हरियाणा में पार्ट-टाइम कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर: सरकार पुरानी पेंशन योजना का लाभ देगी; हाई कोर्ट ने निर्देश जारी किए
Udaipur Times, Haryana News, Old Pension Scheme: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा के सरकारी स्कूलों के उन कर्मचारियों को राहत दी है, जिन्हें शुरुआत में पार्ट-टाइम आधार पर काम करने के बाद नियमित (रेगुलर) किया गया था। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि नियमित होने से पहले पार्ट-टाइम, दैनिक वेतन (डेली-वेज) या तदर्थ (एड-हॉक) आधार पर की गई लगातार सेवा को पेंशन के लिए 'क्वालिफाइंग सर्विस' (मान्य सेवा) माना जाएगा। इससे इन कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ उठाने का रास्ता साफ हो गया है। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने जगदीश और अन्य लोगों द्वारा दायर एक याचिका पर यह फैसला सुनाया।
याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि सरकारी स्कूलों में नियमित होने से पहले की गई उनकी सेवा को पेंशन की गणना में शामिल किया जाए। उन्होंने OPS के तहत पेंशन, रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और अन्य वित्तीय लाभ देने की भी मांग की, साथ ही नई पेंशन योजना (NPS) के तहत बने उनके खातों की जगह जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) खाते खोलने का अनुरोध किया।
भर्ती 1983 और 2003 के बीच हुई थी
कर्मचारियों के अनुसार, उन्हें 1983 और 2003 के बीच शुरुआत में पार्ट-टाइम आधार पर नियुक्त किया गया था। हरियाणा सरकार की 11 नवंबर, 2003 और 27 फरवरी, 2004 की नियमितीकरण नीतियों के तहत उन्हें अलग-अलग समय पर नियमित किया गया। उन्होंने तर्क दिया कि नियमित होने से पहले की गई लगातार सेवा को पेंशन लाभों की गणना से बाहर नहीं रखा जा सकता। हाई कोर्ट ने कहा कि नियमित होने से पहले की गई पार्ट-टाइम, दैनिक वेतन, तदर्थ या अस्थायी सेवा को पेंशन के लिए 'क्वालिफाइंग सर्विस' के रूप में शामिल करने का मुद्दा पहले ही कई अदालती फैसलों में स्पष्ट किया जा चुका है।
तकनीकी आधार पर पेंशन लाभों से वंचित करना अन्यायपूर्ण
कोर्ट ने जीवन लता, राजेश कुमार, बिमला देवी, जगदीश और ओम प्रकाश के मामलों का हवाला दिया। इसके अलावा, हरियाणा के 'जिले सिंह' मामले का भी जिक्र किया गया, जिस पर बाद में एक डिवीजन बेंच ने भी मुहर लगाई थी। साथ ही, पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड बनाम सतनाम सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि जिन कर्मचारियों ने लंबे समय तक लगातार सेवा दी है और बाद में नियमित हुए हैं, उन्हें तकनीकी आधार पर पेंशन लाभों से वंचित करना अन्यायपूर्ण है।
184 कर्मचारियों के पक्ष में सरकार को निर्देश जारी
हाई कोर्ट ने 184 कर्मचारियों की ओर से दायर याचिका को स्वीकार कर लिया है और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि उनकी पेंशन की गणना करते समय, उनकी शुरुआती नियुक्ति की तारीख से लेकर नियमित होने की तारीख तक की सेवा अवधि को भी शामिल किया जाए। नतीजतन, पेंशन और सेवानिवृत्ति से जुड़े अन्य लाभों को तय करते समय इस नियमित सेवा अवधि को भी जोड़ा जाएगा। नियुक्ति और नियमित होने की तारीखों सहित सभी संबंधित तथ्यों का सत्यापन किया जाएगा। कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर ये लाभ दे दिए जाने चाहिए।