हरियाणा के इन 10 गांवों में नमो सिटी बसाने की तैयारी, किसानों से नौ हजार एकड़ जमीन खरीदेगी सरकार
Udaipur Times, Haryana News : सरकार ने कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) और दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे के आसपास आधुनिक शहर विकसित करने की तैयारी शुरू की है। बहादुरगढ़, सोनीपत और रोहतक के 10 गांवों की नौ हजार एकड़ जमीन पर नमो सिटी बसाने की योजना है।
HSVP ने ई-भूमि पोर्टल पर किसानों से 30 अक्तूबर तक जमीन देने की स्वीकृति मांगी है। सहमति मिलने पर सरकार नियमानुसार जमीन की खरीद शुरू करेगी। नमो सिटी में रिहायशी, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्र विकसित होंगे। इसका उद्देश्य आवास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन जैसी सुविधाएं देना है। शहर में विश्वस्तरीय विद्यालय और अस्पताल बनेंगे। पार्क और खरीदारी केंद्र जैसी सुविधाएं भी होंगी। परिवहन ढांचा ऐसा होगा जिससे 30 मिनट में जन परिवहन तक पहुंच मिल सके।
नमो सिटी को नमो भारत क्षेत्रीय रेल परिवहन व्यवस्था से जोड़ने की योजना है। बुनियादी ढांचा सरकार तैयार करेगी, जबकि शहर के विकास में निवेशकों की भागीदारी होगी। केंद्र सरकार ने नए शहरों की शुरुआती जरूरतों के लिए पांच हजार करोड़ की सहायता का प्रावधान है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान सरकारें संभावित स्थानों के प्रस्ताव भेजेंगी।
ये हैं 10 गांव जिनकी जमीन चिन्हित की गई
जिला गांव जमीन एकड़ में
रोहतक हसनगढ़ 1320
झज्जर निलोठी 1731
झज्जर खेड़ी जसीर 2269
झज्जर जसौर खेड़ी 1315
झज्जर लोहारहेड़ी 1117
सोनीपत पाई 1040
सोनीपत बरोणा 174
सोनीपत खुरमपुर 440
सोनीपत रोहणा 516
सोनीपत किडोली 30
सरकार ने ई भूमि पोर्टल पर किसानों से जमीन लेने के प्रस्ताव मांगा है। जमीन मिलने के बाद प्रस्तावित योजना को अमलीजामा पहनाया जाएगा। किसान ई-भूमि पोर्टल पर 30 अक्तूबर तक प्रस्ताव दे सकते हैं। - अजय, जेई, HSVP, बहादुरगढ़।
बहादुरगढ़ में 29 सेक्टरों को बसाने का प्रोजेक्ट भी अटका
मास्टर प्लान-2041 के तहत प्रस्तावित 29 सेक्टरों के विकास के लिए करीब 6355 एकड़ जमीन की जरूरत है लेकिन किसान इन सेक्टरों के लिए भी जमीन देने को तैयार नहीं हुए थे। सिर्फ 130 एकड़ जमीन का ही पंजीकरण हो सका था। HSVP ने ई-भूमि पोर्टल के जरिए किसानों से स्वेच्छा से जमीन लेने की प्रक्रिया शुरू की थी लेकिन अधिकांश किसान तैयार नहीं हुए।
सांंखोल, सराय और सादपुर समेत 15 गांवों की जमीन प्रस्तावित थी। बाजार भाव बढ़ने से किसान सरकारी दर पर जमीन देने को तैयार नहीं और कई किसानों ने प्रति एकड़ 10 करोड़ रुपये तक की मांग रखी थी।