हरियाणा में कागजों में उगते रहे बाग, खेतों में नहीं मिले एक भी पौधे ! कई अधिकारियों-कर्मचारियों पर FIR

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हरियाणा में कागजों में उगते रहे बाग, खेतों में नहीं मिले एक भी पौधे ! कई अधिकारियों-कर्मचारियों पर FIR

Udaipur Times, Haryana News : हरियाणा के यमुनानगर से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। किसानों के खेतों में बाग लगाने और विभिन्न बागवानी योजनाओं के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं के मामले में 13 वर्ष बाद एफआईआर दर्ज हुई है। जांच में कागजों पर बाग लगाने और सब्सिडी जारी करने के बावजूद खेतों में पौधे नहीं मिलने के आरोप सही हैं।

ACB ने दो तत्कालीन अधिकारियों समेत अन्य कर्मचारियों के खिलाफ गबन, धोखाधड़ी, जालसाजी, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम व अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। Haryana News

एसीबी पंचकूला की एफआईआर के अनुसार मामला वर्ष 2007-08 से 2012-13 के दौरान यमुनानगर जिले में संचालित विभिन्न बागवानी योजनाओं से जुड़ा है। इसमें तत्कालीन जिला उद्यान अधिकारी (डीएचओ) सुधीर यादव, तत्कालीन एचएचओडी सोरन सिंह तथा अन्य कर्मचारियों को नामजद किया है।

आरोप सही, सब्सिडी जारी, खेतों में नहीं मिले पौधे

FIR के अनुसार वर्ष 2013 में तत्कालीन मुख्य सचिव के निर्देश पर जांच शुरू हुई थी। जांच के दौरान कुल 26 आरोपों की पड़ताल की गई, जिनमें यमुनानगर से जुड़े पांच आरोप सही पाए गए। जांच में नए बाग लगाने, पुराने बागों के पुनर्जीवन, जैविक खेती, सामग्री खरीद और बीज अधिनियम के अनुपालन में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। Haryana News

जांच में पाया कि आम, चीकू और अन्य फलों के बाग लगाने के नाम पर लाखों रुपये की सब्सिडी जारी की गई लेकिन मौके पर पौधे या तो नहीं मिले या पूरी तरह नष्ट पाए गए। कई किसानों ने जांच टीम को बताया कि विभागीय अधिकारियों ने उनके खेतों का कभी निरीक्षण ही नहीं किया। कुछ मामलों में एक एकड़ बाग का भुगतान दिखाया गया, जबकि मौके पर केवल 13 पौधे मिले।

बीज एक्सपायर, वर्मी कम्पोस्ट यूनिट भी नहीं

जांच रिपोर्ट में ऑर्गेनिक फार्मिंग और शिवालिक डेवलपमेंट योजना में भी गड़बड़ियां सामने आईं। रिकॉर्ड में वर्मी कम्पोस्ट यूनिट स्थापित दर्शाई लेकिन मौके पर कोई अस्तित्व नहीं मिला। वहीं, लाखों मूल्य के बीज किसानों तक पहुंचाने के बजाय कार्यालयों में पड़े-पड़े एक्सपायर हो गए। Haryana News

बीज अधिनियम उल्लंघन का भी आरोप

एफ़आईआर में बीज अधिनियम, 1966 के उल्लंघन का भी उल्लेख है। वर्ष 2007-08 से 2012-13 के दौरान घटिया गुणवत्ता के बीजों के मामलों में नियमानुसार अदालत में मुकदमे दर्ज नहीं किए गए। एसीबी ने इसे पद के दुरुपयोग, सरकारी हितों की अनदेखी मानते हुए संबंधित अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

2007 से 2013 तक की गड़बड़ियों का मामला

मिली जानकारी के मुताबिक जांच में वर्ष 2007-08 से 2012-13 के दौरान नए फलों के बाग लगाने और पुराने बागों के कायाकल्प (रीजुवेनेशन) की योजनाओं में गंभीर अनियमितताएं मिलीं। आरोप था कि 2,000 हेक्टेयर में नए बाग और 1,000 हेक्टेयर में पुराने बागों के कार्यों में गड़बड़ी की। यमुनानगर में रिकॉर्ड, मौके की स्थिति में अंतर मिला। Haryana News

कई स्थानों पर कागजों में बाग दर्शाए, जबकि खेतों में पौधे नहीं हैं। जांच में सब्जियों, फूलों, टमाटर और शिमला मिर्च के बीजों की खरीद एवं वितरण में भी अनियमितताएं उजागर हुईं। करीब 6.30 लाख रुपये के सब्जियों के बीज किसानों तक पहुंचे ही नहीं और कार्यालय में पड़े-पड़े खराब हो गए। 

फूलों के बीज भी ऑफ-सीजन में बांटने की बात सामने आई। वहीं, 2007-08 से 2012-13 के दौरान घटिया बीजों के 82 मामलों में नियमानुसार कार्रवाई नहीं करना भी जांच में गंभीर लापरवाही माना। Haryana News

मामले में 18 मार्च 2013 को जांच के आदेश दिए थे। जांच के बाद 18 जुलाई 2025 को रिपोर्ट मुख्य सचिव को भेजी। ऐसे में 3 जुलाई 2026 को एफआईआर की मंजूरी मिली और 5 अगस्त 2026 को एसीबी पंचकूला ने मामला दर्ज किया।

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