मेट्रो को लेकर बड़ी खुशखबरी! दिवाली से पहले इन रूटों को मिली मंजूरी, नमो भारत के साथ कनेक्टिविटी भी शामिल

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मेट्रो को लेकर बड़ी खुशखबरी! दिवाली से पहले इन रूटों को मिली मंजूरी, नमो भारत के साथ कनेक्टिविटी भी शामिल 

Greater Noida Metro: ग्रेटर नोएडा वेस्ट में लाखों निवासियों के लिए मेट्रो कनेक्टिविटी की लंबे समय से चली आ रही उम्मीद अब पूरी होती दिख रही है। उम्मीद है कि दिवाली या नवरात्रि के आसपास कोई अच्छी खबर मिल सकती है। प्रस्तावित एक्वा लाइन विस्तार जो नोएडा सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4 (किसान चौक) तक जाएगा। इसको केंद्र सरकार से अगले चरण की मंजूरी मिलने की उम्मीद है। 

सितंबर की जानकारी के अनुसार, प्रोजेक्ट की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) अभी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के पास है, और जरूरी 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) मिलने के बाद केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी का इंतजार है।

प्रस्तावित कॉरिडोर लगभग 7.5 KM लंबा है और पूरा ट्रैक एलिवेटेड (ऊंचाई पर बना) होगा। इस रूट पर पांच स्टेशन प्रस्तावित हैं। प्रोजेक्ट को जुलाई में पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) से मंज़ूरी मिल गई थी। अब केंद्रीय कैबिनेट से मंज़ूरी मिलने के बाद अगले चरणों जैसे टेंडरिंग प्रक्रिया और निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की तैयारी चल रही है।

सेक्टर-51 से किसान चौक तक चलेगी मेट्रो

ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो लाइन को मौजूदा एक्वा लाइन का ही विस्तार माना जा रहा है। प्रस्तावित रूट नोएडा सेक्टर-51 से शुरू होकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-4 (किसान चौक के पास) तक जाएगा।

इस कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित पांच स्टेशन ये हैं:

सेक्टर-61
सेक्टर-70
सेक्टर-122
सेक्टर-123
ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4 (किसान चौक के पास)

सितंबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (NMRC) ने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए ज़रूरी NOC मिल चुके हैं, और केंद्रीय मंज़ूरी मिलने के बाद डेवलपर चुनने के लिए टेंडर जारी किए जा सकते हैं।

लगभग पांच लाख लोगों को संभावित फायदा

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बड़ी संख्या में रिहायशी सोसायटियां बनी हैं और यहां की आबादी लगातार बढ़ रही है। विभिन्न रिपोर्टों का अनुमान है कि इस प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर से इलाके के लगभग पांच लाख लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट का फ़ायदा मिलेगा। अभी, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और नोएडा के बीच आने-जाने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़क परिवहन पर निर्भर हैं। 

यात्रियों को अक्सर पीक आवर्स के दौरान ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता है, खासकर गौर चौक और उसके आस-पास के इलाकों में। मेट्रो कॉरिडोर पूरा होने के बाद, इस रूट पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का एक और विकल्प मिल जाएगा।

सेक्टर-61 में ब्लू लाइन के साथ इंटरचेंज की योजना

सेक्टर-61 को प्रस्तावित रूट पर एक अहम कनेक्टिविटी पॉइंट माना जा रहा है। यहां दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन के साथ इंटरचेंज की संभावना से यात्रियों को न केवल नोएडा के भीतर बल्कि दिल्ली-NCR क्षेत्र के अन्य हिस्सों में भी यात्रा करने के विकल्प मिल सकते हैं। संशोधित प्रोजेक्ट प्लान में सेक्टर-61 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4 तक फैले एक कॉरिडोर को शामिल किया गया है।

शुरुआती रूट लंबा था; बाद में बदलाव किया गया

ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो के लिए शुरुआती प्रस्ताव काफी लंबा था। मूल रूप से, सेक्टर-61 से ग्रेटर नोएडा में नॉलेज पार्क-5 तक लगभग 18 KM के कॉरिडोर का प्रस्ताव था। बाद में, प्रोजेक्ट में बदलाव करके पहले चरण को सेक्टर-51 और ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4 के बीच के हिस्से तक सीमित कर दिया गया। संशोधित प्रोजेक्ट में पांच स्टेशनों को प्राथमिकता दी गई है। इसका मकसद ग्रेटर नोएडा वेस्ट को जल्द मेट्रो कनेक्टिविटी देना और प्रोजेक्ट को व्यावहारिक तरीके से आगे बढ़ाना है।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी

सितंबर में दी गई जानकारी के अनुसार, NMRC के मैनेजिंग डायरेक्टर कृष्णा करुणेश ने बताया कि प्रोजेक्ट की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) अभी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के पास है। जरूरी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिलने के बाद, अब प्रोजेक्ट को केंद्रीय स्तर पर मंजूरी का इंतजार है। 

मंजूरी मिलने के बाद, कंस्ट्रक्शन एजेंसी चुनने के लिए टेंडर जारी किया जाएगा। इस तरह, ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो प्रोजेक्ट अभी बन नहीं रहा है, बल्कि यह अंतिम केंद्रीय मंजूरी और उसके बाद की टेंडर प्रक्रिया से पहले के चरण में है। असल कंस्ट्रक्शन की समय-सीमा मंजूरी और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगी।

यह प्रोजेक्ट ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासियों के लिए बहुत अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे नोएडा के लिए सीधी मेट्रो कनेक्टिविटी मिलेगी। प्रस्तावित पांच-स्टेशन वाला एलिवेटेड कॉरिडोर पूरा होने के बाद, इलाके के यात्रियों को मौजूदा सड़क परिवहन विकल्पों के साथ-साथ पब्लिक ट्रांसपोर्ट का एक नया विकल्प भी मिल जाएगा।

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