हरियाणा में सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए दादी बनी सुपर-स्टूडेंट, 63 साल की उम्र में पास की 10वीं कक्षा
Udaipur Times, Haryana News : अगर जीवन में कुछ भी काम करना हो या सीखना हो तो उसके लिए उम्र कोई महत्व नहीं रखती है। अगर किसी के भी जीवन में कुछ नया करने का जनून होता है तो किसी भी समय और किसी भी उम्र में अपना सपना पूरा कर सकता है। आज हम इसी कहानी की बात करने जा रहे है जिन्होंने बिना उम्र देखें अपने सपने को सच करने के लिए 63 साल की आयु में ही अपनि पढ़ाई शुरू कर दी।
जब इस उम्र में लोग आराम करने की सोचते हैं, वही हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले की 63 वर्षीय सुशीला देवी ने एस कमाल रक दिखाया है जिसकी हर तरफ कचर्चा हो रही है। सुशीला देवी ने NIOS की 10वीं की परीक्षा में 79.6% अंक हासिल कर हर किसी को हैरान कर दिया। Haryana News
इस उपलब्धि के साथ उन्होंने वह मलाल भी दूर किया, जो उन्हें बचपन में दादा की ओर से पांचवीं के बाद पढ़ाई छुड़वाने पर हुआ था। मगर, एक दिन मजाक-मजाक में पढ़ाई की इच्छा जाहिर करने को उनके बेटे ने सीरियसली ले लिया। बस फिर क्या था, NIOS से दसवीं का फार्म भरवा दिया।
जानकारी के अनुसार रिजल्ट आया तो हर किसी की खुशी का ठिकाना नहीं था। सुशीला ने फर्स्ट डिविजन में परीक्षा पास की थी। उन्होंने अंग्रेजी में 89, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में 88, गणित में 78, पेंटिंग में 76 और हिंदी में 67 अंक प्राप्त किए। Haryana News
जून, 1981 में उनकी शादी गांव देवनगर (चामधेड़ा) निवासी बाबूलाल से हुई थी। पति किसान है। उनके तीन बच्चे (दो बेटी और एक बेटा) हुए, जिनमें एक बेटी पवनेश बैंक कर्मी, दूसरी रीना यादव प्राइवेट स्कूल और बेटा विष्णु गांव का सरपंच रह चुका है। वह जेजेपी का युवा जिला प्रभारी भी है। Haryana News
मिली जानकारी के अनुसार शादी के बाद भी उनकी पढ़ने की आदत नहीं छूटी। वे नियमित रूप से अखबार पढ़ती हैं। अखबार पढ़ने में उन्हें शुरू से ही कोई परेशानी नहीं हुई। उन्होंने बताया कि अंग्रेजी पढ़ने में तो थोड़ी दिक्कत आती थी, मगर हिंदी में वे कभी भी कहीं पर नहीं अटकतीं।
जानकारी के मुताबिक सुशीला ने बताया कि दसवीं में सफलता से उसका हौसला बढ़ा है। परिवार ने पूरा सपोर्ट किया है। अब वह 12वीं के पेपर भी देंगी। कहती है कि पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नहीं होती। अगर मन में सच्ची लगन और कुछ नया करने का जज़्बा हो, तो जीवन के किसी भी पड़ाव में पढ़ाई शुरू की जा सकती है या कोई नई कला सीखी जा सकती है। Haryana News
मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उनका बेटा विष्णु पहले सरपंच रह चुका है और अब वे भी पढ़ी-लिखी हो गई हैं। यदि गांव के लोग चाहेंगे तो भविष्य में वे सरपंच का चुनाव भी लड़ सकती हैं। बताया कि उनके गांव में 1200 के करीब वोट हैं। बेटा सबसे अधिक 171 वोटों से चुनाव जीता था। इस योजना में वह 28 वोटों से हार गया।
