उदयपुर संभाग में पहला माइक्रोप्लास्टी तकनीक द्वारा आंशिक जोड़ प्रत्यारोपण गीतांजली में
जहां एक ओर बढ़ती उम्र के साथ जोड़ों का दर्द बढ़ता जाता है और पूर्ण जोड़ प्रत्यारोपण ही ए

जहां एक ओर बढ़ती उम्र के साथ जोड़ों का दर्द बढ़ता जाता है और पूर्ण जोड़ प्रत्यारोपण ही एकमात्र इलाज होता है, वहीं दूसरी ओर गीतांजली हॉस्पिटल के जोईंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ रामअवतार सैनी ने आंशिक जोड़ प्रत्यारोपण कर एक क्रांतिकारी पहल की। इस तरह के मामलों का उपचार पहले राजस्थान में केवल जयपुर में होता था लेकिन अब गीतांजली हॉस्पिटल में संभव है।
डॉ सैनी ने बताया कि 70 वर्षीय रोगी नाथी बाई को 7 दिसम्बर को गीतांजली में लाया गया। रोगी एंटीरोमीडीयक ओस्टिओ आर्थराइटिस की वजह से बिल्कुल चलने की स्थिति में नहीं थी तथा इसके उपचार के लिए अत्यंत सूक्ष्म चीरे द्वारा यूनीकंपार्टमेन्टल जोड़ प्रत्यारोपण किया। यह मरीज ऑपरेशन के 6 घंटे बाद ही चलने लगी एवं अगले दिन से सभी सामान्य मूवमेंट करने की स्थिति में आ गई।
इस तकनीक द्वारा प्रत्यारोपण के लिए मरीज का चयन एवं उसके घुटने के क्षतिग्रस्त भाग का अध्ययन अति आवश्यक है। डॉ सैनी ने गीतांजली मेडिकल कॉलेज में सभी प्रकार के अति गंभीर एवं मुश्किल पूर्ण घुटना एवं कूल्हे के जोड़ प्रत्यारोपित सफलतापूर्वक एवं बिना किसी जटिलताओं के किए है। जोड़ प्रत्यारोपण की सुविधा गीतांजली में अहमदाबाद एवं जयपुर की अपेक्षा लगभग आधी कीमत में हो रही है।
क्या है माइक्रोप्लास्टी तकनीक? माइक्रोप्लास्टी तकनीक में अमरीका से प्रशिक्षित डॉ रामअवतार सैनी ने बताया कि इस तकनीक में मरीज के घुटने की 80 प्रतिशत हड्डियों एवं टिश्यू लिगामेंट को बचाकर सिर्फ रोगग्रस्त भाग को हटाकर प्रत्यारोपित किया जाता है जिसके कारण मरीज का सामान्य जोड़ बच जाता है।
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