अहिंसा परमो धर्म पर भारत सरकार ने जारी किये दो डाक टिकिट
उदयपुर 19 जून 2019 । भारतीय डाक विभाग ने महात्मा गांधी की 150 वीं जयन्ती पर जारी महत्वपूर्ण स्मारक डाक-टिकिटों की श्रृखंला में दो महत्वपूर्ण डाकटिकिटों का सैट जारी किया। जिस पर अहिंसा परमो धर्म मूख्य सूत्र वाक्य अंकित किया गया है। पन्द्रह-पन्द्रह रूपयें के मूल्य वर्ग के जारी डाक टिकिटों पर महात्मा गांधी का चित्र अंकित है।

उदयपुर 19 जून 2019 । भारतीय डाक विभाग ने महात्मा गांधी की 150 वीं जयन्ती पर जारी महत्वपूर्ण स्मारक डाक-टिकिटों की श्रृखंला में दो महत्वपूर्ण डाकटिकिटों का सैट जारी किया। जिस पर अहिंसा परमो धर्म मूख्य सूत्र वाक्य अंकित किया गया है। पन्द्रह-पन्द्रह रूपयें के मूल्य वर्ग के जारी डाक टिकिटों पर महात्मा गांधी का चित्र अंकित है।
पुष्पेन्द्र मुनि ने बताया कि अहिंसा परमो धर्म संस्कृत भाषा का सूत्र वाक्य है। जिसका मुख्य रूप से जैन व हिंदू में प्रयोग हुआ है। महात्मा गांधी के जीवन में अहिंसा की गहरी प्रतिष्ठा का श्रेय जैन धर्म को जाता है जो उन्होंने जैन मुनि केचरदास जैन संत श्रीमद् राजचंद तथा जैन ग्रन्थों से सीखी। देश का स्वतंत्रता आन्दोलन और उसकी सफलता की मुख्य धुरी अहिंसा रही है और गांधी का पूरा जीवन अहिंसामय था। जिसने अहिंसा से पूरी दुनिया को लोहा मनवाया था। वर्तमान समय में पूरा विश्व अहिंसा के सिद्धान्तों के अपना रहा है।
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मुनि ने बताया कि काफी समय से उक्त वाक्य लिखे डाक टिकिट की मांग की जा रही थी। यह भारत का प्रथम डाक टिकिट है जिस पर अहिंसा परमो धर्म वाक्य अंकित किया गया है। एक डाक टिकिट में शेर व गाय का साथ-साथ दर्शाया गया है। अहिंसा व सह अस्तित्व की महिमा बताने के लिये यह अंकन जैन साहित्य चित्रावलियों में पाया जाता है। अहिंसा की महिमा को डाक टिकिट अंकित करने के लिये संचार मंत्री व डाक विभग का आभार ज्ञापित किया।

