गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार को मिली मंजूरी, इन 100 गांवों की बदलेगी किस्मत ?
Udaipur Times, Ganga Expressway Expansion : 26 अगस्त को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक होनी है। इस बैठक में मेरठ से हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार को मंज़ूरी मिलने की संभावना है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 10,760 करोड़ रुपये है। योगी सरकार झांसी लिंक एक्सप्रेसवे को भी मंज़ूरी दे सकती है।
PM मोदी ने चार महीने पहले, 29 अप्रैल को गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के दौरान मेरठ से हरिद्वार तक इसके विस्तार की घोषणा की थी। मुख्य गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर लंबा है। अब, मेरठ से हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए 147 किलोमीटर लंबा, छह-लेन वाला लिंक एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा।
कैबिनेट इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े प्रस्ताव को भी मंज़ूरी
इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को भविष्य में आठ लेन तक बढ़ाया जा सकता है। आज की कैबिनेट बैठक में एक्सप्रेसवे के अलाइनमेंट (रूट) को मंज़ूरी मिलने की उम्मीद है। झांसी लिंक एक्सप्रेसवे जो 106 किलोमीटर लंबा है और जिसकी अनुमानित लागत 7,768 करोड़ रुपये उसको भी मंज़ूरी मिल सकती है। इसके अलावा, कैबिनेट इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े प्रस्ताव को भी मंज़ूरी दे सकती है।
गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार अमरोहा के रिखालू गांव से शुरू
गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार अमरोहा के रिखालू गांव से शुरू होगा। यह बिजनौर से होते हुए उत्तराखंड के हरिद्वार में नूरपुर पंजन्हेरी गांव के पास बन रहे हरिद्वार बाईपास से जुड़ेगा। यह रूट उत्तर प्रदेश में 117 किलोमीटर और उत्तराखंड में 30 किलोमीटर की दूरी तय करेगा। अमरोहा, बिजनौर और हरिद्वार जैसे ज़िले एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ेंगे।
100 गांव होंगे कवर
मेरठ-हरिद्वार लिंक के लिए अलाइनमेंट सर्वे और ज़मीन अधिग्रहण के लिए गैज़ेट नोटिफिकेशन की प्रक्रियाएं अभी UPEIDA और NHAI स्तर पर अंतिम चरण में हैं। मेरठ ज़िले में इस लिंक की शुरुआत बिजौली गांव से होगी। इस रूट में बिजौली, खरखौदा और मवाना तहसीलों के गांव, साथ ही हस्तिनापुर के पश्चिमी इलाकों के कुछ गांव शामिल होंगे। इसमें मुज़फ़्फ़रनगर-बिजनौर बॉर्डर पर जानसठ तहसील के पूर्वी गांव, मीरापुर इलाका और बिजनौर-मुज़फ़्फ़रनगर बॉर्डर पर गंगा नदी के किनारे बसे गांव शामिल हो सकते हैं।
यह बिजनौर से उत्तराखंड बॉर्डर तक जाएगा
बिजनौर में, मंडावर, नंगल सोती और किरतपुर तहसीलों के गांव UP-उत्तराखंड बॉर्डर पर चिड़ियापुर रेंज से जुड़ेंगे। हरिद्वार में, यह रास्ता लक्सर तहसील के गांवों, रुड़की के बाहरी इलाकों और हरिद्वार बाईपास (बहादराबाद और ज्वालापुर के पास) से होकर गुज़रेगा। कैबिनेट की मंज़ूरी के बाद ज़मीन अधिग्रहण के लिए फ़ाइनल गज़ट नोटिफ़िकेशन जारी होने पर, लगभग 100 गाँवों की जानकारी रेवेन्यू रजिस्टर में दर्ज की जाएगी।
झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के लिए मंज़ूरी
झांसी लिंक एक्सप्रेसवे, UP सरकार और UPEIDA का एक ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट है। इसका मकसद झांसी और उसके आस-पास के इलाकों को सीधे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जोड़ना है। इससे झांसी से दिल्ली, नोएडा, लखनऊ और आगरा तक का सफ़र का समय कम हो जाएगा। यह 106 किलोमीटर लंबा, 6-लेन वाला, एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है, जिसकी अनुमानित लागत 5,001 करोड़ रुपये है। यह एक्सप्रेसवे 63 गांवों जिनमें गरौठा, टहरौली, मोठ और झांसी सदर शामिल हैं। इसमें लगभग 1,232 हेक्टेयर ज़मीन को जोड़ेगा।
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से दिल्ली तक कनेक्टिविटी को बढ़ावा
पहले चरण में, जालौन ज़िले के फूलपुरा में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे जंक्शन से निर्माण शुरू होगा और यह झांसी के पिपरा गाँव तक जाएगा। दूसरे चरण में पिपरा गांव को झांसी शहर और रिंग रोड से जोड़ा जाएगा। यह लिंक बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के ज़रिए आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के लिए हाई-स्पीड कनेक्टिविटी देगा। इससे झांसी से दिल्ली और लखनऊ तक का सफ़र का समय 3 से 4 घंटे कम हो जाएगा।