प्रतिस्पर्धात्मक दौर में जी.डी.पी. की जगह जी.एच.आई.(ग्रॉथ हेप्पीनेस इंडेक्स) की जरूरत

विश्व खुशहाली दिवस पर एकेडैमी ऑफ वैलबींग सोसाइटी द्वारा एक से गोष्ठी का आयोजन सहेलियों की बाडी स्थित कार्यालय में किया गया, जिसमें इस दिवस की प्रासंगिता पर प्रतिभागियों ने अपने विचार रखे। सभी ने सर्वसम्मती से कहा कि आज इस प्रतिस्पर्धात्मक दौर में जी.डी.पी. की जगह जी.एच.आई.(ग्रॉथ हेप्पीनेस इंडेक्स) की जरूरत है।

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प्रतिस्पर्धात्मक दौर में जी.डी.पी. की जगह जी.एच.आई.(ग्रॉथ हेप्पीनेस इंडेक्स) की जरूरत

विश्व खुशहाली दिवस पर एकेडैमी ऑफ वैलबींग सोसाइटी द्वारा एक से गोष्ठी का आयोजन सहेलियों की बाडी स्थित कार्यालय में किया गया, जिसमें इस दिवस की प्रासंगिता पर प्रतिभागियों ने अपने विचार रखे। सभी ने सर्वसम्मती से कहा कि आज इस प्रतिस्पर्धात्मक दौर में जी.डी.पी. की जगह जी.एच.आई.(ग्रॉथ हेप्पीनेस इंडेक्स) की जरूरत है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ऐकेडमी की अध्यक्ष प्रो. विजयलक्ष्मी चौहान ने कहा कि खुशहाली के लिए सकारात्मक सोच आवश्यक है। हमारा जीवन आकांक्षाओं और अपेक्षाओं से फलीभूत है उसे नियमित और निर्धारण करने की आवश्यकता है। अकादमी के सचिव डॉ. देवेन्द्र सिंह सिसोदिया ने खुशहाल जीवन व्यतीत करने के लिए आध्यात्मक एवं परामर्श की आवश्यकता बताई।

डॉ. कल्पना शर्मा ने बताया कि खुलहाली निर्भर करती बच्चों के लालन-पालन से जो प्रारंभ से क्या संस्कार निर्मित करता है। निर्मल शाह ने सामाजिक सम्बल खुशहाली के लिए आवश्यक बताया। वर्षा जोशी ने स्वप्रत्यक्ष सकारात्मकता पर बल दिया। गोष्ठी के विचार विमर्श से यह बात उभर कर आई कि व्यक्ति के जीवन में किसी भी प्रकार की अस्थिरता, उलभ्न या दबाव महसूस हो तो मनोवैज्ञानिक सलाह लेनी चाहिये ताकि व्यक्ति अपने आपकी स्वास्थ्य, खुशहाल एवं समरूप (हेल्थ हेप्पीनेस एंड हारमनी) बनाये रखें।

खुशहाली के लिए सिर्फ पैसा नहीं वरन व्यवस्थित जीवनशैली आवश्यक है जो हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का समरूप बना सके। परिचर्या में डॉ. राशी माथुर, डॉ. पॉल मैथ्यू, गजेन्द्र मीणा आदि ने भाग लिया। गोष्ठी का समापन डॉ. डाली गांधी के धन्यवाद से हुआ।

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