हरियाणा में 3 लाख तक आय वालों के लिए बड़ी खुशखबरी, सरकार देगी 50 हजार रुपये
Udaipur Times, Haryana News : हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करने हेतु बैंकों के सहयोग से विशेष ऋण योजना संचालित की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को विभिन्न आय उपार्जन गतिविधियों से जोडक़र उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को विभिन्न स्वरोजगार एवं आय सृजन योजनाओं के लिए 1.50 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इसके साथ ही लाभार्थियों को योजना लागत का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 50 हजार रुपये (दोनों में से जो कम हो) अनुदान के रूप में प्रदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त निगम कुल योजना लागत का 10 प्रतिशत सीमांत धन (मार्जिन मनी) भी उपलब्ध कराता है, जिसकी अदायगी मात्र 4 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज दर से की जाती है।
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का हरियाणा का स्थायी निवासी होना तथा अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित होना आवश्यक है। आवेदक की आयु 18 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए। परिवार पहचान पत्र में सत्यापित पारिवारिक वार्षिक आय 3 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है, जबकि 2.50 लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही आवेदक को निगम अथवा किसी अन्य वित्तीय संस्था की किसी योजना में डिफॉल्टर घोषित नहीं किया गया होना चाहिए।
आवेदन के लिए परिवार पहचान पत्र, अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड तथा बैंक पासबुक या पोस्ट डेटेड चेक जमा करवाना आवश्यक है। यदि आवेदक वाणिज्यिक वाहन (कमर्शियल व्हीकल) खरीदने के लिए ऋण लेना चाहता है तो उसे ड्राइविंग लाइसेंस भी प्रस्तुत करना होगा। इसके अलावा आवेदक से एक शपथ-पत्र लिया जाएगा, जिसमें वह यह सुनिश्चित करेगा कि ऋण राशि का दुरुपयोग नहीं किया जाएगा, अन्यथा उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
निगम के जिला प्रबंधक कुलदीप ने बताया कि निगम द्वारा प्रदान की जाने वाली सीमांत धनराशि की अदायगी साढ़े पांच वर्षों में छमाही बराबर किस्तों के माध्यम से की जाती है। पहले छह माह के दौरान केवल ब्याज की अदायगी की जाती है। वहीं बैंक अपने ऋण की अदायगी निर्धारित नियमों, शर्तों एवं ब्याज दरों के अनुसार स्वयं करते हैं। उन्होंने पात्र युवाओं, महिलाओं से आह्वान किया कि वे इस योजना का लाभ उठाकर आर्थिक रूप से सशक्त बनें और रोजगार सृजन में अपना योगदान दें।
