त्योहारी सीजन से पहले खूब महंगा बिक रहा गुड ! जाने क्यों बढ़ रहे दाम और कब होगा सस्ता ?
Udaipur Times, Gur Price Hike : चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच अब गुड़ ने भी आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। कई राज्यों में पिछले कुछ हफ्तों में गुड़ के दाम में तेज उछाल आया है। जो गुड़ कुछ समय पहले रु 40-50 प्रति किलो बिक रहा था, उसकी कीमत अब कई बाजारों में रु 75 से रु 90 प्रति किलो तक पहुंच गई है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा गुड़ उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 70 फीसदी से ज्यादा बताई जाती है। देश में पैदा होने वाले गन्ने का करीब 20-30 फीसदी हिस्सा गुड़ और खांडसारी बनाने में इस्तेमाल होता है। इसके बावजूद घरेलू बाजार में गुड़ की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।
जाने किन राज्यों में तेजी से बढ़े गुड़ के दाम
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा समेत कई राज्यों के बाजारों में गुड़ के भाव बढ़े हैं। कारोबारियों के मुताबिक, पिछले एक महीने में कुछ बाजारों में कीमतों में करीब 40 से 60 फीसदी तक की तेजी देखी गई है।
उत्तर प्रदेश में रु50 वाला गुड़ रु90 तक पहुंचा
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में करीब 15 दिन में गुड़ का भाव रु70 से बढ़कर रु90 प्रति किलो हो गया। मेरठ और मुरादाबाद में रु60-65 वाला गुड़ अब करीब रु80 किलो बिक रहा है।
कानपुर में भी कीमत रु60 से बढ़कर करीब रु80 किलो हो गई है। नोएडा और गाजियाबाद में गुड़ रु70-80 प्रति किलो के आसपास बिक रहा है।
लखीमपुर खीरी में रु50-55 किलो वाला गुड़ अब रु75-80 तक पहुंच गया है। वहीं गोरखपुर और वाराणसी में भी कीमतें बढ़कर करीब रु60-70 प्रति किलो हो गई हैं।
मध्य प्रदेश में भी बढ़े रेट
मध्य प्रदेश की प्रमुख मंडियों में गुड़ का थोक भाव करीब रु71-72 प्रति किलो बताया जा रहा है, जबकि खुदरा बाजार में सामान्य गुड़ करीब रु80 किलो बिक रहा है।
प्रीमियम और ऑर्गेनिक गुड़ के दाम भी बढ़े हैं। पहले करीब रु120 किलो मिलने वाला ऑर्गेनिक गुड़ अब लगभग रु150 किलो तक पहुंच गया है।
आखिर क्यों बढ़ रहा है गुड़ का भाव?
गुड़ की कीमतों में तेजी के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। पुराने पेराई सीजन का स्टॉक लगभग खत्म होने की स्थिति में है, जबकि नए गन्ने की पेराई और गुड़ कोल्हुओं का काम अक्टूबर-नवंबर में पूरी क्षमता से शुरू होने की उम्मीद है।
इसके अलावा सर्दियों में गुड़ की मांग सामान्य तौर पर बढ़ जाती है। इसी वजह से थोक कारोबारी पहले से गुड़ की खरीदारी कर रहे हैं।
चीनी की कीमतों में तेजी का असर भी गुड़ की मांग पर पड़ा है। कई खाद्य उत्पादों में अब चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जिससे इसकी खपत और मांग दोनों बढ़ी हैं।
गन्ने के उत्पादन में कमी का भी असर
इस सीजन में गन्ने के उत्पादन पर असर पड़ने से गुड़ बनाने वाले कोल्हुओं को भी पर्याप्त कच्चा माल नहीं मिल पाया। इससे गुड़ का उत्पादन प्रभावित हुआ और बाजार में उपलब्धता पर दबाव बढ़ा।मांग बढ़ने और आपूर्ति सीमित रहने से कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।
25 लाख लोगों की आजीविका से जुड़ा है गुड़ उद्योग
गुड़ सिर्फ रसोई में इस्तेमाल होने वाला उत्पाद नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। देश में करीब 25 लाख किसान, मजदूर और छोटे ग्रामीण उद्यमी गुड़ उद्योग से सीधे जुड़े हुए हैं।
भारत दुनिया के कुल गुड़ उत्पादन का 70 फीसदी से अधिक हिस्सा पैदा करता है। घरेलू खपत के साथ भारतीय गुड़ की विदेशी बाजारों में भी मांग बढ़ी है।
गुड़ का भी बढ़ रहा है निर्यात
भारत से गुड़ और इससे बने पारंपरिक कन्फेक्शनरी उत्पादों का निर्यात पिछले वर्षों में बढ़ा है। अमेरिका, यूएई, इंडोनेशिया, नाइजीरिया और नेपाल भारतीय गुड़ के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं।
नेचुरल और अनरिफाइंड स्वीटनर की बढ़ती मांग ने भारतीय गुड़ को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मजबूत पहचान दिलाई है।
चीनी के मुकाबले गुड़ की बढ़ती मांग
गुड़ को रिफाइंड चीनी के विकल्प के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है। कई लोग इसे पारंपरिक और कम प्रोसेस्ड स्वीटनर मानते हैं। इसी वजह से घरों के अलावा खाद्य उत्पादों में भी गुड़ का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
यानी एक तरफ चीनी महंगी हो रही है और दूसरी तरफ गुड़ की मांग बढ़ने से उसके दाम भी ऊपर जा रहे हैं। अगर नए गन्ने की पेराई शुरू होने के बाद बाजार में गुड़ की सप्लाई बढ़ती है, तो आने वाले समय में कीमतों पर कुछ दबाव कम होने की उम्मीद की जा सकती है।