176 साल के इतिहास में पहली बार महिला बनीं GSI की महानिदेशक

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GSI Director General Varsha Agwale

 

Udaipur Times, Geological Survey of India: श्रीमती वर्षा अशोक अगलावे ने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की 54वीं महानिदेशक के रूप में पदभार ग्रहण किया है। वह भारत के इस प्रमुख भू-वैज्ञानिक संगठन के 176 वर्षों के इतिहास में इसकी प्रमुख बनने वाली प्रथम महिला हैं। उन्होंने असित साहा का स्थान लिया है, जिन्होंने 27 जुलाई 2024 से 31 जुलाई 2026 तक जीएसआई के महानिदेशक के रूप में काम किया।

तीन दशकों से ज्यादा समय तक पेशेवर अनुभव रखने वाली एक प्रतिष्ठित भूवैज्ञानिक, श्रीमती अगलावे ने भारतीय खान ब्यूरो में सेवा देने के बाद 1992 में GSI में कार्यभार ग्रहण किया। अपने करियर के दौरान केंद्रीय मुख्यालय में अपनी सेवा देने के अलावा उन्होंने जीएसआई के केंद्रीय, उत्तरी एवं पूर्वी क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक एवं प्रशासनिक पदों पर कार्य किया है। वर्तमान पदभार ग्रहण करने से पहले, वह पूर्वी क्षेत्र, कोलकाता में अतिरिक्त महानिदेशक एवं विभागाध्यक्ष थीं।

श्रीमती अगलावे जीवाश्म विज्ञान एवं परागकण विज्ञान की विशेषज्ञ हैं और उन्होंने उत्तर क्रिटेशियस– पैलियोजीन अवसादों, के-टी सीमा, तथा सतपुड़ा-गोंडवाना बेसिनों के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने मध्य भारत में सालबर्डी–घोरपेंड क्षेत्र को डायनासोर के घोंसले के नए स्थल के रूप में वर्णित किया, अंतरराष्ट्रीय शोध में योगदान दिया और अमेरिका के मिशिगन विश्वविद्यालय के जीवाश्म विज्ञान संग्रहालय के साथ सहयोगात्मक जीवाश्म विज्ञान संबंधी अध्ययनों में भाग लिया। उन्होंने कनाडा के टोरंटो में आयोजित पीडीएसी 2023 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की सदस्य के रूप में जीएसआई का प्रतिनिधित्व किया।

वैज्ञानिक के रूप में अपना योगदान देने के अलावा, उन्होंने GSI की संस्थागत क्षमताओं को मज़बूत करने में भी अहम भूमिका निभाई है। इसमें लखनऊ स्थित उत्तरी क्षेत्र कार्यालय में अत्याधुनिक जीवाश्म विज्ञान प्रयोगशाला की स्थापना और पूरे देश में कई विषयों वाले भू-वैज्ञानिक कार्यक्रमों का नेतृत्व करना शामिल है।

पदभार ग्रहण करने के बाद, श्रीमती अगलावे ने महत्वपूर्ण खनिजों की खोज एवं खनिज सुरक्षा के क्षेत्र में भारत सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप GSI के कार्यक्रमों को संरेखित करने की प्रतिबद्धता दोहरायी।

उन्होंने उन्नत भूभौतिकीय जांच, त्वरित अन्वेषण कार्यक्रमों एवं सुदृढ़ प्रयोगशाला अवसंरचना के माध्यम से गहराई में मौजूद एवं छिपे हुए खनिज भंडारों के अन्वेषण में तेजी लाने पर बल दिया। उन्होंने अपतटीय खनिज अन्वेषण का विस्तार करने, अत्याधुनिक भूवैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने, प्राकृतिक आपदा अध्ययन एवं हिमनद विज्ञान जैसे लोकहित वाले भूवैज्ञानिक कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने तथा वैज्ञानिक प्रकाशनों एवं युवा भूवैज्ञानिकों के क्षमता निर्माण को बढ़ाने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।

उन्होंने GSI की वैज्ञानिक विशेषज्ञता एवं बढ़ती तकनीकी क्षमताओं पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि यह संगठन देश के लिए आवश्यक एवं रणनीतिक खनिजों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सुदृढ़ स्थिति में है, साथ ही यह भू-विज्ञान में उत्कृष्टता एवं नवाचार के माध्यम से संसाधनों के सतत विकास में भी योगदान दे रहा है।

 

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