वाहन चालकों के लिए बड़ी खुशखबरी ! केंद्र सरकार की नई SOP जारी, बार-बार टोल भुगतान से मिलेगी राहत
Udaipur Times, No Booths within the first 60 kilometers of the new highway: हाईवे पर सफर करने वाले लोगों को बहुत जल्द बड़ी राहत मिलने वाली है। केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर टोल प्लाजा स्थापित करने के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी की है। इसके अंतर्गत अब किसी भी नए हाईवे पर 60 किलोमीटर से पहले टोल प्लाजा नहीं बनाया जाएगा। साथ ही दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे सहित कुछ प्रमुख मार्गों पर टोल नियमों के उल्लंघन करने वालों को ई-नोटिस भेजने की व्यवस्था भी लागू की जाएगी।
60 किमी से पहले नहीं बनेगा नया टोल प्लाजा
नई SOP के मुताबिक, किसी भी नए राष्ट्रीय राजमार्ग या एक्सप्रेसवे पर दो टोल प्लाजा के बीच न्यूनतम दूरी 60 किलोमीटर होगी। यदि किसी विशेष परिस्थिति में इससे कम दूरी पर टोल प्लाजा बनाने की जरूरत पड़ती है, तो इसके लिए एक उच्च स्तरीय समिति से विशेष अनुमति लेनी होगी।
शहरों के पास टोल बनाने पर भी सख्ती
केंद्र सरकार ने यह भी तय किया है कि किसी शहर या नगर की सीमा से 10 किलोमीटर के भीतर टोल प्लाजा बनाने के लिए भी विशेष मंजूरी जरूरी होगी। इससे शहरों के आसपास रहने वाले लोगों को बार-बार टोल चुकाने से राहत मिलेगी।
कम दूरी पर टोल प्लाजा को लेकर मिलती रही हैं शिकायतें
देश के कई हिस्सों में कम दूरी पर बने टोल प्लाजा को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के गाजियाबाद स्थित छिजारसी टोल प्लाजा और एक्सप्रेसवे के एंट्री-एग्जिट प्वाइंट्स के बीच की कम दूरी को लेकर स्थानीय लोग कई बार विरोध जता चुके हैं। इसी तरह पंजाब और हरियाणा को जोड़ने वाले अंबाला-चंडीगढ़ मार्ग (एनएच-152 और एनएच-44) पर भी कम दूरी में कई टोल प्लाजा मौजूद हैं।
टोल नाकों पर ई-नोटिस जारी होगा
दिल्ली के टोल नाकों पर नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ अब ई-नोटिस जारी किया जाएगा। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने टोल नाकों के नए उपनियमों में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे सदन से मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे अंतिम स्वीकृति के लिए दिल्ली सरकार के पास भेजा जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद टोल नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ डिजिटल माध्यम से कार्रवाई की जाएगी।
हाई लेवल कमेटी करेगी निगरानी
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने नई SOP के अनुपालन के लिए एक हाई लेवल टोल कमेटी का गठन किया है। यह समिति तय करेगी कि किन परिस्थितियों में 60 किलोमीटर से कम दूरी पर टोल प्लाजा स्थापित किया जा सकता है। समिति टोल प्लाजा की योजना और संचालन की निगरानी भी करेगी।
देश में कई जगह कम दूरी पर हैं टोल प्लाजा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 130 ऐसे टोल प्लाजा हैं, जहां 60 किलोमीटर से कम दूरी के भीतर ही लोगों को दोबारा टोल देना पड़ता है। इनमें से करीब 22 टोल प्लाजा तो 30 किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित हैं। नई नीति से भविष्य में ऐसी स्थितियों पर रोक लगने की उम्मीद है।
यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत
नई SOP लागू होने के बाद लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों, रोजाना आने-जाने वाले कर्मचारियों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को बड़ा फायदा मिलेगा। सरकार का मानना है कि टोल व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ने के साथ-साथ लोगों का समय और पैसा दोनों बचेंगे।
