हरियाणा में इन किसानों पर होगी FIR और लगेगा भारी जुर्माना, जाने वजह ?

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हरियाणा में इन किसानों पर होगी FIR और लगेगा भारी जुर्माना, जाने वजह ?

Udaipur Times, Haryana News, झज्जर : जिला में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। डीसी वर्षा खांगवाल ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध के बावजूद खेतों में पराली अथवा फसल अवशेष जलाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को फील्ड मॉनिटरिंग के साथ-साथ तकनीकी माध्यमों से निगरानी बढ़ाने तथा पराली जलाने की सूचना मिलने पर तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

डीसी ने कहा कि पराली जलाना न केवल पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है, बल्कि इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होती है। इसलिए किसान फसल अवशेषों को जलाने की बजाय उनका उचित प्रबंधन करें और उपलब्ध कृषि मशीनरी एवं वैज्ञानिक तकनीकों का लाभ उठाएं।

पराली जलाने पर एफआईआर और जुर्माने का सख्त प्रावधान

डीसी ने बताया कि खेत में पराली जलाने की पुष्टि होने पर संबंधित खेत मालिक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। नियमों के तहत जुर्माना/पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने के साथ ही सत्यापित मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज करने का प्रावधान है। साथ ही, उल्लंघन के मामलों में नियमानुसार  एफआईआर एवं चालान की कार्रवाई भी की जाएगी।

रेड एंट्री के कारण सरकारी खरीद से जुड़े लाभ हो सकते हैं प्रभावित

डीसी ने बताया कि पराली जलाने की पुष्टि के बाद की जाने वाली रेड एंट्री का असर खेत मालिक को मिलने वाले सरकारी लाभों पर भी पड़ सकता है। ऐसे मामलों में सरकारी खरीद एवं एमएसपी से संबंधित लाभ प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे किसी भी स्थिति में फसल अवशेष न जलाएं और प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही वैकल्पिक व्यवस्थाओं का उपयोग करें।

ड्रोन व सेटेलाइट से भी रखी जा रही नजर

जिलाभर में पराली जलाने की घटनाओं की पहचान के लिए फील्ड स्तर पर निगरानी के साथ-साथ तकनीकी माध्यमों का भी उपयोग किया जा रहा है। संभावित घटनाओं की पहचान और उनके सत्यापन के लिए सैटेलाइट आधारित मॉनिटरिंग तथा आवश्यकता अनुसार ड्रोन से निगरानी की जा रही है। इसके अलावा गांव स्तर पर अधिकारियों व कर्मचारियों की टीमें भी सक्रिय हैं।

क्विक रेस्पॉन्स टीम को दिए गए तत्काल कार्रवाई के निर्देश

डीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्थान पर फसल अवशेष जलाने की सूचना मिलते ही क्विक रेस्पॉन्स टीम तत्काल मौके पर पहुंचे। घटना का सत्यापन करते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि पराली प्रबंधन को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

फसल अवशेष प्रबंधन पर किसानों को मिल रही प्रोत्साहन राशि

डीसी ने किसानों से कहा कि पराली को जलाने की बजाय खेत में ही उचित तरीके से प्रबंधित करें। पराली को खेत में मिलाने सहित फसल अवशेष प्रबंधन के वैज्ञानिक उपाय अपनाने वाले किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत पात्र किसानों के लिए 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि का प्रावधान भी है। उन्होंने किसानों से फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपलब्ध कृषि मशीनरी का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसान पराली को खेत में मिलाकर मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

डीसी ने कहा कि पराली प्रबंधन को सफल बनाने में ग्राम पंचायतों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की महत्वपूर्ण भूमिका है। गांव स्तर पर किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जाए तथा फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए उपलब्ध विकल्पों की जानकारी दी जाए।

पराली में आग लगाने की बजाय वैज्ञानिक तरीके से करें प्रबंधन

डीसी वर्षा खांगवाल ने जिला के किसानों से अपील करते हुए कहा कि किसान पराली में आग लगाने की बजाय उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करें। इससे वायु प्रदूषण को कम करने के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी सुरक्षित रखा जा सकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पराली जलाने के मामलों में प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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