हरियाणा सरकार ने 738 करोड़ की दो परियोजनाओं को दी मंजूरी, अब डिजिटल सुरक्षा होगी ज्यादा मजबूत
Udaipur Times, Haryana News, चंडीगढ़ : हरियाणा को डिजिटल रूप से सुरक्षित और तकनीकी रूप से उन्नत राज्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य स्तरीय सूचना प्रौद्योगिकी संचालन समिति (आईटी प्रिज्म) द्वारा लगभग 738 करोड़ रुपये की दो प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य की साइबर सुरक्षा व्यवस्था का आधुनिकीकरण करना तथा डिजिटल शासन के बुनियादी ढांचे को अधिक सुरक्षित, सक्षम और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाना है।
इन परियोजनाओं में 269 करोड़ रुपये की हरियाणा डिजिटल कवच-सुरक्षा संचालन केंद्र परियोजना (एच-एसओसी) तथा 469 करोड़ रुपये की हरियाणा राज्य डेटा केंद्र 2.0 (एचएसडीसी 2.0) परियोजना शामिल हैं। इनके माध्यम से सरकारी डेटा की सुरक्षा मजबूत करने, ऑनलाइन जनसेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने और राज्य के तेजी से बढ़ते डिजिटल तंत्र के लिए मजबूत तकनीकी आधार तैयार करने में मदद मिलेगी।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने की अध्यक्षता में आज यहां हुई राज्य स्तरीय सूचना प्रौद्योगिकी संचालन समिति (आईटी प्रिज्म) की 51वीं बैठक में इन प्रस्तावों पर विचार किया गया।
नागरिक संसाधन सूचना विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री जे. गणेशन ने बताया कि हरियाणा डिजिटल कवच कार्यक्रम इस पहल का मुख्य हिस्सा है। इसका उद्देश्य सरकारी नेटवर्क, एप्लीकेशन, डेटाबेस और महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे को लगातार परिष्कृत हो रहे साइबर खतरों से सुरक्षित रखना है।
प्रस्तावित सुरक्षा संचालन केंद्र एक केंद्रीकृत साइबर सुरक्षा नियंत्रण एवं निगरानी सुविधा के रूप में कार्य करेगा। यहां चौबीसों घंटे साइबर खतरों पर निगरानी, उनकी समय रहते पहचान, जांच तथा साइबर घटनाओं से निपटने के लिए समन्वित कार्रवाई की जाएगी।
एक राज्य-एक सुरक्षा संचालन केंद्र की अवधारणा पर आधारित यह व्यवस्था विभिन्न सरकारी विभागों में अलग-अलग संचालित साइबर सुरक्षा निगरानी प्रणालियों को एकीकृत करेगी। इससे संभावित साइबर हमलों की शीघ्र पहचान करने और सुरक्षा उल्लंघन की स्थिति में समन्वित कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
इस केंद्र में सुरक्षा सूचना एवं घटना प्रबंधन प्रणाली, स्वचालित घटना प्रतिक्रिया प्रणाली, कंप्यूटर एवं अन्य उपकरणों पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और उनका जवाब देने वाली तकनीक तथा एकीकृत साइबर खतरा सूचना मंच जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इससे संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने, उभरते खतरों का विश्लेषण करने, साइबर घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई करने और संवेदनशील सरकारी सूचनाओं की सुरक्षा मजबूत करने में सहायता मिलेगी।
269 करोड़ रुपये की इस परियोजना को नौ माह में लागू करने तथा इसके बाद पांच वर्षों तक संचालन का प्रस्ताव है। परियोजना के लिए हरियाणा एआई विकास परियोजना के अंतर्गत विश्व बैंक से 25 करोड़ रुपये की सहायता प्रस्तावित है, जबकि शेष 244 करोड़ रुपये राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध करवाए जाएंगे।
इसी के साथ ही हरियाणा राज्य डेटा केंद्र का भी व्यापक तकनीकी आधुनिकीकरण किया जाएगा। इसके अंतर्गत पुराने उपकरणों और प्रणालियों को बदलकर आधुनिक, विस्तारित और सुरक्षित कंप्यूटिंग व्यवस्था स्थापित की जाएगी।
चंडीगढ़ स्थित नए सचिवालय में अगस्त 2012 से संचालित राज्य डेटा केंद्र लगभग 74 सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों को सेवाएं प्रदान कर रहा है। पुराने उपकरणों, नेटवर्किंग प्रणालियों की सीमाओं, सीमित कंप्यूटिंग क्षमता और समर्पित आपदा रिकवरी सुविधा के अभाव को देखते हुए इसके आधुनिकीकरण की आवश्यकता महसूस की गई है।
प्रदेश में 469 करोड़ रुपये की हरियाणा राज्य डेटा केंद्र 2.0 परियोजना के अंतर्गत अगली पीढ़ी का डिजिटल बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा। इसमें उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग प्रणाली, उन्नत डेटा भंडारण, ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट आधारित कंप्यूटिंग के लिए तैयार प्रणालियां, आधुनिक नेटवर्किंग ढांचा और मजबूत साइबर सुरक्षा नियंत्रण शामिल होंगे।
बैठक में सरल 2.0 के विकास एवं क्रियान्वयन पर भी विचार-विमर्श किया गया। यह अगली पीढ़ी का नागरिक सेवा वितरण मंच होगा, जिसका उद्देश्य प्रदेश में सरकारी सेवाओं की कार्यक्षमता, पारदर्शिता और आम नागरिकों तक उनकी पहुंच को और बेहतर बनाना है।
बैठक में हारट्रॉन के प्रबंध निदेशक डॉ. यश गर्ग, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार विभाग के अतिरिक्त सचिव श्री सम्वर्तक सिंह खांगवाल, राज्य ई-मिशन टीम के प्रमुख श्री नितिन बंसल, विश्व बैंक समूह के डिजिटल विशेषज्ञ श्री उत्कर्ष विजय तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।