मात्र 2.25 लाख रुपये में अपनी पुरानी कार को बनवाइये इलेक्ट्रिक कार, यहां जानिए RTO खर्च और पूरा प्रोसेस

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मात्र 2.25 लाख रुपये में अपनी पुरानी कार को बनवाइये इलेक्ट्रिक कार, यहां जानिए RTO खर्च और पूरा प्रोसेस

Old Car EV Conversion: लगभग 2.25 लाख रुपये में किसी गाड़ी को इलेक्ट्रिक में बदलने का विकल्प उन लोगों के लिए राहत की बात हो सकती है, जो नई इलेक्ट्रिक गाड़ी (EV) खरीदने पर लाखों रुपये खर्च नहीं करना चाहते। यहाँ कन्वर्ज़न किट, बैटरी, मोटर, इंस्टॉलेशन के खर्च और ज़रूरी कानूनी मंजूरियों के बारे में पूरी जानकारी दी गई है। 2009 मॉडल की एक वैगन आर (Wagon R) को EV कन्वर्ज़न किट का इस्तेमाल करके इलेक्ट्रिक गाड़ी में बदला गया है। फोटो: ITG। क्या आप इलेक्ट्रिक कार खरीदने की सोच रहे हैं, लेकिन इसकी कीमत आपके बजट से बाहर है? बाज़ार में इलेक्ट्रिक कारें तो मौजूद हैं, लेकिन उनकी कीमत लाखों रुपये है।

क्या पुरानी कार को सीधे कबाड़खाने (स्क्रैपयार्ड) में भेजना ही एकमात्र विकल्प बचा है
उन लोगों का क्या, जिनके घर के बाहर 10-15 साल पुरानी पेट्रोल या डीज़ल कार खड़ी है? ऐसी गाड़ियों की उम्र लगभग पूरी हो चुकी है, सरकारी नियमों का दबाव है, और आपका बजट नई कार खरीदने की इजाज़त नहीं देता। क्या पुरानी कार को सीधे कबाड़खाने (स्क्रैपयार्ड) में भेजना ही एकमात्र विकल्प बचा है? भोपाल की एक कंपनी का दावा है कि ऐसा ज़रूरी नहीं है।

2009 मॉडल जैसी पुरानी कारों को भी इलेक्ट्रिक गाड़ियों में बदल सकते हैं
अपनी पुरानी कार को इलेक्ट्रिक गाड़ी में बदलकर आप उसे फिर से सड़क पर ला सकते हैं। भोपाल स्थित 'श्रीआन इलेक्ट्रिक व्हीकल प्राइवेट लिमिटेड' (ShriAan Electric Vehicle Private Limited) का दावा है कि वे कारों को यहां तक कि 2009 मॉडल जैसी पुरानी कारों को भी इलेक्ट्रिक गाड़ियों में बदल सकते हैं। कंपनी के अनुसार, इस प्रक्रिया में लगभग 2.25 लाख रुपये का खर्च आ सकता है।

500 से ज़्यादा गाड़ियों को इलेक्ट्रिक गाड़ियों में बदल चुकी है
दूसरे शब्दों में कहें तो, नई कार खरीदने के बजाय, आप अपनी मौजूदा गाड़ी से इंजन और फ्यूल सिस्टम को हटाकर, उनकी जगह इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी लगाने का विकल्प चुन सकते हैं। 'श्रीआन इलेक्ट्रिक व्हीकल प्राइवेट लिमिटेड' के टेक्निकल हेड ने बताया कि कंपनी 2019 से इस काम में जुड़ी है और अब तक इन किटों का इस्तेमाल करके 500 से ज़्यादा गाड़ियों को इलेक्ट्रिक गाड़ियों में बदल चुकी है। इस कन्वर्जन प्रक्रिया में, पेट्रोल या डीजल इंजन को हटाकर उसकी जगह इलेक्ट्रिक मोटर लगाई जाती है। इसके अलावा, इसमें बैटरी पैक, मोटर कंट्रोलर और अन्य ज़रूरी इलेक्ट्रिक पुर्ज़े लगाए जाते हैं। हालांकि, यह खर्च केवल एक बेसिक कन्वर्जन किट के लिए है। कुल खर्च कार के मॉडल, बैटरी की क्षमता और लगाए जाने वाले अन्य पुर्जों के आधार पर बढ़ता है। हर पुरानी कार को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलना संभव नहीं है; इसके लिए कार का मॉडल, उसकी मौजूदा हालत, उपलब्ध जगह और लगाए जाने वाले इलेक्ट्रिक सिस्टम की अनुकूलता जैसे कारक बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। कंपनी का दावा है कि वह 2009 या उसके बाद की कारों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदल सकती है।


