हरियाणा के हजारों कच्चे कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, पक्का करने को लेकर आया बड़ा आदेश
Udaipur Times, Haryana News : हरियाणा के हजारों कच्चे कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। हरियाणा के सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों में बरसों से सेवा दे रहे हजारों कच्चे कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर आई है। पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के नियमितीकरण (Regularization) के दावों पर राज्य सरकार को नए सिरे से विचार करने का बड़ा आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर होगी समीक्षा
अदालत ने यह फैसला 16 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा 'मदन सिंह मामले' में दिए गए निर्णय के आधार पर लिया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अब कर्मचारियों के दावों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए संवैधानिक सिद्धांतों के अनुसार ही विचार किया जाएगा।
मुख्य बिंदु जो आपको जानने जरूरी हैं:
6 महीने की समय सीमा: कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि प्रत्येक कर्मचारी के मामले की व्यक्तिगत जांच की जाए और 6 माह के भीतर ठोस कारणों के साथ आदेश पारित किया जाए।
यथास्थिति बरकरार: जब तक सरकार इन दावों पर अंतिम फैसला नहीं लेती, तब तक कर्मचारियों की मौजूदा सेवा स्थिति में कोई भी प्रतिकूल बदलाव (जैसे पद से हटाना) नहीं किया जा सकेगा।
पिछली नीतियों पर भी नजर: अब वर्ष 1996, 2003, 2011, 2014 और 2024 की नीतियों के तहत आने वाले मामलों पर फिर से गौर किया जाएगा।
इन विभागों पर पड़ेगा सीधा असर: इस सुनवाई में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम, हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम, नगर निगम पानीपत, नगर परिषद भिवानी और हरियाणा आवास बोर्ड जैसे कई प्रमुख विभाग शामिल थे।
कर्मचारियों को क्या करना होगा?
अदालत के निर्देशानुसार, आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के दो सप्ताह के भीतर कर्मचारियों को अपने संबंधित विभाग में अपना विस्तृत अभ्यावेदन (Representation) जमा करना होगा। सरकार ने भी अदालत को आश्वस्त किया है कि सभी सेवा रिकॉर्ड और पात्रता की जांच नए सिरे से पारदर्शी तरीके से की जाएगी।
निष्कर्ष:
यह आदेश उन कर्मचारियों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है जो लंबे समय से पक्का होने का इंतजार कर रहे थे। अब गेंद हरियाणा सरकार के पाले में है कि वह छह महीने के भीतर इस प्रक्रिया को कैसे पूरा करती है।
