चार पीढियां लगातार कर रही है देश की सेवा, परदादा, दादा और पापा के बाद अब बेटा बना लेफ्टिनेंट

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चार पीढियां लगातार कर रही है देश की सेवा, परदादा, दादा और पापा के बाद अब बेटा बना लेफ्टिनेंट 

Udaipur Times, Lieutenant Paras Bhatt : उत्तराखंड के थलकेदार इलाके के रौलियागांव टोक के बेल्टाडी निवासी पारस भट्ट ने गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) में अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद भारतीय सेना में ऑफिसर बनकर अपने परिवार की शानदार सैन्य विरासत को आगे बढ़ाया है। उनकी इस उपलब्धि से उनका परिवार और पूरा इलाका खुशी और गर्व से भर गया है।

पारस भट्ट कैप्टन सीएस भट्ट (रिटायर्ड) के बेटे हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई वड्डा के गायत्री मेमोरियल पब्लिक स्कूल से की। इसके बाद, उन्होंने पिथौरागढ़ के द एशियन एकेडमी से जूनियर हाई स्कूल और आर्मी पब्लिक स्कूल से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने देहरादून की ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से बी.टेक की डिग्री हासिल की।

सेना से जुड़ी चार पीढ़ियां

उनके परिवार की चार पीढ़ियां सेना से जुड़ी रही हैं। पारस से पहले, उनके पिता, दादा और परदादा ने कोर ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (EME) में सेवा की थी। परिवार के कई अन्य सदस्यों ने भी भारतीय सेना में योगदान दिया है। घर के सैन्य माहौल और अपने पूर्वजों की वीरता की कहानियों से बचपन से ही प्रेरित होकर, पारस ने सेना में ऑफिसर बनने का लक्ष्य तय किया। उन्होंने कड़ी मेहनत और लगन से यह लक्ष्य हासिल किया।

परिवार के लिए बना एक यादगार पल

OTA गया में पासिंग-आउट परेड के दौरान, जब लेफ्टिनेंट पारस भट्ट का मेडल उनके दादा-दादी को सौंपा गया, तो उनकी आंखों में गर्व और खुशी के आंसू छलक आए। यह परिवार के लिए सचमुच एक यादगार पल था। पारस के चाचा, दिनेश चंद्र भट्ट, अमन सोशल वेलफेयर सोसाइटी के कोषाध्यक्ष के तौर पर समाज सेवा से जुड़े हैं। 

पूर्व सैनिकों और स्थानीय निवासियों ने लेफ्टिनेंट पारस भट्ट की उपलब्धि पर खुशी जताई है। चार पीढ़ियों की सैन्य विरासत को आगे बढ़ाने में उनकी सफलता इलाके के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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