हरियाणा में मछली पालन ने बदली कई महिलाओं की किस्मत, अब कर रही लाखों में कमाई

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हरियाणा में मछली पालन ने बदली कई महिलाओं की किस्मत, अब कर रही लाखों में कमाई 

Udaipur Times, Haryana News, गुरुग्राम : सेवा संकल्प अभियान के तहत सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से आमजन के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव को सामने लाने के लिए ‘सेवा की कहानियां’ साझा की जा रही हैं। इसी कड़ी में गुरुग्राम जिले में मत्स्य पालन विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर अनेक लाभार्थी मछली एवं झींगा पालन को आजीविका का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना सहित अन्य योजनाओं के तहत लाभार्थियों को तालाब निर्माण, पॉलीथिन, खाद-खुराक तथा अन्य आवश्यक गतिविधियों के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है।

सही जानकारी, प्रशिक्षण और मेहनत के साथ साहिल शर्मा को मिली कामयाबी

झींगा पालन के क्षेत्र में साहिल शर्मा की कहानी भी प्रेरणादायी है। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कंप्यूटर सेंटर और ई-कॉमर्स सहित विभिन्न क्षेत्रों में काम करने का प्रयास किया। बाद में अपने पिता से झींगा पालन के क्षेत्र में सफल लोगों के बारे में जानकारी मिलने के बाद उन्होंने इस कार्य को अपनाने का निर्णय लिया। कार्य शुरू करने से पहले उन्होंने लाहली, रोहतक से पांच दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स किया तथा करीब एक माह तक विभिन्न झींगा फार्मों पर जाकर व्यावहारिक जानकारी हासिल की। उपयुक्त भूमि की तलाश कर उसे पट्टे पर लेने के बाद उन्होंने झींगा पालन शुरू किया। आज वे इस क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। साहिल का कहना है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, आवश्यकता सही जानकारी, प्रशिक्षण और मेहनत के साथ अवसर का लाभ उठाने की है।

प्रदीप कुमार स्वयं आत्मनिर्भर बन अन्य लोगों को दे रहे रोजगार

गांव किरण की खेड़ली निवासी प्रदीप कुमार ने पंचायत से 5 एकड़ भूमि लेकर मछली पालन शुरू किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत उन्हें 6 लाख 70 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। प्रदीप कुमार के अनुसार तालाब से होने वाली आमदनी में से सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें प्रति वर्ष करीब 3 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजना से उन्हें मछली पालन को व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाने में सहयोग मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार के स्तर पर मिली सहायता से आज वे आत्मनर्भर होकर अन्य लोगों को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।

खाद के लिए मिली आर्थिक सहायता ने चमन लाल की दिया संबल

गांव खेडला निवासी चमन लाल पिछले करीब 10 वर्षों से अपनी ग्राम पंचायत का तालाब पट्टे पर लेकर मछली पालन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018-19 में मत्स्य पालन विभाग, गुरुग्राम द्वारा अनुसूचित जाति योजना के तहत खाद-खुराक के लिए 97 हजार रुपये की अनुदान राशि प्रदान की गई। सरकारी सहायता से उन्हें मछली पालन के कार्य में सहयोग मिला।

सरकार से मिल रहे प्रोत्साहन से महिलाएं भी बन रही आत्मनिर्भर

इंछापुरी निवासी निशा देवी ने अपनी 3 एकड़ भूमि में तालाब बनाकर मछली पालन शुरू किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023-24 में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य विभाग द्वारा तालाब निर्माण एवं खाद-खुराक के लिए उन्हें 7 लाख 21 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि योजना के सहयोग से उन्हें अपनी भूमि पर मत्स्य पालन की गतिविधि शुरू करने का अवसर मिला और वह इसे आजीविका के रूप में आगे बढ़ा रही हैं।

गांव पालड़ी, तहसील फर्रुखनगर की रिंकी ने अपनी निजी 5 एकड़ भूमि पर तालाब बनाकर मछली पालन शुरू किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत उन्हें 14 लाख 48 हजार 800 रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। इस आर्थिक सहायता से उन्हें अपनी भूमि पर मत्स्य पालन की गतिविधि विकसित करने में सहयोग मिला। रिंकी ने कहा कि सरकारी योजना के माध्यम से उन्हें रोजगार और आय का अवसर मिला है तथा उन्होंने इसके लिए भारत सरकार और हरियाणा सरकार का धन्यवाद किया।

पटौदी निवासी रेखा देवी ने 3 एकड़ भूमि पट्टे पर लेकर तालाब तैयार किए और झींगा पालन का कार्य शुरू किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य पालन विभाग द्वारा तालाब निर्माण, पॉलीथिन तथा खाद-बीज के लिए उन्हें 8 लाख 81 हजार रुपये की अनुदान राशि प्राप्त हुई। रेखा देवी ने कहा कि सरकारी सहायता से उन्हें झींगा पालन शुरू करने और इसे आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहयोग मिला है।

मत्स्य पालन विभाग की इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र में उपलब्ध भूमि और जल संसाधनों का उपयोग आर्थिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। लाभार्थियों को योजना के अनुसार आर्थिक सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और मत्स्य पालन से जुड़ी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहन मिलने से मछली एवं झींगा पालन को रोजगार और आय के एक वैकल्पिक साधन के रूप में अपनाने में मदद मिल रही है। सेवा संकल्प अभियान के तहत सामने आईं ये कहानियां इस बात को दर्शाती हैं कि सरकारी योजनाओं से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया आधार मिल रहा है।

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