टेक्निकल हेड का कहना है कि 1,000 किलोग्राम तक वजन वाली छोटी कारों को आसानी से EV (इलेक्ट्रिक वाहन) में बदला जा सकता है। इनमें मारुति ओमनी, वैगनआर, ऑल्टो, मारुति 800 और स्विफ्ट जैसी छोटी हैचबैक, साथ ही हुंडई सैंट्रो और i10 जैसी कारें शामिल हैं। चार-पहिया वाहनों के लिए इस इलेक्ट्रिक कन्वर्जन किट में लगभग 16 पुर्जे (कंपोनेंट्स) होते हैं।

ग्राहक कंपनी की वर्कशॉप में जाकर कन्वर्जन करवा सकते हैं
ग्राहक कंपनी की वर्कशॉप में जाकर यह कन्वर्जन करवा सकते हैं, या फिर किट खरीदकर अपनी सुविधा के अनुसार कहीं और भी इसे लगवा सकते हैं। इस कन्वर्जन किट को लगवाने के संबंध में, कंपनी 'श्री-एन इलेक्ट्रिक' (Shri-An Electric) का कहना है कि वे सर्विस वारंटी केवल उन्हीं वाहनों पर देते हैं, जिनमें कन्वर्जन किट उनकी अपनी वर्कशॉप में लगाई गई हो।

यहां "सर्विस वारंटी" का मतलब यह है कि अगर EV कन्वर्जन के बाद कोई समस्या आती है, तो किसी भी पुर्जे को बदलने का खर्च ग्राहक को उठाना होगा, जबकि सर्विस (लेबर) का खर्च कंपनी उठाएगी। अब आते हैं इस पूरी प्रक्रिया के सबसे महत्वपूर्ण पहलू पर: किसी पेट्रोल या डीजल वाहन में सिर्फ इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी लगा देने से वह अपने आप कानूनी रूप से सड़क पर चलाने लायक (रोड-लीगल) नहीं हो जाता।

देश के अलग-अलग हिस्सों में RTO कार्यालय के हिसाब से खर्च अलग-अलग
वाहन में किए गए ऐसे बदलावों को लागू मोटर वाहन नियमों, तकनीकी मंजूरियों और रजिस्ट्रेशन की शर्तों का पालन करना होता है। इसलिए, कन्वर्जन शुरू करने से पहले, आपको उस RTO से अनुमति लेनी होगी जहाँ आपकी कार रजिस्टर्ड है, और जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी करनी होगी। कंपनी का कहना है कि पहले वे EV कन्वर्जन के लिए RTO से जुड़ी प्रक्रियाएं खुद संभालते थे, लेकिन अब ग्राहकों को अपनी कार को EV में बदलने से पहले खुद ही जरूरी RTO मंजूरियां लेनी होंगी। भगवान सिंह बताते हैं कि एक छोटी हैचबैक के लिए RTO की प्रक्रिया में कुछ खर्च आता है, जो कन्वर्जन पैकेज की कीमत में शामिल नहीं होता है और इसे ग्राहक को अलग से देना पड़ता है।

इसके अलावा, देश के अलग-अलग हिस्सों में RTO कार्यालय के हिसाब से यह खर्च अलग-अलग हो सकता है। आमतौर पर, यह किसी नए वाहन के लिए लगने वाले RTO शुल्क के बराबर ही होता है (जिसमें ईंधन का प्रकार बदलने के लिए 'फॉर्म 28A' दाखिल करना भी शामिल है)। ड्राइविंग रेंज और चार्जिंग समय की बात करें, तो एक इलेक्ट्रिक कार की उपयोगिता काफी हद तक उसकी बैटरी क्षमता और रेंज पर निर्भर करती है। जब किसी पुरानी कार को इलेक्ट्रिक में बदला जाता है, तो एक बार चार्ज करने पर वह कितनी दूर तक जा सकती है, यह कई बातों पर निर्भर करता है। इसमें बैटरी पैक की क्षमता और गाड़ी का कुल वज़न शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि वे हर ग्राहक की खास ज़रूरतों और माँगों के हिसाब से कन्वर्ज़न किट लगाते हैं। कंपनी के अनुसार, कार की बैटरी को 7 घंटे में पूरा चार्ज किया जा सकता है।

