हरियाणा सरकार इन लोगों को दे रही 20 लाख रुपये ! ऐसे मिलेगा लाभ

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हरियाणा सरकार इन लोगों को दे रही 20 लाख रुपये ! ऐसे मिलेगा लाभ 

Udaipur Times, Haryana News, सिरसा : हस्तकरघा क्षेत्र को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और पारंपरिक बुनकर व्यवसाय को व्यापक विस्तार देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने हैंडलूम वीवर मुद्रा योजना के माध्यम से पात्र हस्तकरघा बुनकरों, बुनकर उद्यमियों और हस्तकरघा संस्थाओं के लिए रियायती दर पर ऋण उपलब्ध व्यवस्था को और बेहतर और प्रभावी बनाया है। केंद्र सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तकरघा) कार्यालय द्वारा राष्ट्रीय हस्तकरघा विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) के अंतर्गत बुनकरों को व्यवसाय विस्तार, कार्यशील पूंजी की उपलब्धता, उत्पादन क्षमता बढ़ाने तथा आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध करवाया जाएगा। 

हैंडलूम वीवर मुद्रा योजना का मुख्य उद्देश्य पात्र बुनकरों एवं हस्तकरघा संस्थाओं को समयबद्ध, सरल और पारदर्शी तरीके से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के तहत मिलने वाले ऋण का उपयोग व्यवसाय विस्तार, कार्यशील पूंजी, कच्चे माल की खरीद, आधुनिक करघों एवं उपकरणों की व्यवस्था, उत्पादन बढ़ाने, तैयार उत्पादों के विपणन तथा अन्य आवश्यक व्यावसायिक जरूरतों के लिए सकते हैं।

20 प्रतिशत तक मार्जिन मनी के रूप में मिलेगी सहायता

योजना के अंतर्गत ऋण लेने वाले पात्र लाभार्थियों को 20 प्रतिशत तक मार्जिन मनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इससे लाभार्थियों पर शुरुआती वित्तीय बोझ कम होगा और बैंक से ऋण प्राप्त करना अपेक्षाकृत आसान बनेगा। व्यक्तिगत हस्तकरघा बुनकरों एवं बुनकर उद्यमियों को अधिकतम 25 हजार रुपये तक मार्जिन मनी सहायता प्रदान की जाएगी। वहीं पात्र हस्तकरघा संस्थाओं को 20 लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी जो कि प्रत्येक 100 बुनकरों/कर्मकारों पर ₹2.00 लाख तक होगी। यह योजना छोटे, मध्यम तथा संगठित स्तर पर कार्य कर रही हस्तकरघा इकाइयों के लिए बड़ी पहल कही जा सकती है।

ब्याज में विशेष छूट, क्रेडिट गारंटी शुल्क भी दिया जाएगा

योजना के तहत केवल ऋण ही नहीं उपलब्ध करवाया जाएगा, बल्कि पात्र हस्तकरघा संस्थाओं के लिए ब्याज में भी विशेष रियायत दी गई है। योजना के अनुसार पात्र संस्थाओं को तीन वर्ष की अवधि तक 6 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर का लाभ मिलेगा, जो अधिकतम 7 प्रतिशत की सीमा तक देय होगा। इसका उद्देश्य संस्थाओं पर वित्तीय दबाव कम करना तथा उन्हें व्यवसाय विस्तार के लिए प्रोत्साहित करना है। 

कम ब्याज दर पर उपलब्ध ऋण से संस्थाएं उत्पादन बढ़ाने, नए बाजार विकसित करने तथा रोजगार के अतिरिक्त अवसर सृजित करने में सक्षम होंगी। योजना की एक विशेषता यह भी है कि पात्र हस्तकरघा संस्थाओं के लिए तीन वर्ष तक क्रेडिट गारंटी शुल्क का वहन भी सरकार करेगी। इससे बैंकों के माध्यम से ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया और अधिक सरल होगी तथा संस्थाओं को अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं उठाना पड़ेगा।

जनसमर्थ पोर्टल से जुडऩे पर पारदर्शिता और फाइल प्रोसेस में आएगी तेजी

योजना के प्रभावी और पारदर्शी संचालन के लिए हैंडलूम वीवर मुद्रा पोर्टल को जन समर्थ पोर्टल तथा सहभागी 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ एकीकृत किया गया है। इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को ऋण, मार्जिन मनी तथा ब्याज अनुदान का लाभ तेज, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा। 

ऑनलाइन प्रणाली लागू होने से आवेदन प्रक्रिया सरल होगी, दस्तावेजों के सत्यापन में तेजी आएगी और लाभार्थियों को विभिन्न कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता भी कम होगी। सरकार का उद्देश्य वित्तीय सहायता वितरण में पारदर्शिता बढ़ाना और प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह बनाना है।

स्वयं सहायता समूहों और सहकारी समितियों को भी मिलेगा लाभ

यह योजना केवल व्यक्तिगत बुनकरों तक सीमित नहीं है। इसके दायरे में हस्तकरघा बुनकर, बुनकर उद्यमी, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), सहकारी समितियां तथा पात्र हस्तकरघा संस्थाएं भी शामिल हैं। इससे सामूहिक स्तर पर कार्य करने वाले समूहों और संस्थाओं को भी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने तथा आधुनिक विपणन व्यवस्था अपनाने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत सहकारी समितियों के लिए यह योजना स्वरोजगार और सामुदायिक आर्थिक विकास का प्रभावी माध्यम बन सकती है।

हस्तकरघा उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार : दिनेश कुमार

जिला सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम केंद्र के उप निदेशक दिनेश कुमार ने कहा कि हस्तकरघा क्षेत्र केवल पारंपरिक कला और संस्कृति का प्रतीक ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार भी है। सैकड़ों परिवार प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से हस्तकरघा उद्योग से जुड़े हैं। ऐसे में वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण व्यवसाय का विस्तार नहीं कर पाने वाले बुनकरों के लिए यह योजना नई संभावनाएं बनेंगी। 

वित्तीय सहायता मिलने से उत्पादन बढ़ेगा, नए रोजगार सृजित होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। योजना का उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता देना नहीं, बल्कि हस्तकरघा क्षेत्र को आत्मनिर्भर, आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाना भी है। इससे देश की समृद्ध हस्तकरघा विरासत भी संरक्षित होगी।

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