिकारियों की जिम्मेदारियां भी तय की गई हैं। माना जा रहा है कि नई मुआवजा दर से उन किसानों को राहत मिलेगी, जो लंबे समय से जमीन की कीमत बढ़ने का इंतजार कर रहे थे। साथ ही औद्योगिक और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए जरूरी जमीन उपलब्ध होने से कई अटके हुए काम भी आगे बढ़ सकेंगे।

4,125 से बढ़कर 6,415 रुपये प्रति वर्गमीटर हुई दर तय

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण अब किसानों से 6,415 रुपये प्रति वर्गमीटर की नई दर पर सहमति के आधार पर जमीन खरीदने की तैयारी कर रहा है। पहले यह दर 4,125 रुपये प्रति वर्गमीटर थी। नई दर लागू होने के बाद प्राधिकरण को उम्मीद है कि जमीन मालिकों के साथ सहमति बनाने और जमीन खरीदने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। खास बात यह है कि प्राधिकरण सबसे पहले उन्हीं गांवों में जमीन खरीदने पर फोकस करेगा, जहां पहले से कोई विकास या औद्योगिक परियोजना प्रस्तावित है। जिन परियोजनाओं के लिए जमीन की कमी के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है, उनके लिए भी जमीन उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी।

पहली बार बनाया गया जमीन अधिग्रहण सेल

जमीन खरीद की प्रक्रिया को आसान और व्यवस्थित बनाने के लिए प्राधिकरण ने एक अहम कदम उठाया है। पहली बार एसीईओ की अध्यक्षता में जमीन अधिग्रहण सेल का गठन किया गया है। इसमें ओएसडी स्तर के अधिकारियों को शामिल किया गया है।यह सेल किसानों और जमीन मालिकों के साथ समन्वय करने के साथ जमीन खरीद से जुड़ी प्रक्रिया में सहयोग करेगा। प्राधिकरण का प्रयास है कि जरूरत के मुताबिक ही जमीन खरीदी जाए और किसानों के साथ सहमति बनाकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। इससे जमीन खरीद में आने वाली अड़चनों को कम करने में मदद मिल सकती है।

इन अधिसूचित गांवों में पहले से चल रही जमीन की खरीद

प्राधिकरण के ओएसडी गिरीश कुमार झा के मुताबिक, कई अधिसूचित गांवों में जमीन खरीद की प्रक्रिया पहले से चल रही है। इनमें पौवारी, इमलियाका, अटाई मुरादपुर, लुक्सर, दादूपुर, लडपुरा, खानपुर, सिरसा, वैदपुरा, जान समाना, सुनपुरा, भोला रावल, धूममानिकपुर, खेड़ी, आमका, कैलाशपुर, खोदना कलां, भनौता और खोदना खुर्द समेत अन्य गांव शामिल हैं।इन गांवों में प्राधिकरण किसानों से आपसी सहमति के आधार पर जमीन खरीद रहा है। अब नई मुआवजा दर लागू होने के बाद इस प्रक्रिया में और तेजी आने की उम्मीद है।

अब तक 601.78 हेक्टेयर जमीन की हुई है खरीदी

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुताबिक, अब तक सहमति के आधार पर 601.78 हेक्टेयर जमीन खरीदी जा चुकी है। हालांकि, कई किसान नई मुआवजा दर का इंतजार कर रहे थे, जिसके कारण कुछ क्षेत्रों में जमीन खरीद की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही थी।अब 6,415 रुपये प्रति वर्गमीटर की नई दर लागू होने के बाद जमीन खरीद में तेजी आने की संभावना है। इससे प्राधिकरण को उन विकास योजनाओं के लिए जमीन मिल सकेगी, जहां अभी जमीन की कमी बनी हुई है।

इन औद्योगिक सेक्टरों को मिलेगा परियोजना का फायदा

नई दर पर जमीन खरीद होने से ग्रेटर नोएडा के कई औद्योगिक क्षेत्रों में प्रस्तावित विकास कार्यों को रफ्तार मिलने की उम्मीद है। प्राधिकरण के अनुसार, जमीन उपलब्ध होने के बाद इकोटेक-7, इकोटेक-8, इकोटेक-9, इकोटेक-12ए, इकोटेक-16, इकोटेक-19, इकोटेक-19ए और इकोटेक-21 में औद्योगिक भूखंडों के लिए जमीन उपलब्ध कराई जा सकेगी।इससे नए औद्योगिक भूखंड विकसित करने के साथ-साथ पहले से प्रस्तावित परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। जमीन की उपलब्धता बढ़ने पर आने वाले समय में इन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों और निवेश को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

किसानों और प्राधिकरण दोनों के लिए अहम है ये फैसला

मुआवजा दर में बढ़ोतरी को ग्रेटर नोएडा के भूमि अधिग्रहण और विकास कार्यों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। एक तरफ इससे जमीन देने वाले किसानों को पहले की तुलना में ज्यादा मुआवजा मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ प्राधिकरण को विकास परियोजनाओं के लिए जरूरी जमीन जुटाने में आसानी हो सकती है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि नई दर लागू होने के बाद किसानों और प्राधिकरण के बीच कितनी तेजी से सहमति बनती है। अगर जमीन खरीद की प्रक्रिया तेज होती है तो लंबे समय से अटकी औद्योगिक और विकास परियोजनाओं को जमीन मिलने के साथ उनके आगे बढ़ने का रास्ता भी साफ हो सकता है।

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