बेसिक किट की कीमत लगभग ₹2.25 लाख से शुरू
कंपनी बताती है कि बेसिक किट की कीमत लगभग ₹2.25 लाख से शुरू होती है। इसमें 48/60-वोल्ट, 5 kW की इलेक्ट्रिक मोटर और 7.2 kWh, 72-वोल्ट, 100 Ah का बैटरी पैक शामिल होता है। आमतौर पर, यह सेटअप एक बार चार्ज करने पर लगभग 120 km की रेंज देता है, हालाँकि गाड़ी में कितने यात्री बैठे हैं और कितना लोड है, इसके आधार पर यह रेंज कम या ज़्यादा हो सकती है।

यह बेसिक किट रोज़ाना शहर में आने-जाने के लिए बहुत बढ़िया है। चार्जिंग के लिए, इस किट के साथ एक एडाप्टर और 5 मीटर लंबी केबल मिलती है, जिससे बैटरी को घर में इस्तेमाल होने वाले 16-एम्पीयर के सॉकेट से आसानी से चार्ज किया जा सकता है।

ग्राहक की जरूरत के हिसाब से कस्टमाइज़ (तैयार) करने का विकल्प
तकनीकी प्रमुख के अनुसार, अगर बैटरी 20 प्रतिशत चार्ज है, तो उसे पूरा चार्ज होने में कुछ समय लगता है। अगर बैटरी पूरी तरह से डिस्चार्ज हो गई है, तो उसे फुल चार्ज होने में लगभग 7 घंटे लगेंगे। भगवान सिंह बताते हैं कि वे जिन गाड़ियों को इलेक्ट्रिक में बदलते हैं, उनमें बैटरी पैक को पूरी तरह से ग्राहक की ज़रूरत के हिसाब से कस्टमाइज़ (तैयार) करने का विकल्प देते हैं। एक बार उन्होंने मारुति ओमनी एम्बुलेंस को EV में बदला था, जो अब जम्मू में इस्तेमाल हो रही है। यह उनके करियर का सबसे बड़ा कस्टमाइज़ेशन प्रोजेक्ट था, जिसमें उन्होंने अपनी सबसे बड़ी कन्वर्ज़न किट लगाई थी। ऐसा काम करने वाली और भी कंपनियाँ हैं; ऐसा नहीं है कि सिर्फ यही एक कंपनी पुरानी कारों को इलेक्ट्रिक गाड़ियों में बदलती है।

देश में कई अन्य ब्रांड भी हैं जो मौजूदा गाड़ियों को इलेक्ट्रिक में बदलने का काम करते हैं। इनमें ड्यूरियल मोटर्स, लूप मोटो, फॉक्स मोटर्स, ई-ट्रियो, भारत किट और नॉर्थवे मोटरस्पोर्ट शामिल हैं। ये कंपनियां ₹3 लाख से लेकर ₹14 लाख तक की लागत में गाड़ियों को EV में बदलने की सुविधा देती हैं। जिन वाहनों की उपयोग अवधि खत्म होने वाली है या जो पहले ही उस चरण तक पहुंच चुके हैं उनके लिए इलेक्ट्रिक पावर में बदलने का यह विकल्प एक जीवन रेखा की तरह काम करता है। हालाँकि ईंधन के प्रकार को बदलने से जुड़े नियम और खर्च अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) में अलग-अलग हो सकते हैं, फिर भी यह उन लोगों के लिए एक किफायती विकल्प है जो अपने वाहनों को कबाड़खाने (स्क्रैपयार्ड) में भेजने के बजाय उनका इस्तेमाल जारी रखना चाहते हैं। हालांकि, यह फैसला केवल शुरुआती खर्च को देखकर नहीं लिया जाना चाहिए।

कुल कन्वर्ज़न खर्च, भविष्य में बैटरी बदलने का खर्च, वारंटी कवरेज, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और कानूनी मंजूरियों जैसी बातों पर विचार करना बहुत ज़रूरी है। अगर ये सभी चीजें आपकी ज़रूरतों के हिसाब से सही बैठती हैं, तो अपनी पुरानी कार को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलना, एक बिल्कुल नई कार खरीदने का एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

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