8 गोल्ड मेडल से लेकर IAS अफसर बनने तक, पढ़ाई के साथ-साथ ग्राउंड में भी छाई साक्षी की कहानी
Udaipur Times, IAS Sakshi Sawhney : अमृतसर की DC साहनी 2014 बैच की IAS अधिकारी हैं। उन्होंने 2013 की UPSC परीक्षा में छठा स्थान प्राप्त किया था। पंजाब से ताल्लुक रखने वाली साक्षी साहनी सरकारी अधिकारियों के परिवार से आती हैं। उनके पिता राजस्व सेवा अधिकारी (आईआरएस) से सेवानिवृत्त हैं, उनकी मां एक स्कूल की प्रधानाध्यापिका हैं और उनकी बहन बैंकिंग क्षेत्र में कार्यरत हैं।
ऐसे माहौल में पली-बढ़ी साहनी का झुकाव स्वाभाविक रूप से सरकारी सेवा में आने की ओर था। साहनी ने एक निजी स्कूल से शिक्षा प्राप्त की और बाद में हैदराबाद स्थित नालसर विधि विश्वविद्यालय से बीए एलएलबी की डिग्री हासिल की, जहां उन्होंने 8 गोल्ड मेडल के साथ ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की।

सामाजिक चुनौतियों से निपटने में सिविल सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका का एहसास हुआ
शुरुआत में साक्षी साहनी का झुकाव कानून की ओर था, लेकिन अपनी पढ़ाई के दौरान उन्हें सामाजिक चुनौतियों से निपटने में सिविल सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका का एहसास हुआ। परिणामस्वरूप, उन्होंने कानून को अपने वैकल्पिक विषय के रूप में चुनकर UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने कॉलेज में पढ़ते समय ही 2012 में UPSC की परीक्षा में अपना पहला प्रयास किया, लेकिन निबंध में कम अंक आने के कारण उनका चयन नहीं हो सका।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक में (AIR) 6 हासिल की
एक इंटरव्यू में साक्षी साहनी ने बताया कि उन्हें गीतांजलि बंधन (2011 में छठी रैंक) से प्रेरणा मिली, जिन्होंने अपने दूसरे प्रयास की तैयारी के दौरान इसी तरह की चुनौतियों का सामना किया था। इस प्रेरणा और रणनीतिक तैयारी के संयोजन से साहनी को 2014 में वही छठी रैंक हासिल करने में मदद मिली।
बाढ़ के दौरान ज़मीनी स्तर पर काम करके चर्चा में आईं
जब बाढ़ का पानी गांवों में भर गया और पंजाब के लोग मुश्किल में थे, तो साक्षी साहनी ने ज़मीनी स्तर पर काम किया और लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनीं। सोशल मीडिया पर उनकी कई तस्वीरें वायरल हुईं, जिनमें वह रोती हुई महिलाओं को गले लगाकर दिलासा देती और सक्रिय रूप से मदद करती नज़र आईं।

चाहे राहत सामग्री बांटना हो, डरे हुए लोगों को गले लगाकर हिम्मत बंधाना हो, या मदद के लिए रेनकोट पहनकर घुटने तक पानी में उतरना हो साक्षी हर स्थिति में लोगों के साथ खड़ी रहीं। वह पढ़ाई में हमेशा होनहार थीं, लेकिन अपनी पढ़ाई के साथ-साथ उनके मन में समाज के लिए कुछ करने की गहरी इच्छा भी थी।
