हरियाणा में असिस्टेंट प्रोफेसरों के लिए बड़ी खबर, वरिष्ठता सूची पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक
Udaipur Times, Haryana News : हरियाणा से बड़ी खबर सामने आ रही है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य के कॉलेज कैडर में कार्यरत सहायक प्रोफेसरों की वरिष्ठता से जुड़े मामले में बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा जारी 24 दिसंबर 2025 की अंतिम वरिष्ठता सूची पर रोक लगा दी है। इस सूची में एडहॉक आधार पर नियुक्त कर्मचारियों को नियमित रूप से नियुक्त कर्मचारियों से ऊपर वरिष्ठता दी गई थी। हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर इस मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
हरियाणा कॉलेज कैडर में कार्यरत रविंदर कुमार व अन्य याचिकाकर्ताओं की नियमित नियुक्तियां 2001, 2004 व 2011 में हुई थीं। इनमें से दो को 2016-17 में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर पदनामित भी किया जा चुका था। 2017 और 2025 की वरिष्ठता सूचियों में उनकी वरिष्ठता दर्ज थी। निजी प्रतिवादी पहले एडहॉक आधार पर नियुक्त हुए थे। बाद में उन्हें नियमित किया गया व जनवरी 1996 से पूर्व प्रभाव से नियमितीकरण का लाभ दे दिया गया। इसके चलते नई वरिष्ठता सूची में एडहॉक से रेगुलर बने कर्मचारियों को सालों से सेवा दे रहे नियमित कर्मचारियों के ऊपर रख दिया।
याचिकाकर्ताओं ने दलीलें दी कि हाई कोर्ट पहले भी फैसले में कह चुका है कि एडहॉक सेवा की अवधि को वरिष्ठता निर्धारण के लिए नहीं गिना जा सकता। 6 मार्च 2025 को एक अपील में सरकार की सहमति के आधार पर नया आदेश पास हुआ व नई वरिष्ठता सूची बनी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे उस अपील में पक्षकार ही नहीं थे। अंतिम वरिष्ठता सूची को रद्द कर नए सिरे से सूची बने व केवल नियमित नियुक्ति की तिथि के आधार पर आगे की पदोन्नति तय की जाए।
मामले की 3 बड़ी बातें
सरकार की 24 दिसंबर 2025 की अंतिम वरिष्ठता सूची के संचालन पर कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है।
एडहॉक कर्मचारियों को 1996 से पूर्व प्रभाव से नियमित मानकर रेगुलर कर्मचारियों से ऊपर रख दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि हाई कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि एडहॉक सेवा को वरिष्ठता में नहीं गिना जा सकता।