हरियाणा में फसल अवशेष जलाने वालों पर सरकार की नजर ! सेटेलाईट से होगी निगरानी, 164 नोडल अधिकारी नियुक्त
Udaipur Times, Haryana News, भिवानी : जिले में धान की कटाई के दौरान फसल अवशेष (पराली) जलाने की घटनाओं पर पूर्ण अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। डीसी साहिल गुप्ता के निर्देशानुसार कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने जिले के धान बिजाई वाले गांवों में 164 नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, जो खेतों पर चप्पे-चप्पे पर पैनी नजर रखेंगे। जिले में धारा 163 लागू कर दी गई है। इसके साथ-साथ सेटेलाईट निगरानी की जाएगी।
फसल अवशेषों में आग लगाने वालों पर तुरंत प्रभाव से कार्रवाई होगी। कृषि विभाग ने किसानों को अपील करते हुए कहा है कि वे किसी भी कीमत पर फसल अवशेषों में आग ना लगाएं।
कृषि विभाग, राजस्व विभाग, पंचायत विभाग एवं पुलिस विभाग के अधिकारियों की संयुक्त एनफोर्समेंट टीमें गठित कर दी गई हं। सरकार के निर्देशों के तहत हर खेत पर सातों दिन 24 घंटे सैटेलाइट मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए निगरानी रखी जाएगी। पराली प्रोटेक्शन फोर्स द्वारा एएफएल ट्रैकिंग, आईसीएआर एवं तकनीक की मदद से रियल-टाइम कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जिला में 75 हजार मीट्रिक टन पराली उत्पादन का अनुमान, जागरूकता अभियान जारी
उप कृषि निदेशक राजेश सिहाग ने बताया कि जिले के 105 गांवों में किसानों द्वारा कुल 50,157 एकड़ क्षेत्र में धान की खेती की गई है, जिससे लगभग 75,000 मीट्रिक टन पराली उत्पादन होने की संभावना है। किसानों को पराली प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए गांवों व स्कूलों में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं, ताकि बच्चों के माध्यम से भी किसानों को जागरूक किया जा सके।
उन्होंने बताया कि पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे। इसके तहत 5000 से 30000 रुपये तक का जुर्माना, एफआईआर, मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर रेड एंट्री दर्ज करने के साथ-साथ आगामी दो वर्षों तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का कड़ा प्रावधान किया गया है।
100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी, उठाएं 1200 रुपए प्रोत्साहन राशि का लाभ
सहायक कृषि अभियंता नसीब सिंह धनखड़ ने बताया कि धान बिजाई वाले 105 गांवों में प्रत्येक 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी तैनात किया गया है। ये 164 नोडल अधिकारी किसानों से सीधा संवाद स्थापित कर उन्हें पराली न जलाने के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकृत किसान आधुनिक कृषि यंत्रों की सहायता से इन-सीटू (खेत में ही) अथवा एक्स-सीटू (खेत से बाहर) पराली का उचित प्रबंधन करें।
ऐसा करने से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी, किसान भारी जुर्माने व कानूनी कार्रवाई से बच सकेंगे और हरियाणा सरकार द्वारा दी जा रही 1200 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि का सीधा लाभ भी प्राप्त कर सकेंगे।