हरियाणा के किसान ने सेब के साथ लगाया जापानी फल का बाग, अब कर रहा लाखों में कमाई

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हरियाणा के किसान ने सेब के साथ लगाया जापानी फल का बाग, अब कर रहा लाखों में कमाई 

Udaipur Times, Haryana News : हरियाणा में कुरुक्षेत्र के झांसा क्षेत्र के बाबकपुर निवासी किसान विक्रमजीत सिंह बागवानी से लाखों रुपए की कमा रहे हैं। एमटेक कंप्यूटर इंजीनियरिंग करने के बाद विक्रमजीत ने पहले कॉरपोरेट कंपनी में जॉब की। लेकिन उन्होंने नौकरी को अलविदा कहा और अपने खेतों की तरफ रुख किया। 2020 में उन्होंने हिसार सफेदा वैरायटी के अमरूद का एक एकड़ में बाग लगाया। करीब 4 साल पहले हिमाचल प्रदेश के कृषि वैज्ञानिकों और जिला बागवानी अधिकारी डॉ. शिवेंदु प्रताप सिंह सोलंकी से सेब के बाग का प्रशिक्षण लिया। 

जिस सेब को उगाने के लिए हिमाचल व कश्मीर जैसी ठंडी वादियों, बर्फबारी और अनुकूल मौसम की जरूरत होती थी, उसे विक्रमजीत ने मैदानी इलाके में उगा दिया। अब वे 8 एकड़ में विभिन्न फलों की बागवानी करके करीब 24 रुपए लाख रुपए की आमदनी ले रहे हैं। साथ ही वे प्रदेश के पहले किसान हैं जो जापान के फल परसीमन की बागवानी कर रहे हैं। पिछले साल उन्होंने एक एकड़ में परसीमन के पौधे लगाए हैं। जिन पर अब फल आना शुरू हो गया है। Haryana News

कम ठंड में फल देने वाली किस्मों को चुना, साथ में अन्य फसलें भी ले रहे

विक्रमजीत सिंह ने कहा कि सेब ठंड में पैदा होता है। ऐसे में कुरुक्षेत्र के गर्म मौसम में सेब को उगाने के लिए उन्होंने कम ठंड में फल देने वाली किस्मों का चुनाव किया। जिसमें अन्ना और गोल्डन डोर्सेट किस्म शामिल है। इन किस्मों के पौधों को वे हिमाचल से लेकर आए थे। विक्रमजीत ने बताया कि वे सघन बागवानी के साथ ही बाग लगाने की शुरुआत में खेतों से लहसुन, प्याज, मूंग और उड़द की फसलें भी लेते हैं। इससे आमदनी के लिए फलों का इंतजार नहीं करना पड़ता।

चौथे साल में पौधे से मिले 5 किलो सेब

विक्रमजीत ने बताया कि 4 साल पहले बाग लगाया था। तीसरे साल ही 2 किलो के करीब फल पौधों पर आने लगे थे। चौथे साल प्रति पौधा करीब 5 किलोग्राम फल मिल रहा है। 1500 में से 1200 पौधों पर 5 किलो की एवरेज मानकर 6000 किलो सेब का उत्पादन मिलता है। 1 एकड़ से चौथे साल करीब 7 लाख रुपए की आमदनी ले रहा है। भविष्य में प्रति एकड़ करीब 15 लाख रुपए के सेब ले पाएंगे। Haryana News

एक एकड़ में लगाए 1500 सेब के पौधे

विक्रमजीत ने बताया कि उन्होंने अल्ट्रा हाई डेंसिटी फार्मिंग यानि सघन बागवानी तकनीक को अपनाया। इस तकनीक के जरिए 5 एकड़ का उत्पादन महज 1 एकड़ से लिया जा सकता है। 6 बाय 4 फीट की दूरी पर 1 एकड़ में करीब 1500 सेब के पौधे लगाए। सिंचाई के लिए टपका सिंचाई पद्धति को अपनाया, ताकि हर पौधे को जरूरत के मुताबिक पानी मिलता रहे और पानी की बचत हो।

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