व्यवहार में हित-मित-प्रिय वाणी ही सत्यःआचार्य वैराग्यनंदी

आदिनाथ दिगम्बर चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से हिरणमगरी से. 11 स्थित आदिनाथ भवन में आयोजित पर्युषण पर्व के पांचवे दिन उत्तम सत्य धर्म आचार्य वैराग्यनंदी महाराज ने कहा कि व्यवहार में हित-मित-प्रिय वाणी को सत्य कहा गया है।

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व्यवहार में हित-मित-प्रिय वाणी ही सत्यःआचार्य वैराग्यनंदी

उदयपुर। आदिनाथ दिगम्बर चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से हिरणमगरी से. 11 स्थित आदिनाथ भवन में आयोजित पर्युषण पर्व के पांचवे दिन उत्तम सत्य धर्म आचार्य वैराग्यनंदी महाराज ने कहा कि व्यवहार में हित-मित-प्रिय वाणी को सत्य कहा गया है।

उन्होंने कहा कि हित शब्द का अर्थ उपकार, नेकी, भलाई आदि तो है ही लेकिन साथ ही हित शब्द का अर्थ उपयुक्त, समीचीन, सम्यक, सही, स्थापित भी होता है। अतः जो स्थापित सर्वमान्य नपा-तुला और लोकसम्मत है, वही सत्य है।

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उत्तम सत्य वचन मुख बोले, सो प्राणी संसार न डोले। जिसकी वाणी व जीवन में सत्य धर्म अवतरित हो जाता है, उसकी संसार सागर से मुक्ति एकदम निश्चित है। आचार्य सुंदर सागर महाराज का आज पांचवा उपवास है, वे दश लक्षण के दश उपवास की साधना कर रहे है। पाद प्रक्षालन अशोक कोठारी, शान्ति धारा प्रकाश भवरा व विजय कुमार वनावत परिवार ने किया। आरती का लाभ अल्पेश कोठारी ने प्राप्त किया।

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